UP: कोरोना काल से बंद पड़ी रोडवेज बस, डग्गामार वाहनों के भरोसे 50 गांव, जानिए हजारों लोगों का दर्द
Saharanpur News : कोरोना काल से पहले यहां रोडवेज बस सेवा बंद हो गई थी। इसके अलावा पिछले आठ साल से प्राइवेट बसों का संचालन भी इस रूट पर बंद पड़ा है। जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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सहारनपुर में नौगजा पीर-कुरड़ी खेड़ा वाया मुजफ्फराबाद सड़क मार्ग से जुड़े 50 से ज्यादा गांवों में बस सेवा उपलब्ध नहीं है। इस मार्ग पर सुबह शाम जगाधरी तक चलने वाली रोडवेज बस सेवा जहां कोरोना काल से पहले बंद हो गई थी, वहीं पिछले आठ साल से प्राइवेट बसों का संचालन भी रूट पर बंद पड़ा है। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए मजबूरी में डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
नौगजा पीर से शुरु होने वाला यह सड़क मार्ग पर छजपुरा, तिवाया निवादा, घड़कोली, संभलहेड़ी, बढेड़ी घोघु, रामखेड़ी, सरदाहेड़ी, जीवाला, गदरहेड़ी, माजरी, मुजफ्फराबाद, मुजाहिदपुर, शेखुपुर, जानीपुर, अब्दुल्लापुर, कुरड़ीखेड़ा के बीच से होकर गुजरता है। मुजफ्फराबाद ब्लाॅक मुख्यालय को जोड़ने के साथ ही बेहट और सदर तहसील के गांवों को जिला मुख्यालय से भी यह मार्ग सीधे जोड़ता है।
क्षेत्र की राजपूत बेल्ट के गांवों की ज्यादातर रिश्तेदारियां हरियाणा में होने के कारण चार साल पहले तक इस मार्ग पर सुबह और शाम के वक्त रोडवेज दो दो बस सेवा माजरी से जगाधरी तक चलती थी जिन्हें कोरोना काल में बंद कर दिया गया था। उसके बाद इस मार्ग पर बसों का संचालन नहीं हो सका। यात्रियों को सहारनपुर जाने के लिए टेंपों का सहारा लेना पड़ता है। रामखेड़ी के विरेंद्र सिंह, जानीपुर के अश्वनी कांबोज, मुजफ्फराबाद के योगेश धीमान, गदरहेड़ी के अर्जुन राणा आदि ने इस मार्ग पर बसों का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
गांव सरदाहेड़ी निवासी सत्यपाल सिंह का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग इस मार्ग से सफर करते हैं। ऐसे में इस पर बसों का संचालन बेहद जरुरी है। उन्हे सहारनपुर जाने के लिए वाया छुटमलपुर होकर जाना पड़ता है। इसमें समय और धन दोनो की बर्बादी होती है।
इस मार्ग पर अपनी बस संचालित कर चुके ट्रांसपोर्टर अकबर अली का कहना है कि डग्गामार वाहनों के संचालकों की दबंगई के चलते उन्हे मजबूरी में मार्ग पर बसों का संचालन बंद करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर 52 बसों के परमिट परिवहन विभाग द्वारा जारी किए गए हैं।
डीसीएसएम इंटर कॉलेज रामखेड़ी के प्रबंधक ऋषिपाल सैनी का कहना है कि बड़ी संख्या में बच्चों को डग्गामार वाहनों से आना पड़ता है। यदि इस मार्ग पर बसों का संचालन हो जाए तो स्कूली छात्र-छात्राओं को काफी सहूलियत हो जाएगी।
बढेड़ी घोघु निवासी स्वास्थ्यकर्मी नीरज राणा का कहना है कि वे सहारनपुर मुख्यालय पर तैनात हैं। गांव से जाने के लिए टेंपो के अलावा कोई साधन नहीं मिलता है। बरसात और सर्दी में बाइक पर जाने में काफी परेशानी होती है। यदि बसों का संचालन शुरु हो जाएगा तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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ग्रामीण रूटों पर बसों के संचालन के लिए सर्वे किया जा रहा है। यदि पूर्व में इस मार्ग पर जगाधरी तक बसों का संचालन होता था तो इन बस सेवाओं को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा। उनका प्रयास रहेगा कि रोडवेज बस सेवा को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक जोड़ा जाए। - गोपाल स्वरुप शर्मा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम छुटमलपुर
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