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Saharanpur News: बड़े सिंडिकेट का चक्रव्यूह तोड़ेगी पुलिस
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सहारनपुर। जिला अस्पताल में फर्जी मेडिकल बनाने के मामले में बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। पुलिस की जांच में कई दलालों के नाम सामने आए हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और संगठन का अध्यक्ष भी पुलिस के निशाने पर आ गया है, जो इस खेल का बड़ा सौदागर है। पुलिस ने डॉक्टर, अधिवक्ता और उसके मुंशी सहित कई लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
आपराधिक वारदातों में फर्जी मेडिकल बनाए जाने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी फरजंद को गिरफ्तार किया। इसके अलावा एक डॉक्टर, अधिवक्ता, उसके मुंशी और फर्जी मेडिकल बनाने वाले आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। चिकित्सक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के दस्तावेज भेजे हैं और अनुमति मांगी है। इसी तरह अधिवक्ता की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि फर्जी मेडिकल बनाने के मामले बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जिसमें शामिल दलाल और सरकारी तंत्र से जुड़े कर्मचारी व डॉक्टर आपराधिक वारदातों में धाराएं बढ़ाने के लिए मोटी रकम लेकर फर्जी मेडिकल बना देते हैं। इसमें एक चतुुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भूमिका अहम बताई जा रही है, जो एक संगठन का अध्यक्ष भी है। इसकी सांठगांठ पुलिस से भी है। इसके साथ ही अस्पताल में इसका रौब है। पुलिस ने इसकी भूमिका भी जांच शुरू करा दी है। पता चला है कि संगठन का अध्यक्ष होने के नाते यह व्यक्ति ड्यूटी बेहद कम करता है। इसके पास एक बड़ा कार्यालय है, जिसमें पुलिसकर्मियों का भी आना-जाना लगा रहता है। इस पूरे मामले में डॉक्टर, अधिवक्ता और कर्मचारियों के अलावा कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
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निर्दोषों को जेल भिजवाने में अहम भूमिका
फर्जी मेडिकल के आधार पर निर्दोष लोगों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हो जाती है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करती है। ऐसे में कई बेगुनाहों को अलग-अलग मामलों में जेल भिजवाने में आरोपियों की भूमिका अहम रही है।
यह था मामला
तीन जनवरी को थाना जनकपुरी क्षेत्र के गांव सड़क दूधली निवासी महिला ने ससुरालियों व पति पर उसके ऊपर तेजाब डालने का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने 60 हजार रुपये देकर फर्जी मेडिकल बनवाया था। महिला के पति की तहरीर पर पुलिस ने कोतवाली रामपुर मनिहारान के गांव चकवाली निवासी फरजंद, डॉक्टर बीडी शर्मा, अधिवक्ता तौसीफ और मुंशी मसरूर सहित कई अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
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मामला गंभीर है। फर्जी मेडिकल बनाने वालों को पुलिस नहीं छोड़ेगी। इसमें शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। - डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी
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आपराधिक वारदातों में फर्जी मेडिकल बनाए जाने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी फरजंद को गिरफ्तार किया। इसके अलावा एक डॉक्टर, अधिवक्ता, उसके मुंशी और फर्जी मेडिकल बनाने वाले आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। चिकित्सक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के दस्तावेज भेजे हैं और अनुमति मांगी है। इसी तरह अधिवक्ता की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि फर्जी मेडिकल बनाने के मामले बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जिसमें शामिल दलाल और सरकारी तंत्र से जुड़े कर्मचारी व डॉक्टर आपराधिक वारदातों में धाराएं बढ़ाने के लिए मोटी रकम लेकर फर्जी मेडिकल बना देते हैं। इसमें एक चतुुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भूमिका अहम बताई जा रही है, जो एक संगठन का अध्यक्ष भी है। इसकी सांठगांठ पुलिस से भी है। इसके साथ ही अस्पताल में इसका रौब है। पुलिस ने इसकी भूमिका भी जांच शुरू करा दी है। पता चला है कि संगठन का अध्यक्ष होने के नाते यह व्यक्ति ड्यूटी बेहद कम करता है। इसके पास एक बड़ा कार्यालय है, जिसमें पुलिसकर्मियों का भी आना-जाना लगा रहता है। इस पूरे मामले में डॉक्टर, अधिवक्ता और कर्मचारियों के अलावा कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
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निर्दोषों को जेल भिजवाने में अहम भूमिका
फर्जी मेडिकल के आधार पर निर्दोष लोगों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज हो जाती है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करती है। ऐसे में कई बेगुनाहों को अलग-अलग मामलों में जेल भिजवाने में आरोपियों की भूमिका अहम रही है।
यह था मामला
तीन जनवरी को थाना जनकपुरी क्षेत्र के गांव सड़क दूधली निवासी महिला ने ससुरालियों व पति पर उसके ऊपर तेजाब डालने का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने 60 हजार रुपये देकर फर्जी मेडिकल बनवाया था। महिला के पति की तहरीर पर पुलिस ने कोतवाली रामपुर मनिहारान के गांव चकवाली निवासी फरजंद, डॉक्टर बीडी शर्मा, अधिवक्ता तौसीफ और मुंशी मसरूर सहित कई अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
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मामला गंभीर है। फर्जी मेडिकल बनाने वालों को पुलिस नहीं छोड़ेगी। इसमें शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। - डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी