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सहारनपुर देहात को बुनियादी सुविधाओं की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 11 Jan 2017 01:22 AM IST
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गागलहेड़ी की बंद पड़ी शुगर मिल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरौड़ा से दो बार विधान सभा का चुनाव जीत कर प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती के कारण राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाली इस सुरक्षित विधान सभा सीट को पिछले चुनाव से पहले परिसीमन के बाद सहारनपुर देहात विधान सभा सीट के नाम से सामान्य कर दिया गया था।
बसपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सात विधान सभा चुनावों में केवल एक उपचुनाव में सपा प्रत्याशी जीती है अन्यथा यहां हाथी की धमक बरकरार रही है। बसपा मुखिया के यहां से चुनाव लड़ने के कारण इसके साथ ही जिले को तो कमिश्नरी का दर्जा और मेडिकल कॉलेज समेत कई सौगात मिली, लेकिन यहां के बाशिंदों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है।
वर्तमान में इस सीट से जगपाल सिंह लगातार दूसरी बार विधायक है। इससे पूर्व यहां से मायावती द्वारा सीट छोड़ने के कारण हुए उप चुनाव में सपा की विमला राकेश विधायक रह चुकी हैं। बसपा ने इस बार फिर जगपाल सिंह को भी प्रत्याशी बनाया है।
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वर्ष 2012 से पहले के विधान सभा चुनावों में यह सीट हरौड़ा सुरक्षित सीट के नाम से जानी जाती थी। पिछले चुनाव में इसे सामान्य करते हुए सहारनपुर देहात का नाम दे दिया गया था। यह सीट एक तरफ उत्तराखंड से लगती हैं। इस क्षेत्र में स्थापित नौगजा पीर की मान्यता कई राज्यों में हैं। तो ठीक इसके बगल में स्थापित शिवालय और गुरुद्वारा साहिब सर्वधर्म समभाव की सीख देता है।
बसपा सरकार के वक्त में यहां आधा दर्जन बिजलीघर, कुम्हारहेड़ा में राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज, गागलहेड़ी में राजकीय कन्या इंटर कालेज, हरौड़ा में तीस बिस्तर वाली सीएचसी, कोलकी में 132 केवी पारेषण केंद्र, कोटा में राजकीय इंटर कॉलेज, कैलाशपुर में डा भीमराव अंबेडकर पार्क की स्थापना हुई है लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभी भी टोटा है।
ज्यादातर लिंक मार्ग खस्ताहाल पड़े हैं। गांवों में पानी निकासी का साधन पर्याप्त नहीं है। हिंडन नदी से बरसात में बाढ़ आने पर गांवों की आबादी में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। सबसे बड़ी समस्या किसानों की है। एक दशक से बंद पड़ी दया शुगर मिल की तरफ उनका करीब 12 करोड़ रुपये बकाया है, जिसके भुगतान की कोई आस नहीं दिख रही है। किसान धरना करके भी थक चुके हैं।
जातिगत आंकड़ों में सहारनपुर देहात विधान सभा
सहारनपुर देहात विधान सभा सीट पर करीब सवा तीन लाख मतदाताओं में से एक लाख 27 हजार मुस्लिम, एक लाख 17 हजार दलित, 14-14 हजार ठाकुर और कश्यप, छह हजार यादव, इतने ही गुर्जर और करीब चार हजार धीमान मतदाता हैं। ऐसे में इस सीट पर मुस्लिमों और दलितों का रुख ही निर्णायक होता है।
एक नजर में सहारनपुर देहात विधानसभा
कुल मतदाता ः 3,16456
पुरुष मतदाता ः 171464
महिला मतदाता ः 144982
थर्ड जेंडर ः 10
मतदान केंद्र ः 176
मतदेय स्थल ः 300
विधायक जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्तमान योजना में हिंडन पर हरौड़ा पाली में पुल, चमारीखेड़ा-बुड्ढाखेडा में पुल, कपासा-कपासी में पुल, रेडी-जजनैर पुल और मल्हीपुर में पुल का निर्माण, विभिन्न गांवों में संपर्क मार्गों के निर्माण, आरसीसी सड़कों का जाल तथा जल निकासी की सुदृढ़ व्यवस्था कराई है। दया शुगर मिल के मालिकों से वार्ता कर उसे चलवाने का प्रयास भी किया लेकिन एक राजनीतिक दल के लोगों द्वारा दिए गए धरने प्रदर्शन से वार्ता विफल हो गई।
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बसपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सात विधान सभा चुनावों में केवल एक उपचुनाव में सपा प्रत्याशी जीती है अन्यथा यहां हाथी की धमक बरकरार रही है। बसपा मुखिया के यहां से चुनाव लड़ने के कारण इसके साथ ही जिले को तो कमिश्नरी का दर्जा और मेडिकल कॉलेज समेत कई सौगात मिली, लेकिन यहां के बाशिंदों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है।
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वर्तमान में इस सीट से जगपाल सिंह लगातार दूसरी बार विधायक है। इससे पूर्व यहां से मायावती द्वारा सीट छोड़ने के कारण हुए उप चुनाव में सपा की विमला राकेश विधायक रह चुकी हैं। बसपा ने इस बार फिर जगपाल सिंह को भी प्रत्याशी बनाया है।
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वर्ष 2012 से पहले के विधान सभा चुनावों में यह सीट हरौड़ा सुरक्षित सीट के नाम से जानी जाती थी। पिछले चुनाव में इसे सामान्य करते हुए सहारनपुर देहात का नाम दे दिया गया था। यह सीट एक तरफ उत्तराखंड से लगती हैं। इस क्षेत्र में स्थापित नौगजा पीर की मान्यता कई राज्यों में हैं। तो ठीक इसके बगल में स्थापित शिवालय और गुरुद्वारा साहिब सर्वधर्म समभाव की सीख देता है।
बसपा सरकार के वक्त में यहां आधा दर्जन बिजलीघर, कुम्हारहेड़ा में राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज, गागलहेड़ी में राजकीय कन्या इंटर कालेज, हरौड़ा में तीस बिस्तर वाली सीएचसी, कोलकी में 132 केवी पारेषण केंद्र, कोटा में राजकीय इंटर कॉलेज, कैलाशपुर में डा भीमराव अंबेडकर पार्क की स्थापना हुई है लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभी भी टोटा है।
ज्यादातर लिंक मार्ग खस्ताहाल पड़े हैं। गांवों में पानी निकासी का साधन पर्याप्त नहीं है। हिंडन नदी से बरसात में बाढ़ आने पर गांवों की आबादी में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। सबसे बड़ी समस्या किसानों की है। एक दशक से बंद पड़ी दया शुगर मिल की तरफ उनका करीब 12 करोड़ रुपये बकाया है, जिसके भुगतान की कोई आस नहीं दिख रही है। किसान धरना करके भी थक चुके हैं।
जातिगत आंकड़ों में सहारनपुर देहात विधान सभा
सहारनपुर देहात विधान सभा सीट पर करीब सवा तीन लाख मतदाताओं में से एक लाख 27 हजार मुस्लिम, एक लाख 17 हजार दलित, 14-14 हजार ठाकुर और कश्यप, छह हजार यादव, इतने ही गुर्जर और करीब चार हजार धीमान मतदाता हैं। ऐसे में इस सीट पर मुस्लिमों और दलितों का रुख ही निर्णायक होता है।
एक नजर में सहारनपुर देहात विधानसभा
कुल मतदाता ः 3,16456
पुरुष मतदाता ः 171464
महिला मतदाता ः 144982
थर्ड जेंडर ः 10
मतदान केंद्र ः 176
मतदेय स्थल ः 300
विधायक जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्तमान योजना में हिंडन पर हरौड़ा पाली में पुल, चमारीखेड़ा-बुड्ढाखेडा में पुल, कपासा-कपासी में पुल, रेडी-जजनैर पुल और मल्हीपुर में पुल का निर्माण, विभिन्न गांवों में संपर्क मार्गों के निर्माण, आरसीसी सड़कों का जाल तथा जल निकासी की सुदृढ़ व्यवस्था कराई है। दया शुगर मिल के मालिकों से वार्ता कर उसे चलवाने का प्रयास भी किया लेकिन एक राजनीतिक दल के लोगों द्वारा दिए गए धरने प्रदर्शन से वार्ता विफल हो गई।