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मांग कम होने से गिरे गेहूं के दाम
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गेहूं का फाइल फोटो
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सहारनपुर। मांग की कमी के चलते इस बार मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से गेहूं के भाव 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक कम हो गए हैं। थोक व्यापारी इसका बड़ा कारण कोरोना काल में राशन कार्डधारकों को महीने में दो बार खाद्यान्न का वितरण होना मान रहे हैं। उनका कहना है बाजार में गेहूं की मांग घट गई है और भाव में कमी आई है।
आमतौर पर हर वर्ष गेहूं के खरीद सीजन के बाद बाजार में इसके रेट में इजाफा होता था, लेकिन इस बार ट्रेड इसके विपरीत दिख रहा है। मंडी में गेहूं का भाव प्रदेश सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम पहुंच गया। इसका बड़ा कारण बाजार में गेहूं की मांग की कमी को माना जा रहा है। मंडी में फिलहाल गेहूं का रेट 1650 से 1725 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
थोक व्यापारी राजीव कक्कड़ ने बताया अधिकांश उपभोक्ताओं के पास राशन कार्ड हैं। कोरोना काल में कई माह से उन्हें महीने में दो बार काफी सस्ता खाद्यान्न मिल जाता है, इसलिए उन्हें बाजार से खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। जबकि पहले उनमें से अधिकांश चक्की से आटा भी खरीदते थे। उनके यहां गेहूं का भाव करीब 1725 रुपये चल रहा है।
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थोक व्यापारी राजू का कहना है कि बाजार में मांग कम होने से गेहूूं के भाव गिरे हैं। अब किसान नाममात्र का ही गेहूं ला रहे हैं। उनके यहां से अधिकांशतया चक्की वाले गेहूं खरीदकर ले जाते थे। अब सरकार की ओर से राशन डीलरों के मार्फत से ही महीने में दो बार गेहूं और चावल सस्ती दर पर बंट रहा है। इसलिए रेट में कमी आई है। उनके यहां अब गेहूं का औसत भाव 1650 रुपये के आसपास चल रहा है।
जनपद में वितरित होता है 26741.625 मीट्रिक टन खाद्यान्न
सहारनपुर। जनपद में 1244 राशन डीलरों के माध्यम से 5.86 राशन कार्ड धारकों को प्रति माह दो बार खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। जिला पूर्ति अधिकारी सतीश कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में 25 लाख यूनिट हैं। इनको एक बार गेहूं दो रुपये प्रति किलो और तीन रुपये प्रति किलो चावल की दर से और जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निशुल्क वितरण किया जा रहा है। अंत्योदय कार्ड पर 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल और पात्र गृहस्थी कार्ड पर प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं एवं दो किलो चावल दिया जाता है। दूसरी बार में यूनिट की हिसाब से खाद्यान्न का वितरण होता है। जनपद में महीने के प्रथम चरण में 13829.250 मीट्रिक टन और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 12911.375 मीट्रिक टन खाद्यान्न (गेहूं एवं चावल) एवं 585.302 मीट्रिक टन चने का वितरण प्रतिमाह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये होता है।
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आमतौर पर हर वर्ष गेहूं के खरीद सीजन के बाद बाजार में इसके रेट में इजाफा होता था, लेकिन इस बार ट्रेड इसके विपरीत दिख रहा है। मंडी में गेहूं का भाव प्रदेश सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम पहुंच गया। इसका बड़ा कारण बाजार में गेहूं की मांग की कमी को माना जा रहा है। मंडी में फिलहाल गेहूं का रेट 1650 से 1725 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है।
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थोक व्यापारी राजीव कक्कड़ ने बताया अधिकांश उपभोक्ताओं के पास राशन कार्ड हैं। कोरोना काल में कई माह से उन्हें महीने में दो बार काफी सस्ता खाद्यान्न मिल जाता है, इसलिए उन्हें बाजार से खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। जबकि पहले उनमें से अधिकांश चक्की से आटा भी खरीदते थे। उनके यहां गेहूं का भाव करीब 1725 रुपये चल रहा है।
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थोक व्यापारी राजू का कहना है कि बाजार में मांग कम होने से गेहूूं के भाव गिरे हैं। अब किसान नाममात्र का ही गेहूं ला रहे हैं। उनके यहां से अधिकांशतया चक्की वाले गेहूं खरीदकर ले जाते थे। अब सरकार की ओर से राशन डीलरों के मार्फत से ही महीने में दो बार गेहूं और चावल सस्ती दर पर बंट रहा है। इसलिए रेट में कमी आई है। उनके यहां अब गेहूं का औसत भाव 1650 रुपये के आसपास चल रहा है।
जनपद में वितरित होता है 26741.625 मीट्रिक टन खाद्यान्न
सहारनपुर। जनपद में 1244 राशन डीलरों के माध्यम से 5.86 राशन कार्ड धारकों को प्रति माह दो बार खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। जिला पूर्ति अधिकारी सतीश कुमार मिश्र ने बताया कि जिले में 25 लाख यूनिट हैं। इनको एक बार गेहूं दो रुपये प्रति किलो और तीन रुपये प्रति किलो चावल की दर से और जबकि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत निशुल्क वितरण किया जा रहा है। अंत्योदय कार्ड पर 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल और पात्र गृहस्थी कार्ड पर प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं एवं दो किलो चावल दिया जाता है। दूसरी बार में यूनिट की हिसाब से खाद्यान्न का वितरण होता है। जनपद में महीने के प्रथम चरण में 13829.250 मीट्रिक टन और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 12911.375 मीट्रिक टन खाद्यान्न (गेहूं एवं चावल) एवं 585.302 मीट्रिक टन चने का वितरण प्रतिमाह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये होता है।