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हवा आैर पानी में प्रदूषण ने घोल दिया जहर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 05 Jun 2016 01:26 AM IST
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बड़गांव क्षेत्र में प्रदूषण से काला हुआ हिंडन का पानी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अधिकारियों की उदासीनता, लोगों में जागरूकता की कमी और उद्यमियों की लापरवाही ने सहारनपुर की आबोहवा में जहर घोल दिया है। पानी से लेकर सहारनपुर की हवा तक प्रदूषित हो चुकी है। गांवों में पानी पीने योग्य नहीं रह गया है, शहर में सांस लेना मुश्किल हो गया है। एनजीटी में जवाबदेही से भी अधिकारी बचने का प्रयास कर रहे हैं और शपथ पत्र तक झूठे दिए जा रहे हैं।
सहारनपुर में शहर से लेकर गांवों तक अब प्रदूषण ने लोगों की सेहत को प्रभावित कर दिया है। उद्योगों से निकल रहे काले धुएं और वाहनों से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड ने हवा को प्रदूषित बना दिया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां भी हवा में प्रदूषण की जांच की तो मानकों से कई गुना प्रदूषण पाया। लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं, जिससे न सिर्फ कैंसर, बल्कि दमा, अल्सर और विकलांगता जैसे गंभीर परिणामों को भुगतना पड़ रहा है। उद्योगों से निकल रहे केमिकल युक्त पानी ने जीवनदायिनी नदियां हिंडन और कृष्णा को पूरी तरह से प्रदूषित कर डाला है।
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हालत यह है कि इन नदियों के किनारे के 20 गांवों का पानी अब पीने योग्य नहीं रह गया है। इस बात को जल निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने मान लिया है। एनजीटी में भी इसका शपथ पत्र दिया गया। लेकिन साल बीतते जा रहे हैं और लोग कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से मर रहे हैं। न जाने कब होगी सुनवाई।
पानी की जांच के नमूने मिले फेल
जल निगम द्वारा गांवों में लगभग 300 हैंडपंपों के पानी की जांच कराई गई, जिनमें से 125 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। नदियों के पानी के 34 सेंपल फेल आए, जो सिंचाई लायक भी नहीं।
एनजीटी में जवाब भी आधा अधूरा दिया ः सहारनपुर। एनजीटी के नोटिस पर 17 मई को हुई सुनवाई में सहारनपुर डीएम की ओर से जवाब दाखिल किया गया। लेकिन जवाब भी सही नहीं दिया गया। न तो पानी के पूरे सेंपल की जांच प्रस्तुत की गई और न ही प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योग सील किए गए।
शहर में मानकों से दो गुना प्रदूषण ः प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एके मिश्रा बताते हैं कि कई बार शहर में जगह-जगह प्रदूषण की जांच की गई। लेकिन हर बार प्रदूषण की स्थिति निर्धारित मानकों से डेढ़ से दोगुना तक मिली। सबसे अधिक प्रदूषण बिजलीघर और स्टार पेपर मिल के आसपास पाया गया। ढमोला नदी भी पूरी तरह प्रदूषित है।गांवों में जल प्रदूषण हिंडन तथा काली नदी में अधिक मिला है।
एनओसी देने तक सिमट गया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सहारनपुर। जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय तो है, लेकिन सुप्तावस्था में पहुंच चुका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय का काम सिर्फ एनओसी देने तक सिमट कर रह गया है। न तो बोर्ड के अधिकारियों को यह पता कि जिले में सबसे अधिक वायु एवं प्रदूषण किस स्थान पर है।
जल प्रदूषण की तो बोर्ड द्वारा कभी जांच ही नहीं की गई। सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर अपने कार्य की इतिश्री करने में लगे हुए हैं। चाहे कहीं भी प्रदूषण होता रहे, इससे बोर्ड का कोई लेना देना नहीं। यहां तक कि शहर में ढमोला नदी कूड़ादान बनकर रह गई, लेकिन आज तक बोर्ड ने किसी को भी एक पत्र भेजकर यह नहीं पूछा कि इसे प्रदूषित क्यों किया जा रहा है।
सहारनपुर में शहर से लेकर गांवों तक अब प्रदूषण ने लोगों की सेहत को प्रभावित कर दिया है। उद्योगों से निकल रहे काले धुएं और वाहनों से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड ने हवा को प्रदूषित बना दिया है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां भी हवा में प्रदूषण की जांच की तो मानकों से कई गुना प्रदूषण पाया। लोग प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं, जिससे न सिर्फ कैंसर, बल्कि दमा, अल्सर और विकलांगता जैसे गंभीर परिणामों को भुगतना पड़ रहा है। उद्योगों से निकल रहे केमिकल युक्त पानी ने जीवनदायिनी नदियां हिंडन और कृष्णा को पूरी तरह से प्रदूषित कर डाला है।
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हालत यह है कि इन नदियों के किनारे के 20 गांवों का पानी अब पीने योग्य नहीं रह गया है। इस बात को जल निगम और प्रशासनिक अधिकारियों ने मान लिया है। एनजीटी में भी इसका शपथ पत्र दिया गया। लेकिन साल बीतते जा रहे हैं और लोग कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से मर रहे हैं। न जाने कब होगी सुनवाई।
पानी की जांच के नमूने मिले फेल
जल निगम द्वारा गांवों में लगभग 300 हैंडपंपों के पानी की जांच कराई गई, जिनमें से 125 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। नदियों के पानी के 34 सेंपल फेल आए, जो सिंचाई लायक भी नहीं।
एनजीटी में जवाब भी आधा अधूरा दिया ः सहारनपुर। एनजीटी के नोटिस पर 17 मई को हुई सुनवाई में सहारनपुर डीएम की ओर से जवाब दाखिल किया गया। लेकिन जवाब भी सही नहीं दिया गया। न तो पानी के पूरे सेंपल की जांच प्रस्तुत की गई और न ही प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योग सील किए गए।
शहर में मानकों से दो गुना प्रदूषण ः प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एके मिश्रा बताते हैं कि कई बार शहर में जगह-जगह प्रदूषण की जांच की गई। लेकिन हर बार प्रदूषण की स्थिति निर्धारित मानकों से डेढ़ से दोगुना तक मिली। सबसे अधिक प्रदूषण बिजलीघर और स्टार पेपर मिल के आसपास पाया गया। ढमोला नदी भी पूरी तरह प्रदूषित है।गांवों में जल प्रदूषण हिंडन तथा काली नदी में अधिक मिला है।
एनओसी देने तक सिमट गया प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सहारनपुर। जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय तो है, लेकिन सुप्तावस्था में पहुंच चुका है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय का काम सिर्फ एनओसी देने तक सिमट कर रह गया है। न तो बोर्ड के अधिकारियों को यह पता कि जिले में सबसे अधिक वायु एवं प्रदूषण किस स्थान पर है।
जल प्रदूषण की तो बोर्ड द्वारा कभी जांच ही नहीं की गई। सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर अपने कार्य की इतिश्री करने में लगे हुए हैं। चाहे कहीं भी प्रदूषण होता रहे, इससे बोर्ड का कोई लेना देना नहीं। यहां तक कि शहर में ढमोला नदी कूड़ादान बनकर रह गई, लेकिन आज तक बोर्ड ने किसी को भी एक पत्र भेजकर यह नहीं पूछा कि इसे प्रदूषित क्यों किया जा रहा है।