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Saharanpur News: पांच साल पहले प्रस्ताव, अब काम शुरू, स्वच्छ होगा दूषित पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। 571 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 135 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर काम शुरू हो गया है। एसटीपी बनने के बाद महानगर से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित कर ढमोला में छोड़ा जाएगा। इससे हिंडन और यमुना नदी की हालत में सुधार आएगा।
महानगर के 70 वार्डों में करीब 7.5 लाख आबादी रहती है। महानगर से प्रतिदिन करीब 100 एमएलडी दूषित पानी निकलता है, जो सीधे पांवधोई नदी और ढमोला नदी में गिरता है। इसकी वजह से दोनों नदियों का पानी काला और दूषित बना हुआ है। पांवधोई नदी ढमोला नदी में गिरती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदी है। ऐसे में महानगर से निकलने वाला दूषित पानी पांवधोई और ढमोला के बाद हिंडन को दूषित करता है। इसके बाद हिंडन के कारण यमुना नदी दूषित होती है।
महानगर में कई दशक से 28 एमएलडी का एसटीपी संचालित है। यानी प्रतिदिन 28 एमएलडी पानी के उपचारित होने के बाद जो पानी करीब 72 एमएलडी बचता है, वह बिना उपचार के नदियों में छोड़ा जाता है।
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135 एमएलडी का एसटीपी तैयार होने के बाद महानगर की सीवर लाइनों और नालों को उससे जोड़ा जाएगा। इसके बाद नदियों को नया जीवन मिलेगा, ऐसी उम्मीद है।
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सहारनपुर। 571 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 135 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर काम शुरू हो गया है। एसटीपी बनने के बाद महानगर से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित कर ढमोला में छोड़ा जाएगा। इससे हिंडन और यमुना नदी की हालत में सुधार आएगा।
महानगर के 70 वार्डों में करीब 7.5 लाख आबादी रहती है। महानगर से प्रतिदिन करीब 100 एमएलडी दूषित पानी निकलता है, जो सीधे पांवधोई नदी और ढमोला नदी में गिरता है। इसकी वजह से दोनों नदियों का पानी काला और दूषित बना हुआ है। पांवधोई नदी ढमोला नदी में गिरती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन की सहायक नदी है। ऐसे में महानगर से निकलने वाला दूषित पानी पांवधोई और ढमोला के बाद हिंडन को दूषित करता है। इसके बाद हिंडन के कारण यमुना नदी दूषित होती है।
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महानगर में कई दशक से 28 एमएलडी का एसटीपी संचालित है। यानी प्रतिदिन 28 एमएलडी पानी के उपचारित होने के बाद जो पानी करीब 72 एमएलडी बचता है, वह बिना उपचार के नदियों में छोड़ा जाता है।
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135 एमएलडी का एसटीपी तैयार होने के बाद महानगर की सीवर लाइनों और नालों को उससे जोड़ा जाएगा। इसके बाद नदियों को नया जीवन मिलेगा, ऐसी उम्मीद है।