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आम में दिखाई देने लगा पाउडरी मिल्डयू रोग का प्रकोप
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आम में दिखाई देने लगा पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप
सहारनपुर। मौसम के उतार चढ़ाव के चलतेे आम के कई बागों में पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा) रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। दिन में गर्मी और रात में तापमान में गिरावट के चलते यह रोग तेजी से फैलता है। फफूंद जनित यह रोग आम के बौर को प्रभावित करता है। जिसका सीधा असर आम के उत्पादन पर पड़ता है।
जनपद में आम के कई बागों में फफूंदी जनित पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह रोग आम के बौर को प्रभावित करता है। प्रभावित बौर सफेद हो जाता है। इसके चलते प्रभावित आम के बौर पर फल नहीं बन पाते हैं। जिससे आम की प्रभावित फसल के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। यह रोग दिन के समय गर्मी और रात को नमी एवं ठंड में तेजी से फैलता है। यदि समय पर उपचार नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि आम के पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप कई बागों में दिखाई दे रहा है। यह रोग आम के उत्पादन पर विपरीत असर डालता है।
इसलिए बागवानों को इस रोग के दिखाई देते ही इसकी रोकथाम के उपाय करने चाहिए। इसके लिए सल्फर डब्लू डीजी की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इससे आम में बौर भी जल्दी आएगा। बौर खिलने के बाद सल्फर का छिड़काव नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आम में हॉपर कीट का प्रकोप भी इसी समय शुरू होता है। जब बौर छोटा होता है तो इस कीट के शिशु रस चूसकर बौर के विकास को प्रभावित करते हैं। इसकी रोकथाम के लिए बागवान लाइट ट्रेप, नीम का तेल, मेटाराइजियम आदि का प्रयोग कर सकते हैं।
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सहारनपुर। मौसम के उतार चढ़ाव के चलतेे आम के कई बागों में पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा) रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। दिन में गर्मी और रात में तापमान में गिरावट के चलते यह रोग तेजी से फैलता है। फफूंद जनित यह रोग आम के बौर को प्रभावित करता है। जिसका सीधा असर आम के उत्पादन पर पड़ता है।
जनपद में आम के कई बागों में फफूंदी जनित पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह रोग आम के बौर को प्रभावित करता है। प्रभावित बौर सफेद हो जाता है। इसके चलते प्रभावित आम के बौर पर फल नहीं बन पाते हैं। जिससे आम की प्रभावित फसल के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। यह रोग दिन के समय गर्मी और रात को नमी एवं ठंड में तेजी से फैलता है। यदि समय पर उपचार नहीं हुआ तो नुकसान बढ़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि आम के पाउडरी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप कई बागों में दिखाई दे रहा है। यह रोग आम के उत्पादन पर विपरीत असर डालता है।
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इसलिए बागवानों को इस रोग के दिखाई देते ही इसकी रोकथाम के उपाय करने चाहिए। इसके लिए सल्फर डब्लू डीजी की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इससे आम में बौर भी जल्दी आएगा। बौर खिलने के बाद सल्फर का छिड़काव नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आम में हॉपर कीट का प्रकोप भी इसी समय शुरू होता है। जब बौर छोटा होता है तो इस कीट के शिशु रस चूसकर बौर के विकास को प्रभावित करते हैं। इसकी रोकथाम के लिए बागवान लाइट ट्रेप, नीम का तेल, मेटाराइजियम आदि का प्रयोग कर सकते हैं।
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