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किसान की उम्मीदों पर ओलों की बारिश

Sun, 23 Apr 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 23 Apr 2017 12:28 AM IST
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Rain of hail over farmers' expectations
सहारनपुर में हुई बारिश में डूबी गेंहू की फसल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में शनिवार तड़के बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने बागवानी, गेहूं एवं सब्जी की फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। करीब डेढ़ घंटे तक बारिश हुई।
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खेतों में कटी पड़ी गेहूं जलमग्न देख किसानों के माथे में चिंता की लकीरें साफ दिखाई दी, जो गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है, उसमें दाना काला पड़ने के आसार बन गए हैं। 
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तैयार खड़ी फसल की कटाई भी कई दिन लेट हो गई है। उधर तूफान से भी किसानों को नुकसान हुआ है। खेतों में खड़े यूकेलिप्टिस एवं पापुलर आदि के पेड़ गिर गए।

बता दें कि इन दिनों गेहूं की फसल की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य जोरों पर चल रहा था, लेकिन शनिवार की तड़के अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों को हैरान कर दिया। पांच बजे बारिश के साथ आए तूफान एवं हुई ओलावृष्टि ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी। 
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तूफान और ओलावृष्टि से लौकी, खीरा आदि बेल वाली सब्जी की फसल बर्बाद हो गई। ओलावृष्टि से बेहट फल पट्टी क्षेत्र में आम के बागानों को भी जबरदस्त नुकसान हुआ है।

कटाई का कार्य तो लेट हो ही गया साथ ही थ्रेसिंग का कार्य भी अब कम से कम एक सप्ताह तक नहीं हो पाएगा। दूसरे खेतों में कटी पड़ी फसल भी जलमग्न हो गई है। सबसे अधिक नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है।

उधर तूफान ने किसानों के खेतों में खड़े यूकेलिप्टिस एवं पापुलर आदि के पेड़ उखड़कर गिर गए। सड़क किनारे स्थित गांव खुर्रमपुर निवासी किसान शिवकुमार चौहान अपने तालाब बने खेत में कटी पड़ी गेहूं  की फसल को पानी से बाहर निकाल रहा था।

शिवकुमार ने बताया कि बड़ी मुश्किल से बीज, खाद आदि उधार लेकर फसल तैयार की थी, लेकिन कुदरत ने कहर बरपा दिया।  चांडी के रागिब अली ने बताया कि अब हफ्ते भर खेत में कटी पड़ी गेहूं की फसल को सुखाने में लग जाएगा, इसके बाद थ्रेसिंग हो पाएगी।

आम व्यवसायी सुनील राजदेव उर्फ बिट्टी ने बताया कि इस बार पहले ही 40 प्रतिशत आम की फसल आई थी, अब ओलावृष्टि 20 से 25 प्रतिशत नुकसान हो गया है। पोमल सैनी मुर्तजापुर ने बताया कि इस बार उसने करीब दस बीघा खीरा लगाया था। 


उधर, तहसीलदार बेहट योेगेंद्र यादव का कहना है कि सभी लेखपालों को अपने-अपने हलके में जाकर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए गए है। इसके बाद शासन को प्रभावित किसानों को मुआवजा दिए जाने संबंध में लिखा जाएगा।
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