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Saharanpur News: प्रताप सिंह ने लिया था हैदराबाद सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन में भाग

Fri, 15 Aug 2025 12:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:56 AM IST
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Pratap Singh took part in the Hyderabad Satyagraha and the Non-Cooperation Movement
स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह।
मां तुझे प्रणाम :
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- शाहजहांपुर में रेलवे लाइन उखाड़ी, तार काटे
- जेल गए, जुर्माना भी हुआ, सामान कुर्क होने पर भी नहीं हारी हिम्मत

संवाद न्यूज एजेंसी
चिलकाना। देश की आजादी में ब्लॉक सरसावा के गांव टोडरपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह का योगदान अविस्मरणीय रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में चौधरी प्रताप सिंह ने हैदराबाद सत्याग्रह से लेकर गांधी जी के असहयोग आंदोलन तक में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें आजादी की लड़ाई के लिए जेल जाना पड़ा, जुर्माना भी दिया और फरारी के दौरान घर का सामान तक कुर्क हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह का जन्म गांव टोडरपुर में 14 नंवबर 1919 में हुआ था। उनके बचपन का नाम कश्मीरा सिंह था। 17 साल की उम्र में इनके गुरु और स्वतंत्रता सेनानी महंत जगन्नाथ दास ने इनका नाम बदलकर प्रताप सिंह रखा था। चौधरी प्रताप सिंह ने सबसे पहले हैदराबाद सत्याग्रह में भाग लिया। 1939 में हैदराबाद में धार्मिक कट्टरता की बात सुनकर उन्होंने अपने साथियों के साथ वहां जाने का निर्णय लिया और आंदोलन में शामिल हुए। इसके बाद 1941 में गांधी जी द्वारा चलाए गए असहयोगात्मक सत्याग्रह में शामिल हुए। इस दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा तथा नौ महीने की सख्त कैद और 50 रुपये जुर्माना भी भरना पड़ा था। जेल से आने के बाद प्रताप सिंह भूमिगत हो गए। 1942 में अंग्रेजी सरकार ने चौधरी प्रताप सिंह को फरार घोषित कर दिया तथा उनका वारंट भी जारी हो गया। घर का सामान तक कुर्क कर लिया गया।
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अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को चलाते हुए चौधरी प्रताप सिंह ने शाहजहांपुर में रेलवे लाइन की तार काट दी तथा रेल लाइन उखाड़ दी थी। अंग्रेज पुलिस उन्हें लगातार खोजती रही, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल पाया। देश आजाद होने के बाद चौधरी प्रताप सिंह सामाजिक कार्यों में जुटे रहे। उनका निधन छह जनवरी 2019 को हो गया था।
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आजादी के बाद चौधरी प्रताप सिंह राजनीति में कम सामाजिक कार्यों में ज्यादा समय बिताते रहे। चौधरी प्रताप सिंह कांग्रेस मंडल के प्रधान, न्याय पंचायत के पंच, गन्ना समिति के डायरेक्टर, जिला स्वतंत्रता सेनानी परिषद के जिला उपाध्यक्ष सहित कई पदों पर रहे। 1972 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र तथा 29 अप्रैल 1987 को राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया था। खादर क्षेत्र में शिक्षा के अभाव को देखते हुए उन्होंने गांव गाजदीनपुर में एक विद्यालय की स्थापना भी की थी। 1968 में चौधरी प्रताप सिंह ने अपना निवास गांव टोडरपुर से बदलकर नारायणपुर कर लिया था।

स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह।

स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह।

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