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विकास की योजना, खर्च होंगे 368 करोड़ रुपये
Fri, 01 Mar 2019 11:49 PM IST
Prag Gupta
ब्यूरो, सहारनपुर
ब्यूरो, सहारनपुर
Published by: Prag Gupta
Updated Fri, 01 Mar 2019 11:49 PM IST
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जिला योजना की बैठक में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही।
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर जनपद के विकास के लिए जिला योजना की बैठक में कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने 368 करोड़ के प्रस्तावों को हरी झंडी दी। जिला योजना में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्राम विकास और समाज कल्याण विभाग सहित अन्य विभागों के लिए बजट रखा गया। इस वर्ष सहकारिता व यूनानी को भी जिला योजना में शामिल किया गया।
विकास भवन सभागार में जिला प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में जिला योजना की बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिला विकास योजना वर्ष 2019-20 में जनपद हेतु शासन द्वारा 368.97 करोड़ का परिव्यय आवंटित किया, जो गत वर्ष के परिव्यय 410.11 करोड़ से 10.03 प्रतिशत कम है।
गत वर्ष की छह महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे, उद्यान विभाग, डीआरडीए प्रशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बाढ़ नियंत्रण, उच्च शिक्षा एवं ग्रामीण पेयजल इस साल नान प्लान में हस्तांतरित हो जाने के कारण उनमें धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया।
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दो नई योजनाएं सहकारिता एवं यूनानी इस वर्ष जिला योजना में शामिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि शासन की अति महत्वपूर्ण समग्र ग्राम विकास, प्रधानमंत्री आवास, पौधरोपण कार्यक्रम, समाज कल्याण सेक्टर एवं ग्रामीण शिक्षा के लिए भी पर्याप्त मात्रा में परिव्यय का आवंटन किया गया है।
इस दौरान जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय, सांसद राघव लखनपाल शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह, विधायक प्रदीप चौधरी, विधायक कुंवर बृजेश सिंह, विधायक देेवेंद्र निम, जिला विकास अधिकारी मंशाराम यादव, परियोजना निदेशक (डीआरडीए) दुष्यंत सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिला पंचायत सदस्यों ने किया हंगामा, दिया धरना
जिला योजना की बैठक का जिला पंचायत सदस्यों ने बहिष्कार कर दिया और विकास भवन के बाहर धरना दिया। बैठक में काफी देर इंतजार करने की वजह से जिला पंचायत सदस्य नाराज हो गए। इसके अलावा उनके द्वारा हैंडपंप लगवाने के दिए अनुमोदन पर विचार नहीं किया और न ही बजट की व्यवस्था की।
इसको लेकर जिला पंचायत सदस्यों का गुस्सा भड़क गया। प्रभारी मंत्री ने कह दिया कि बैठक के समय का सदुपयोग करें। धरने पर बैठे जिला पंचायत सदस्य संदीप चौधरी, राजू माजरा, सलीम, मुल्कीराज, नक्षत्रपाल ने नारेबाजी भी की। फिर सांसद राघवलखनपाल शर्मा और मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद जिला पंचायत सदस्यों ने धरना खत्म कर दिया और जिला योजना की बैठक में शामिल हुए।
जिला योजना की बैठक में इन कार्यों के लिए मिला बजट
-- कृषि के लिए 18 करोड़ सात लाख की धनराशि दी गई।
-- समाज कल्याण सेक्टर को 84 करोड़ 40 लाख की धनराशि दी गई।
-- सड़कों के लिए 122 करोड़ 12 लाख रुपये का बजट रखा गया।
-- सिंचाई सेक्टर के लिए दो करोड़ 30 लाख रुपये की धनराशि दी गई।
-- शिक्षा क्षेत्र में 51 करोड़ 33 लाख की धनराशि का प्रावधान किया।
-- स्वास्थ्य सेक्टर में 14 करोड़ 17 लाख का बजट रखा।
-- ग्राम विकास विभाग को 37 करोड़ 52 लाख की की धनराशि दी।
-- इस प्रकार प्रस्तावित परिव्यय में 85 करोड़ 37 लाख की धनराशि भी सम्मिलित है।
इनके लिए नहीं मिला कुछ
सहारनपुर। जिला योजना की बैठक में लघु एवं सीमांत कृषकों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए धनराशि की व्यवस्था नहीं की। सूकर प्रजनन प्रक्षेत्रों के विस्तार, ऑटोेमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट, सीलिंग भूमि आवंटियों की आर्थिक सहायता, नए नलकूपों के निर्माण, बाढ़ नियंत्रण की छोटी-छोटी परियोजनाओं, उद्यमियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण व कौशल सुधार प्रशिक्षण, रेशम उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन, राजकीय पुस्तकालयों, क्रीड़ा प्रतिष्ठापनों के निर्माण, एलोपैथिक चिकित्सालयों में रोगी आश्रय स्थलों के निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय होम्योपैथी औषधालयों की स्थापना, ग्रामीण पेयजल के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया गया।
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विकास भवन सभागार में जिला प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में जिला योजना की बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिला विकास योजना वर्ष 2019-20 में जनपद हेतु शासन द्वारा 368.97 करोड़ का परिव्यय आवंटित किया, जो गत वर्ष के परिव्यय 410.11 करोड़ से 10.03 प्रतिशत कम है।
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गत वर्ष की छह महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे, उद्यान विभाग, डीआरडीए प्रशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, बाढ़ नियंत्रण, उच्च शिक्षा एवं ग्रामीण पेयजल इस साल नान प्लान में हस्तांतरित हो जाने के कारण उनमें धनराशि का प्रावधान नहीं किया गया।
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दो नई योजनाएं सहकारिता एवं यूनानी इस वर्ष जिला योजना में शामिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि शासन की अति महत्वपूर्ण समग्र ग्राम विकास, प्रधानमंत्री आवास, पौधरोपण कार्यक्रम, समाज कल्याण सेक्टर एवं ग्रामीण शिक्षा के लिए भी पर्याप्त मात्रा में परिव्यय का आवंटन किया गया है।
इस दौरान जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय, सांसद राघव लखनपाल शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह, विधायक प्रदीप चौधरी, विधायक कुंवर बृजेश सिंह, विधायक देेवेंद्र निम, जिला विकास अधिकारी मंशाराम यादव, परियोजना निदेशक (डीआरडीए) दुष्यंत सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिला पंचायत सदस्यों ने किया हंगामा, दिया धरना
जिला योजना की बैठक का जिला पंचायत सदस्यों ने बहिष्कार कर दिया और विकास भवन के बाहर धरना दिया। बैठक में काफी देर इंतजार करने की वजह से जिला पंचायत सदस्य नाराज हो गए। इसके अलावा उनके द्वारा हैंडपंप लगवाने के दिए अनुमोदन पर विचार नहीं किया और न ही बजट की व्यवस्था की।
इसको लेकर जिला पंचायत सदस्यों का गुस्सा भड़क गया। प्रभारी मंत्री ने कह दिया कि बैठक के समय का सदुपयोग करें। धरने पर बैठे जिला पंचायत सदस्य संदीप चौधरी, राजू माजरा, सलीम, मुल्कीराज, नक्षत्रपाल ने नारेबाजी भी की। फिर सांसद राघवलखनपाल शर्मा और मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। इसके बाद जिला पंचायत सदस्यों ने धरना खत्म कर दिया और जिला योजना की बैठक में शामिल हुए।
जिला योजना की बैठक में इन कार्यों के लिए मिला बजट
-- कृषि के लिए 18 करोड़ सात लाख की धनराशि दी गई।
-- समाज कल्याण सेक्टर को 84 करोड़ 40 लाख की धनराशि दी गई।
-- सड़कों के लिए 122 करोड़ 12 लाख रुपये का बजट रखा गया।
-- सिंचाई सेक्टर के लिए दो करोड़ 30 लाख रुपये की धनराशि दी गई।
-- शिक्षा क्षेत्र में 51 करोड़ 33 लाख की धनराशि का प्रावधान किया।
-- स्वास्थ्य सेक्टर में 14 करोड़ 17 लाख का बजट रखा।
-- ग्राम विकास विभाग को 37 करोड़ 52 लाख की की धनराशि दी।
-- इस प्रकार प्रस्तावित परिव्यय में 85 करोड़ 37 लाख की धनराशि भी सम्मिलित है।
इनके लिए नहीं मिला कुछ
सहारनपुर। जिला योजना की बैठक में लघु एवं सीमांत कृषकों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए धनराशि की व्यवस्था नहीं की। सूकर प्रजनन प्रक्षेत्रों के विस्तार, ऑटोेमेटिक मिल्क कलेक्शन यूनिट, सीलिंग भूमि आवंटियों की आर्थिक सहायता, नए नलकूपों के निर्माण, बाढ़ नियंत्रण की छोटी-छोटी परियोजनाओं, उद्यमियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण व कौशल सुधार प्रशिक्षण, रेशम उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन, राजकीय पुस्तकालयों, क्रीड़ा प्रतिष्ठापनों के निर्माण, एलोपैथिक चिकित्सालयों में रोगी आश्रय स्थलों के निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय होम्योपैथी औषधालयों की स्थापना, ग्रामीण पेयजल के लिए बजट का प्रावधान नहीं किया गया।