रूस का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले पहले भारतीय प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक का निधन, सहारनपुर में शोक
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शिक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम रोशन करने वाले और रूस का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले पहले भारतीय प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक का निधन हो गया। उनके निधन की सूचना से सहारनपुर के लोगों में शोक छा गया है।
भारतीय इतिहासकार एवं शिक्षक देवेंद्र कौशिक (86) का जन्म एक मार्च 1934 को देवबंद तहसील के गांव डंघेड़ा में हुआ था। इन दिनों वह ग्रेटर नोएडा में अपनी रशियन पत्नी रायसा इब्रगिमोव्ना तुगूशेवा और बच्चों के साथ रह रहे थे। सहारनपुर के गोविंद विहार में उनके छोटे भाई अधिवक्ता नरेंद्र कौशिक रहते हैं। उन्होंने बताया कि आठ दिन पूर्व ब्रेन हेमरेज होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।
सरकारी स्कूल से हुई प्रारंभिक शिक्षा
पिता रति राम कौशिक और मां बालदेवी कौशिक के घर जन्मे देवेंद्र कौशिक ने प्रारंभिक पढ़ाई सरकारी स्कूल में टाटपट्टी पर बैठकर की। फिर कांशीराम हाईस्कूल एंड एसडी इंटर कॉलेज से उन्होंने हाईस्कूल और देहरादून से इंटर की पढ़ाई की। 1954 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री प्राप्त की। उसी विश्वविद्यालय से पश्चिमी इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। 1963 में आगरा विश्वविद्यालय (डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय) से दर्शनशास्त्र की डिग्री ली। 1965 में उन्होंने ताशकंद विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री प्राप्त की।
मेरठ से शुरू किया शैक्षिक सफर
प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक ने 1956 में मेरठ कॉलेज मेरठ में इतिहास के व्याख्याता के रूप में अपना करियर शुरू किया। छह साल बाद उन्होंने ताशकंद विश्वविद्यालय में शोध सहयोगी का पद संभाला। फिर 1965 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में इतिहास का पाठक नियुक्त किया गया। 1972 से 1974 तक रूसी विज्ञान अकादमी के प्राच्य अध्ययन संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। 1974 में राजस्थान विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर और इतिहास विभाग के प्रमुख बने। 1979 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सोवियत अध्ययन के प्रोफेसर का पद संभाला। 1999 से मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एशियाई अध्ययन के प्रोफेसर रहे। प्रो. कौशिक 10 साल तक मौलाना अबुल कलाम आजाद सेंटर फॉर एशियन स्टडीज के चेयरमैन रहे। जेएनयू के स्कूल ऑफ एशियन स्टडीज के चेयरमैन थे। मास्को व ताशकंद में भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे। उनकी अनेक किताबें दुनिया की अनेक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती हैं। उनकी मौत से शिक्षा क्षेत्र को अपूर्णीय क्षति हुई है।
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सहारनपुर में भी हुआ था भव्य कार्यक्रम
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय में संसद के एनेक्सी में 40 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में भव्य कार्यक्रम हुआ था। उसमें प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक की विशेष भूमिका रही थी। वहीं, कई साल पूर्व सहारनपुर में भी देहरादून चौक के पास भव्य कार्यक्रम किया गया था, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधियों के अलावा राज्यपाल बी. सत्यनारायण रेड्डी, फारुख अब्दुल्ला, केसी त्यागी सहित तमाम नेता पहुंचे थे।
कवि दुष्यंत से रिश्तेदारी
अधिवक्ता नरेंद्र कौशिक ने बताया कि कवि दुष्यंत त्यागी प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक के बहनोई थे। वहीं, फ्लाइंग लेफ्टिनेंट सुधीर त्यागी उनके भांजे थे, जो 1971 के युद्ध में शहीद हुए थे। उनके नाम पर गोविंद विहार में चौराहे का नामकरण हुआ है।
दो शादियां कीं
प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक की दो शादियां हुईं। पहली शादी 1954 में साधना से हुई, उनसे शैफाली और आदित्य कौशिक दो संतानें पैदा हुईं। इसके बाद 1968 में प्रोफेसर देवेंद्र कौशिक ने रायसा इब्रगिमोव्ना तुगूशेवा से शादी की। उनसे एक बच्चा व्लादिमीर कौशिक है।
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