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नई फसल आने पर घटने के बजाय बढ़ गए दाम

Sat, 29 May 2021 12:58 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 29 May 2021 12:58 AM IST
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Prices increased instead of decreasing on arrival of new crop
सहारनपुर। जब नई फसल बाजार में आती है तो उत्पादों के दाम में गिरावट आ जाती है। चाहे वह चावल हो या फिर सरसों। इस बार उल्टा हुआ है। सरसों का दाम नई फसल आने के बाद और तेजी से बढ़ गया। इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता पर पड़ा है, जिसे महंगे दाम पर सरसों का तेल खरीदना पड़ रहा है।
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दरअसल, एक महीना पहले तक सरसों का थोक भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक था, जबकि उससे एक महीना पहले करीब 5500 रुपये ही था। इसके बाद नई फसल पककर तैयार हुई और कटाई होने के बाद बाजार में पहुंच गई। उम्मीद थी कि अब सरसों का दाम गिरेगा, लेकिन यह और बढ़ गया। अब सरसों का दाम 7500 रुपये प्रति क्विंटल से भी ज्यादा हो गया है। नवादा रोड पर स्पेलर संचालक करण सिंह का कहना है कि समझ में नहीं आया कि नई फसल आने पर भी दाम कैसे ज्यादा हो गए। उन्हें तो इसका काफी नुकसान है, क्योंकि दाम महंगा होने पर बिक्री भी प्रभावित होती है।
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सरसों तेल पर चढ़ गए 40 रुपये
अप्रैल माह में काली सरसों का तेल 140 रुपये प्रति किलो तक बिका था, जो अब 180 रुपये प्रति किलो हो गया है। पीली सरसों का तेल 190 से 200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इससे उपभोक्ता परेशान हैं और तेल खरीदना महंगा पड़ रहा है।
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उपभोक्ताओं का दर्द
सब्जी बनाने के लिए सरसों का तेल अधिकांश घरों में इस्तेमाल होता है, मगर इस पर महंगाई की मार पड़ गई और तड़का महंगा हो गया। सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए, ताकि आम उपभोक्ता को राहत मिल सके। - मीनू मेहंद्रू, फ्रेंड्स कालोनी
नई फसल का चावल, गेहूं आदि जब बाजार में आता था तो दाम कम हो जाता था, अबकी बार उल्टा हो रहा है। सरसों का तेल सस्ता होने के बजाय महंगा हो गया है। इसके पीछे जमाखोरी का खेल भी हो सकता है। - पूजा गर्ग, पुरानी शुगर मिल

सरकार को गरीबों के हित का ध्यान करते हुए महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। समाज में ऐसे बहुत लोग हैं, जिनकी आमदनी कम होती है, उनके लिए खाद्य पदार्थों के दाम में महंगाई होना बहुत कष्टकारी है। - पल्लवी शर्मा, सिद्धार्थ एन्क्लेव
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