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Saharanpur: किसान की बेटी कोमल की यूपीएससी में छठी रैंक, आईपीएस की ट्रेनिंग से लीव लेकर 3 महीने की थी तैयारी

Tue, 22 Apr 2025 07:46 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Tue, 22 Apr 2025 07:46 PM IST
सार

गांव नठौड़ी के किसान रणबीर सिंह की बेटी कोमल पूनिया ने आईएएस के लिए चयन पक्का कर लिया है। पिछले साल उनकी 474वीं रैंक आई थी। वहीं बीडीओ राजवीर सैनी के बेटे आयुष सैनी ने यूपीएससी में 194वीं रैंक हासिल की है। देवबंद के अर्पित को 421वीं रैंक मिली है। 

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Saharanpur: Farmer's daughter Komal Poonia got sixth rank in UPSC, IPS training is already going on
कोमल पूनिया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नकुड़ स्थित गांव नठौड़ी के किसान रणबीर सिंह की बेटी कोमल पूनिया ने यूपीएससी में छठी रैंक प्राप्त कर आईएएस के लिए चयन पक्का कर लिया है। कोमल ने बीते वर्ष 474वीं रैंक प्राप्त की थी और इन दिनों वह आईपीएस की ट्रेनिंग पर हैदराबाद में हैं। उनकी सफलता पर परिवार में खुशी की लहर है।
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खुशी मनाता कोमल का परिवार। - फोटो : अमर उजाला
कोमल की प्रारंभिक पढ़ाई एक प्राइवेट स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह के लिए प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें सफलता हासिल की। 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय से हुई। 12वीं के बाद प्रवेश परीक्षा के आधार पर उनका चयन बीटेक करने के लिए आईआईटी रुड़की के लिए हुआ। बीटेक करने के तुरंत बाद कोमल ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पहली बार में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी, जिसमें 474वीं रैंक प्राप्त की और उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ। 
पिता रणबीर सिंह ने बताया कि कोमल हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रही है। प्रशिक्षण के बीच में कोमल ने यूपीएससी की तैयारी के लिए तीन महीने की छुट्टी ली और छठी रैंक प्राप्त कर कमाल कर दिया।
 
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मम्मी मुझे आईएएस बनना है 
बेटी की इस उपलब्धि पर मां पदमा सिंह भी बेहद खुश हैं। एमए बीएड तक शिक्षा हासिल करने वाली पदमा सिंह गृहिणी हैं। कोमल का बड़ा भाई विश्वेंद्र सिंह आईआईटी रुड़की में प्रोफेसर है, जबकि बड़ी बहन रितिका पूनिया फिरोजाबाद में एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका है। पदमा सिंह का कहना है कि कोमल हमेशा कहती थी कि मम्मी मुझे आईएएस बनना है। आज बेटी का सपना पूरा हो गया। गांव के प्रधान चौधरी भूपेश सिंह, कोमल के बाबा कंवल सिंह, चाचा नीरज सिंह, ताऊ चौधरी धीर सिंह व गांव अघ्याना निवासी सेवानिवृत्त अध्यापक कृष्ण दत्त त्यागी ने खुशी व्यक्त की।
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आयुष सैनी। - फोटो : अमर उजाला

बीडीओ का बेटा बना आईएएस, हासिल की 194वीं रैंक

बीडीओ के पद पर कार्यरत राजवीर सैनी के बेटे आयुष सैनी ने यूपीएससी में 194वीं रैंक हासिल की है। आयुष ने अपनी सफलता का श्रेय कड़े परिश्रम को दिया है।
आयुष का परिवार सरसावा नगर की श्यामलाल कॉलोनी में रहता है। उनके पिता बीडीओ और मां अंजू एक स्कूल की प्रबंधक हैं। अपनी सफलता पर आयुष ने बताया कि पहले प्रयास विफल होने पर अगले प्रयास के लिए मनोबल बनाए रखने में उसके माता-पिता का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने उसे टूटने नहीं दिया, बल्कि और कड़ा परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया। 
 

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माता-पिता के साथ आयुष। - फोटो : अमर उजाला
आयुष ने बताया कि तीन साल पहले सरसावा की श्रेया सिंघल आईएएस बनी थी। उन्होंने आयुष को टिप्स दिए, जिन पर चलकर सफलता पाई है। आयुष ने आईआईटी कानपुर से 2021 मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया और जुट गए। वह अंग्रेजी माध्यम से हैं, जिसमें उन्हें चौथी बार में सफलता मिली है। ईपीएफ विभाग में एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद पर तैनाती होनी थी, लेकिन अब यूपीएससी में सफलता मिली है। आयुष का कहना है कि वह अधिकारी बनकर महिला सशक्तिकरण और गांवों के विकास पर अधिक ध्यान देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हों। इस पर भी उनका ध्यान रहेगा। आयुष का छोटा भाई एमबीबीएस का छात्र है।

 

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माता-पिता के साथ अर्पित। - फोटो : अमर उजाला

इंस्पेक्टर के बेटे अर्पित ने दूसरी बार में पाई सफलता, मिली 421वीं रैंक

देवबंद के गांव गंगदासपुर के अर्पित ने यूपीएससी में दूसरी बार में सफलता हासिल की है। अर्पित को 421वीं रैंक मिली है। अर्पित की सफलता से घर में खुशी का माहौल है।
अर्पित के पिता राजकुमार यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, जो बिजनौर में तैनात हैं। अर्पित की 12वीं तक की पढ़ाई बिजनौर से ही हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आजाद विश्वविद्यालय से एनआईटी किया। फिर वह यूपीएससी की तैयारी में जुटे थे। पहली बार में वर्ष 2024 में वह सफल नहीं हो सके थे। अब उन्हें आईपीएस मिलने की उम्मीद है। 
पिता राजकुमार ने बताया कि अर्पित बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रहा है। वह उनका अकेला बेटा है, जिसने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अर्पित की मां नूरी गृहिणी हैं। अर्पित ने अपनी सफलता का श्रेय कड़े परिश्रम को दिया है। उनका कहना है कि यदि इंसान ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है।

 
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