{"_id":"614629098ebc3e7d131a4c84","slug":"plotting-done-on-leased-land-investigation-will-be-done-saharanpur-news-mrt556825825","type":"story","status":"publish","title_hn":"पट्टे की जमीन पर कर दी प्लाटिंग, होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पट्टे की जमीन पर कर दी प्लाटिंग, होगी जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। नानौता में पट्टे के रूप में आवंटित हुई ग्राम सभा की जमीन पर प्लाटिंग कर दी गई। करीब 20 बीघा से ज्यादा जमीन बेची जा चुकी है और बाकी जमीन भी बेचने की तैयारी चल रही है। नानौता की ग्राम प्रधान नीरज सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मामले में जांच और कार्रवाई कराने की मांग की है।
ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि अनुराग राणा ने जिलाधिकारी अखिलेश सिंह से मुलाकात के दौरान बताया कि वर्ष 1971 में करीब 52 बीघा भूमि देवबंद फ्रूट एंड वेजिटेबल सहकारी समिति के नाम आवंटित हुई थी। अभिलेखों में यह भूमि बंजर के रूप में दर्ज थी और उसका पूरा रिकार्ड है। आरोप है कि वर्ष 1975 में समिति के सेक्रेटरी ने उक्त भूमि अपनी रिश्तेदार महिला को बेच दी और उसका अमल दरामद करा दिया। इसके बाद उक्त भूमि पर प्लाटिंग कर दी गई तथा 20 बीघा से ज्यादा जमीन की बिक्री हो गई। कई मकान भी उस पर बनवा दिए गए हैं। अनुराग राणा ने बताया कि ग्राम पंचायत को पंचायत भवन बनाना है, जिसके लिए जमीन नहीं मिल पा रही है, इसलिए ग्राम समाज की भूमि को तलाशा गया है। उसी में पता चला कि उक्त बंजर की भूमि पट्टे के रूप में आवंटित हुई थी, लेकिन उसे बिक्री किया जा रहा है। अनुराग राणा ने कहा कि पट्टे की जमीन सिर्फ उपयोग के लिए आवंटित हुई थी, उसे बिक्री का अधिकार नहीं था। बावजूद इसके लेखपालों की मिलीभगत से यह खेल हो गया। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए और ग्राम समाज की भूमि मुक्त कराई जाए। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने तहसीलदार रामपुर मनिहारान को इस मामले में निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि अनुराग राणा ने जिलाधिकारी अखिलेश सिंह से मुलाकात के दौरान बताया कि वर्ष 1971 में करीब 52 बीघा भूमि देवबंद फ्रूट एंड वेजिटेबल सहकारी समिति के नाम आवंटित हुई थी। अभिलेखों में यह भूमि बंजर के रूप में दर्ज थी और उसका पूरा रिकार्ड है। आरोप है कि वर्ष 1975 में समिति के सेक्रेटरी ने उक्त भूमि अपनी रिश्तेदार महिला को बेच दी और उसका अमल दरामद करा दिया। इसके बाद उक्त भूमि पर प्लाटिंग कर दी गई तथा 20 बीघा से ज्यादा जमीन की बिक्री हो गई। कई मकान भी उस पर बनवा दिए गए हैं। अनुराग राणा ने बताया कि ग्राम पंचायत को पंचायत भवन बनाना है, जिसके लिए जमीन नहीं मिल पा रही है, इसलिए ग्राम समाज की भूमि को तलाशा गया है। उसी में पता चला कि उक्त बंजर की भूमि पट्टे के रूप में आवंटित हुई थी, लेकिन उसे बिक्री किया जा रहा है। अनुराग राणा ने कहा कि पट्टे की जमीन सिर्फ उपयोग के लिए आवंटित हुई थी, उसे बिक्री का अधिकार नहीं था। बावजूद इसके लेखपालों की मिलीभगत से यह खेल हो गया। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए और ग्राम समाज की भूमि मुक्त कराई जाए। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने तहसीलदार रामपुर मनिहारान को इस मामले में निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन