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Saharanpur News: साइबर ठगों का सहारा बने किराये के खाते
Tue, 22 Jul 2025 01:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 22 Jul 2025 01:14 AM IST
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सहारनपुर। साइबर आरोपी लोगों को ठगने के लिए जहां नए-नए पैंतरे आजमा रहे हैं, वहीं खुद को बचाने के लिए भी खेल कर रहे हैं। साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के जरिए हड़पने वाली रकम को वह ऐसे लोगों के खातों में मंगवाते हैं, जिन्हें 10 से 20 हजार रुपये लालच देते हैं। किराये के खाते ही साइबर आरोपियों का सहारा बने हुए हैं।
साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस लाइन स्थित साइबर क्राइम थाने में हर महीने आठ से दस मुकदमे दर्ज होते हैं। हाल ही में साइबर क्राइम पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के गिरोह भंडाफोड़ किया था। विदेशों में बैठे साइबर आरोपी कमीशन एजेंट बनाते हैं। वहीं कमीशन एजेंट अपने आसपास के गरीब, बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों से सरकारी योजना का लाभ दिलाने, नौकरी का लालच देकर उनके कागजात लेकर उनके नाम से बैंक में खाते खुलवाते हैं। इसके बाद उस खाते में साइबर ठगी की रकम डालते हैं। खाताधारक को भी कमीशन दे दिया जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला राजस्थान के अलवर का है, जिसमें ठगी की रकम गई थी। पता चला कि यह खाता किसी युवती के नाम पर है, जिसे ठगी की रकम से हर बार कमीशन दिया जाता है।
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-- ऐसे करें बचाव
- निजी जानकारी नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर आदि अनजान लोगों से साझा न करें।
- लाभकारी योजनाओं के झांसे में न आए।
- सोशल मीडिया के यूजर आईडी और पासवर्ड साझा न करें और मजबूत पासवर्ड रखें।
- बैंक अकाउंट या कार्ड की जानकारी मोबाइल में सेव न करें।
- इंटरनेट बैंकिंग या सोशल साइट्स उपयोग के बाद लॉग आउट करना न भूलें।
- बैंक अधिकारी बनकर कोई भी ओटीपी, कार्ड नंबर मांगे तो जानकारी न दें।
- अनचाहे मेसेज या लिंक न खोलें और ओटीपी कभी साझा न करें।
- कैशबैक या कूपन ऑफर जैसे लालच में न आएं।
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-- वर्जन
साइबर ठग डर और लालच का इस्तेमाल करते हैं। साइबर ठग लोगों को विभिन्न योजनाओं या निवेश के जरिए लाभ दिलाने का लालच देते हैं। साइबर थाने में दर्ज होने वाले हर मुकदमे के बैंक खातों की जांच पड़ताल की जाती है।
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- मनोज कुमार यादव, एएसपी
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साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस लाइन स्थित साइबर क्राइम थाने में हर महीने आठ से दस मुकदमे दर्ज होते हैं। हाल ही में साइबर क्राइम पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के गिरोह भंडाफोड़ किया था। विदेशों में बैठे साइबर आरोपी कमीशन एजेंट बनाते हैं। वहीं कमीशन एजेंट अपने आसपास के गरीब, बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों से सरकारी योजना का लाभ दिलाने, नौकरी का लालच देकर उनके कागजात लेकर उनके नाम से बैंक में खाते खुलवाते हैं। इसके बाद उस खाते में साइबर ठगी की रकम डालते हैं। खाताधारक को भी कमीशन दे दिया जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक मामला राजस्थान के अलवर का है, जिसमें ठगी की रकम गई थी। पता चला कि यह खाता किसी युवती के नाम पर है, जिसे ठगी की रकम से हर बार कमीशन दिया जाता है।
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- निजी जानकारी नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर आदि अनजान लोगों से साझा न करें।
- लाभकारी योजनाओं के झांसे में न आए।
- सोशल मीडिया के यूजर आईडी और पासवर्ड साझा न करें और मजबूत पासवर्ड रखें।
- बैंक अकाउंट या कार्ड की जानकारी मोबाइल में सेव न करें।
- इंटरनेट बैंकिंग या सोशल साइट्स उपयोग के बाद लॉग आउट करना न भूलें।
- बैंक अधिकारी बनकर कोई भी ओटीपी, कार्ड नंबर मांगे तो जानकारी न दें।
- अनचाहे मेसेज या लिंक न खोलें और ओटीपी कभी साझा न करें।
- कैशबैक या कूपन ऑफर जैसे लालच में न आएं।
साइबर ठग डर और लालच का इस्तेमाल करते हैं। साइबर ठग लोगों को विभिन्न योजनाओं या निवेश के जरिए लाभ दिलाने का लालच देते हैं। साइबर थाने में दर्ज होने वाले हर मुकदमे के बैंक खातों की जांच पड़ताल की जाती है।
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- मनोज कुमार यादव, एएसपी