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प्रभाकर का साहित्य सतत प्रेरणा स्त्रोत: भारत भूषण
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-पुण्यतिथि पर कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर को याद किया
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। महान चिंतक, साहित्यकार पद्मश्री डॉ. कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर को 27 वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
महानगर में रेलवे रोड स्थित उनकी साधना स्थली पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु पद्मश्री डॉ. भारत भूषण ने कहा कि उनका साहित्य सतत प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में जिन प्रखर मूल्यों की स्थापना की उनके इस अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। कवि मनु स्वामी ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता को भौतिक साधनों की उपलब्धि का माध्यम न बनाकर उसे उच्च मानवीय मूल्यों की खोज और स्थापना में ही लगाया। अखिलेश प्रभाकर ने कहा कि प्रभाकर जी ने साहित्य की नई पीढ़ी को निरन्तर प्रेरित और पोषित करने का जो महत्वपूर्ण कार्य पूरे जीवन किया उसके लिए वे सदा स्मरणीय है। इस अवसर पर अरुण अग्रवाल, आशीष गुप्ता, चिराग सिंह, डॉ. राहुल सिंह, सुधाकर अग्रवाल, मनीष कच्छल, शीतल टंडन, यश प्रभाकर, विकास प्रभाकर, विशेष प्रभाकर, देवांश प्रभाकर आदि मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन हर्ष प्रभाकर ने किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। महान चिंतक, साहित्यकार पद्मश्री डॉ. कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर को 27 वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
महानगर में रेलवे रोड स्थित उनकी साधना स्थली पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु पद्मश्री डॉ. भारत भूषण ने कहा कि उनका साहित्य सतत प्रेरणा स्त्रोत है। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में जिन प्रखर मूल्यों की स्थापना की उनके इस अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। कवि मनु स्वामी ने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता को भौतिक साधनों की उपलब्धि का माध्यम न बनाकर उसे उच्च मानवीय मूल्यों की खोज और स्थापना में ही लगाया। अखिलेश प्रभाकर ने कहा कि प्रभाकर जी ने साहित्य की नई पीढ़ी को निरन्तर प्रेरित और पोषित करने का जो महत्वपूर्ण कार्य पूरे जीवन किया उसके लिए वे सदा स्मरणीय है। इस अवसर पर अरुण अग्रवाल, आशीष गुप्ता, चिराग सिंह, डॉ. राहुल सिंह, सुधाकर अग्रवाल, मनीष कच्छल, शीतल टंडन, यश प्रभाकर, विकास प्रभाकर, विशेष प्रभाकर, देवांश प्रभाकर आदि मौजूद रहे। श्रद्धांजलि सभा का संचालन हर्ष प्रभाकर ने किया।