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Saharanpur News: अनुुसूचित जाति के प्रमाण पत्र जारी करने में आपराधिक षडयंत्र का आरोप, याचिका दाखिल
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- अदालत ने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर समेत अन्यों को जारी किए नोटिस
- 18 जुलाई को होनी है अगली सुनवाई, मंडलायुक्त से जांच आख्या तलब
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में कार्रवाई न करने का आरोप जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर समेत अन्य अधिकारियों पर लगा है। वादी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अदालत में याचिका दाखिल की है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रथम की अदालत ने सुनवाई करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
वादी मोतीराम (सेवानिवृत्त कानूनगो) ने याचिका में बताया कि मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील में तत्कालीन लेखपाल विकास धनगर व तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम गौड़ वर्तमान में तहसीलदार सदर मुजफ्फरनगर ने अनुचित लाभ प्राप्त किया है। कृष्ण कुमार निवासी शुक्रतारी ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नौ जनवरी 2024 को ऑनलाइन आवेदन किया था। उसने खुद को भुइयार जाति का बताते हुए प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी।
इस पर तहसीलदार ने नियमों का हवाला देते हुए आवेदन को 13 जनवरी 2024 को निरस्त कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद फिर से कृष्ण ने अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र के लिए 17 जनवरी 2024 को आवेदन किया। आवेदन के बाद 18 जनवरी 2024 को भुइयार जाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके अलावा कुमारी वैष्णवी ने भी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। मोतीराम ने आरोप लगाया कि पहले तो आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फिर से किए गए आवेदन पर प्रमाण पत्र जारी किया गया। ऐसे ही अन्य भी मामलों में हुआ।
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वाल्मीकि क्रांति दल द्वारा मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी को 18 जनवरी 2024 को जुलाहा जाति के लोगों को भुइयार अनुसूचित जाति के अवैध प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में शिकायत की गई। जिलाधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को जांच के आदेश दिए। जांच में ग्रामवासियों ने भी लोगों की जाति जुलाहा बताई। 1359 फसली के खसरे में भी दर्ज व्यक्तियों की जाति के संबंध में भुइयार जाति का व्यक्ति दर्ज नहीं है। पूर्वजों की जाति जुलाहा अंकित है।
वादी मोतीराम ने जिलाधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, आयुक्त सहारनपुर मंडल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री को भी लिखित शिकायत की। उन्होंने जारी प्रमाण पत्रों को निरस्त किए जाने की मांग की। कहा कि आदेशों के बाद भी इन प्रमाण पत्रों की जांच कर 30 दिनों के भीतर निरस्त नहीं किया गया। उन्होंने याचिका में कहा कि तत्कालीन तहसीलदार जानसठ, लेखपाल तहसील जानसठ, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर ने आपराधिक षड्यंत्र करके, धोखाधड़ी, कूटरचना करते हुए लाभ प्राप्त करने के लिए उद्देश्य से अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया है।
अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किए हैं। कहा कि इस मामले में मंडलायुक्त सहारनपुर से जांच आख्या तलब किया जाना आवश्यक है। अदालत ने पत्रावली पर आपत्ति, विपक्षीगणों की जांच आख्या और बयान दर्ज करने के लिए 18 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
वर्जन
जिला समाज कल्याण अधिकारी कमलेश कुमार का कहना है कि परिवाद या इस तरह के किसी प्रकरण की जानकारी नहीं है। उनसे जाति प्रमाणपत्र के संबंध में किसी व्यक्ति की बात नहीं हुई। कानून के दायरे में ही प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।
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- 18 जुलाई को होनी है अगली सुनवाई, मंडलायुक्त से जांच आख्या तलब
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में कार्रवाई न करने का आरोप जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर समेत अन्य अधिकारियों पर लगा है। वादी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अदालत में याचिका दाखिल की है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रथम की अदालत ने सुनवाई करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
वादी मोतीराम (सेवानिवृत्त कानूनगो) ने याचिका में बताया कि मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील में तत्कालीन लेखपाल विकास धनगर व तत्कालीन तहसीलदार राधेश्याम गौड़ वर्तमान में तहसीलदार सदर मुजफ्फरनगर ने अनुचित लाभ प्राप्त किया है। कृष्ण कुमार निवासी शुक्रतारी ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नौ जनवरी 2024 को ऑनलाइन आवेदन किया था। उसने खुद को भुइयार जाति का बताते हुए प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी।
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इस पर तहसीलदार ने नियमों का हवाला देते हुए आवेदन को 13 जनवरी 2024 को निरस्त कर दिया था। आरोप है कि इसके बाद फिर से कृष्ण ने अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र के लिए 17 जनवरी 2024 को आवेदन किया। आवेदन के बाद 18 जनवरी 2024 को भुइयार जाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके अलावा कुमारी वैष्णवी ने भी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। मोतीराम ने आरोप लगाया कि पहले तो आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फिर से किए गए आवेदन पर प्रमाण पत्र जारी किया गया। ऐसे ही अन्य भी मामलों में हुआ।
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वाल्मीकि क्रांति दल द्वारा मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी को 18 जनवरी 2024 को जुलाहा जाति के लोगों को भुइयार अनुसूचित जाति के अवैध प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में शिकायत की गई। जिलाधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को जांच के आदेश दिए। जांच में ग्रामवासियों ने भी लोगों की जाति जुलाहा बताई। 1359 फसली के खसरे में भी दर्ज व्यक्तियों की जाति के संबंध में भुइयार जाति का व्यक्ति दर्ज नहीं है। पूर्वजों की जाति जुलाहा अंकित है।
वादी मोतीराम ने जिलाधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, आयुक्त सहारनपुर मंडल, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री को भी लिखित शिकायत की। उन्होंने जारी प्रमाण पत्रों को निरस्त किए जाने की मांग की। कहा कि आदेशों के बाद भी इन प्रमाण पत्रों की जांच कर 30 दिनों के भीतर निरस्त नहीं किया गया। उन्होंने याचिका में कहा कि तत्कालीन तहसीलदार जानसठ, लेखपाल तहसील जानसठ, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर ने आपराधिक षड्यंत्र करके, धोखाधड़ी, कूटरचना करते हुए लाभ प्राप्त करने के लिए उद्देश्य से अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया है।
अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किए हैं। कहा कि इस मामले में मंडलायुक्त सहारनपुर से जांच आख्या तलब किया जाना आवश्यक है। अदालत ने पत्रावली पर आपत्ति, विपक्षीगणों की जांच आख्या और बयान दर्ज करने के लिए 18 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
वर्जन
जिला समाज कल्याण अधिकारी कमलेश कुमार का कहना है कि परिवाद या इस तरह के किसी प्रकरण की जानकारी नहीं है। उनसे जाति प्रमाणपत्र के संबंध में किसी व्यक्ति की बात नहीं हुई। कानून के दायरे में ही प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं।