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Saharanpur News: सफाई के 78 करोड़ रुपये के टेंडर में ताक पर नियम, नहीं ली गई शासन की स्वीकृति

Wed, 07 Oct 2026 01:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Wed, 07 Oct 2026 01:08 AM IST
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Rules flouted in the 78 crore tender for Diwali and Chhath cleaning work; government approval was not obtained meanwhile, special trains will make travel easier.
सहारनपुर। नगर निगम ने सफाई से संबंधित 78 करोड़ रुपये का टेंडर बिना शासन की स्वीकृति के कर दिया। शासनादेश की बात करें तो नगर निगम बोर्ड को भी 30 लाख रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति का ही अधिकार है।
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महानगर के 70 वार्डों में से 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था नगर निगम निजी हाथों में देने जा रहा है। इसका प्रस्ताव पूर्व में कार्यकारिणी समिति के साथ ही नगर निगम बोर्ड में भी पास हो चुका है। हालांकि, सफाई का कार्य ठेके पर देने और इसके भारी-भरकम बजट को लेकर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। 58 वार्डों की सफाई का मौजूदा साला खर्च करीब 50 करोड़ रुपये था, जो अब 78 करोड़ होगा। यानी खर्च बढ़ेगा। नगर निगम टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। इसके बाद नया सवाल शासन से स्वीकृति का खड़ा हो गया है।
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दरअसल, नगर निगम ने 78 करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि का टेंडर केवल बोर्ड में पास कराकर कर दिया। इसके लिए शासन की स्वीकृति नहीं ली गई। शासनादेश के अनुसार नगर निगम की पूरी व्यवस्था, जिसमें नगर आयुक्त, महापौर, कार्यकारिणी और सदन तक 30 लाख रुपये से अधिक के कार्य बिना शासन की स्वीकृति के नहीं करा सकते। हालांकि, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी ऐसा कोई नियम नहीं होने की बात कह रहे हैं। टेंडर समिति के सदस्यों ने भी इसे लेकर चुप्पी साधी हुई है, जो कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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निगम निधि और राज्य वित्त से होने वाले कार्यों में वित्तीय अधिकार

-दस लाख तक के कार्य नगर आयुक्त के हस्ताक्षर से।

-15 लाख रुपये तक के कार्य महापौर और नगर आयुक्त दोनों।

-20 लाख रुपये तक के कार्य महापौर, कार्यकारिणी और नगर आयुक्त।

-30 लाख रुपये तक के कार्य के लिए सदन, कार्यकारिणी, महापौर और नगर आयुक्त चारों।
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भाजपा पार्षद ने की शिकायत वार्ड 55 से भाजपा पार्षद संजय गर्ग ने भी सफाई के ठेके पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करते हुए बताया है कि टेंडर प्रक्रिया में शासन की स्वीकृति नहीं ली गई है। शिकायत के जवाब में नगर निगम द्वारा दिए गए जवाब को भी उन्होंने भ्रामक और आधा-अधूरा बताया। चर्चा यह भी हैं कि वित्तीय निविदा को खोलने के लिए टेंडर समिति के सभी सदस्यों की सहमति नहीं ली गई है।

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टेंडर नगर निगम की निधि से जुड़ा है, जिसमें शासन से स्वीकृति की जरूरत नहीं होती। नगर निगम ने कार्यकारिणी के साथ ही बोर्ड में भी इसे पास किया है, जो पर्याप्त है।
- शिपू गिरि, नगर आयुक्त
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