{"_id":"596d04404f1c1bcc5d8b4638","slug":"people-living-in-tarpaulan-not-to-toilets","type":"story","status":"publish","title_hn":"तिरपाल डालकर रह रहे लोग, शौचालय तक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तिरपाल डालकर रह रहे लोग, शौचालय तक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:09 AM IST
विज्ञापन
तिरपाल के नीचे रह रहा परिवार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर में मंडलायुक्त के गोद लिए गांव की स्थिति जानने के बाद अमर उजाला टीम ने सोमवार को डीएम के गोद लिए गांव चुन्हेटी गाड़ा का भ्रमण कर यहां आए बदलाव को जानने का प्रयास किया। भ्रमण से पहले लग रहा था कि सबके पास शौचालय होंगे, पक्की छतें होंगी।
गांव की गलियां पक्की और साफ-सुथरी होंगी। मगर तीन साल बाद भी इस गांव में अपेक्षित सुधार और बदलाव नजर नहीं आया। शहर से सटा और दिल्ली हाइवे पर बसा चुन्हेटी गाड़ा मिश्रित आबादी वाला गांव है।
जहां सर्वाधिक संख्या मुस्लिमों की है। उसके बाद दलित और सवर्ण हैं। डीएम के गोद लेने के बाद ग्रामीणों को सड़क, बिजली, पानी, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जगी थी।
विज्ञापन
मगर गांव में आज भी कई परिवार सिर छुपाने के लिए तिरपाल डाले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों की है। अनेक परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। ऐसे परिवारों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
गांव की गलियों में गंदगी फैली है। कई सड़कें टूटी हैं और नालियां ध्वस्त हैं। कुछ गलियों में खड़ंजा तक नहीं बिछा है। गांव के बाहर दिल्ली रोड के किनारे बने नाले की सफाई कई साल से नहीं हुई है।
ऐसे में बरसात में नाला ओवरफ्लो हो जाता है। इसकी वजह से कीचड़ हो जाता है। उधर, गांव चुन्हेटी गाड़ा में एक बड़ा तालाब है, जिसके कुछ हिस्से पर कब्जा है। कई बार विवाद भी हो चुका है, मगर कब्जाधारी मानने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
गांव की गलियां पक्की और साफ-सुथरी होंगी। मगर तीन साल बाद भी इस गांव में अपेक्षित सुधार और बदलाव नजर नहीं आया। शहर से सटा और दिल्ली हाइवे पर बसा चुन्हेटी गाड़ा मिश्रित आबादी वाला गांव है।
विज्ञापन
जहां सर्वाधिक संख्या मुस्लिमों की है। उसके बाद दलित और सवर्ण हैं। डीएम के गोद लेने के बाद ग्रामीणों को सड़क, बिजली, पानी, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जगी थी।
विज्ञापन
मगर गांव में आज भी कई परिवार सिर छुपाने के लिए तिरपाल डाले हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिमों की है। अनेक परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। ऐसे परिवारों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
गांव की गलियों में गंदगी फैली है। कई सड़कें टूटी हैं और नालियां ध्वस्त हैं। कुछ गलियों में खड़ंजा तक नहीं बिछा है। गांव के बाहर दिल्ली रोड के किनारे बने नाले की सफाई कई साल से नहीं हुई है।
ऐसे में बरसात में नाला ओवरफ्लो हो जाता है। इसकी वजह से कीचड़ हो जाता है। उधर, गांव चुन्हेटी गाड़ा में एक बड़ा तालाब है, जिसके कुछ हिस्से पर कब्जा है। कई बार विवाद भी हो चुका है, मगर कब्जाधारी मानने को तैयार नहीं हैं।