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Saharanpur News: लंदन की नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहे कंपनी बाग के चित्र
Thu, 23 Feb 2023 11:52 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 23 Feb 2023 11:52 PM IST
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लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में लगे चित्र
सहारनपुर। करीब 300 वर्ष पहले स्थापित कंपनी बाग (वर्तमान में औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र) के कई चित्र लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहे हैं। ये चित्र ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में भी सहारनपुर के नाम से संग्रहित हैं। इस उद्यान में पहली बार फूल गोभी और चाय की खेती का भी सफल प्रयोग किया गया था।
शहर में चकराता रोड पर स्थित करीब 125 एकड़ में फैले औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के नाम से विख्यात राजकीय उद्यान की स्थापना मुगलकाल में 17वीं शताब्दी में हुई थी। इसी उद्यान में शाहजहां के शासनकाल में देश में पहली बार फूल गोभी की खेती का सफल प्रयोग हुआ। इसके लिए बीज स्पेन से मंगवाया गया था। इसके बाद यह उद्यान ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया। पुस्तक हमारा गौरव सहारनपुर राजकीय उद्यान के लेखक डॉ. एसके उपाध्याय बताते हैं कि वर्ष 1832 में प्रख्यात जीवाश्म विशेषज्ञ डॉ. फाकनर इस उद्यान के निदेशक बने। उस समय चाय पर चीन का एकाधिकार था। इस एकाधिकार को तोड़ने के लिए डॉ. गोवन एवं डाॅ. रॉयली के समय में असम से पौधे लाकर यहां चाय की खेती की तकनीक विकसित की गई। इसके बाद गढ़वाल और कुमाऊं की पहाड़ियों पर बागान लगाकर चाय की खेती की शुरूआत कराई गई थी।
कंपनी बाग में संरक्षित हैं कई दुर्लभ पेड़
कंपनी बाग की पुष्प प्रजनक एवं विरासत प्रभारी डॉ. पूनम सिंह यादव के अनुसार कंपनी बाग में कई दुर्लभ पेड़ संरक्षित हैं। इन पेड़ों को हैरिटेज ट्री घोषित कर रखा है। इनमें करीब 300 वर्ष पुराना साइकस, 150 वर्ष पुराना बरगद, 110 वर्ष पुराना पीपल, लगभग 100 वर्ष पुराना नीम, 135 वर्ष पुराना महोगनी, 100 वर्ष पुराना अर्जुन, 110 वर्ष पुराना साल और गाब के पेड़ शामिल हैं।
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विश्व धरोहर है कंपनी बाग
-एमएस कॉलेज के बॉटनी विभागाध्यक्ष रहे डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि कंपनी बाग विश्व धरोहर है। इसका नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां के कई चित्रों को लंदन की नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में सहारनपुर के नाम से लगाया गया है। इस उद्यान में आम, आडू, लोकाट सहित अन्य फलों की उन्नतशील प्रजातियों को भी विकसित किया गया है।
- वर्ष 1844 में इस उद्यान के निदेशक रहे विलियम जेमसन ने यहां पर फोटोग्राफी एवं चित्रकला का भी एक विभाग खुलवाया। उन्होंने यहां के पौधों के 311 रंगीन चित्र बनवाए थे। इन चित्रों को उस समय ब्रिटिश महारानी के महल और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के घरों में लगवाया गया था। इनमें से अनेक चित्र आज भी ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में सहारनपुर के नाम से संग्रहित हैं।-- -- सुरेश कुमार, संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र।
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शहर में चकराता रोड पर स्थित करीब 125 एकड़ में फैले औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के नाम से विख्यात राजकीय उद्यान की स्थापना मुगलकाल में 17वीं शताब्दी में हुई थी। इसी उद्यान में शाहजहां के शासनकाल में देश में पहली बार फूल गोभी की खेती का सफल प्रयोग हुआ। इसके लिए बीज स्पेन से मंगवाया गया था। इसके बाद यह उद्यान ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया। पुस्तक हमारा गौरव सहारनपुर राजकीय उद्यान के लेखक डॉ. एसके उपाध्याय बताते हैं कि वर्ष 1832 में प्रख्यात जीवाश्म विशेषज्ञ डॉ. फाकनर इस उद्यान के निदेशक बने। उस समय चाय पर चीन का एकाधिकार था। इस एकाधिकार को तोड़ने के लिए डॉ. गोवन एवं डाॅ. रॉयली के समय में असम से पौधे लाकर यहां चाय की खेती की तकनीक विकसित की गई। इसके बाद गढ़वाल और कुमाऊं की पहाड़ियों पर बागान लगाकर चाय की खेती की शुरूआत कराई गई थी।
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कंपनी बाग में संरक्षित हैं कई दुर्लभ पेड़
कंपनी बाग की पुष्प प्रजनक एवं विरासत प्रभारी डॉ. पूनम सिंह यादव के अनुसार कंपनी बाग में कई दुर्लभ पेड़ संरक्षित हैं। इन पेड़ों को हैरिटेज ट्री घोषित कर रखा है। इनमें करीब 300 वर्ष पुराना साइकस, 150 वर्ष पुराना बरगद, 110 वर्ष पुराना पीपल, लगभग 100 वर्ष पुराना नीम, 135 वर्ष पुराना महोगनी, 100 वर्ष पुराना अर्जुन, 110 वर्ष पुराना साल और गाब के पेड़ शामिल हैं।
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विश्व धरोहर है कंपनी बाग
-एमएस कॉलेज के बॉटनी विभागाध्यक्ष रहे डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि कंपनी बाग विश्व धरोहर है। इसका नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां के कई चित्रों को लंदन की नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में सहारनपुर के नाम से लगाया गया है। इस उद्यान में आम, आडू, लोकाट सहित अन्य फलों की उन्नतशील प्रजातियों को भी विकसित किया गया है।
- वर्ष 1844 में इस उद्यान के निदेशक रहे विलियम जेमसन ने यहां पर फोटोग्राफी एवं चित्रकला का भी एक विभाग खुलवाया। उन्होंने यहां के पौधों के 311 रंगीन चित्र बनवाए थे। इन चित्रों को उस समय ब्रिटिश महारानी के महल और अन्य महत्वपूर्ण लोगों के घरों में लगवाया गया था। इनमें से अनेक चित्र आज भी ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में सहारनपुर के नाम से संग्रहित हैं।

लंदन स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में लगे चित्र