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किसानों की जिजीविषा और संघर्ष की जीत हुई
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किसान नेता श्यामवीर त्यागी
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बाद एमएसपी पर कानून बनाने के लिए एक कमेटी के गठन की घोषणा के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन को स्थगित कर दिया है। किसान संगठन इसे अपनी जीत बता रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए तीन कृषि कानूनों से आक्रोशित किसानों ने इसके विरोध में आंदोलन शुरू किया था। इसको लेकर गत वर्ष 26 नवंबर से किसान गाजीपुर, सिंघु से लेकर टिकरी बॉर्डरों पर डट गए थे। किसान आंदोलन ने कई उतार चढाव देखे। जनपद से बड़ी संख्या में किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में भागेदारी की, साथ ही जनपद में भी कई बार धरना प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने लगातार धरना जारी रहा। जनपद के किसानों ने बड़ी संख्या में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में शिरकत की और भंडारा भी चलाया। कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब एमएसपी फसल खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित अन्य मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी के गठन की घोषणा के बाद आंदोलन स्थगित होने से किसानों में हर्ष है। किसान संगठन का कहना है कि यह किसानों की जीत है, अब घर वापसी होगी।
किसानों की जीत
कृषि कानूनों की वापसी के बाद एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने के लिए कमेटी के गठन की घोषणा किसान आंदोलन की जीत है। 378 दिन तक लंबे चले आंदोलन का अनुशासित रहना बड़ी उपलब्धि है। किसानों के मसीहा स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद चौधरी राकेश टिकैत किसानों के बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं। - चौधरी विनय कुमार, जिलाध्यक्ष भाकियू।
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अहिंसात्मक तरीके से चला आंदोलन
तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद किसान आंदोलन अहिंसात्मक तरीके से चला। आंदोलन को सफल बनाने में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कड़ी तपस्या की। किसानों की जिजीविषा और संघर्ष की जीत हुई है। सरकार को किसानों की बात मानने को मजबूर होना पड़ा। यह जीत शहीद हुए किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
नवीन राठी, मंडल अध्यक्ष भाकियू।
भरोसे पर स्थगित हुआ आंदोलन
सरकार द्वारा एमएसपी पर कानून बनाने सहित अन्य मांगों के लिए कमेटी के गठन की घोषणा पर आंदोलन स्थगित हुआ है। अब गेंद सरकार के पाले में हैं। किसान संगठनों ने तो केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पर आंदोलन को स्थगित कर दिया है। अब सरकार सकारात्मक रुख के साथ किसानों की मांगों को पूरा करे।
- नीरज चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव युवा भाकियू (अंबावत)।
फसलों का लाभकारी मूल्य मिले
किसान सिर्फ एमएसपी की गारंटी से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उन्हें फसलों का लाभकारी मूल्य चाहिए। जिन 23 फसलों का एमएसपी घोषित होता है सरकार उनकी खरीद कराए। सरकार द्वारा गठित होने वाली कमेटी में सभी किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व हो। कोई भी निर्णय करते समय छोटे किसानों का विशेष ख्याल रखा जाए।
- श्यामवीर त्यागी, प्रांतीय संयोजक (गन्ना) भारतीय किसान संघ।
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केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए तीन कृषि कानूनों से आक्रोशित किसानों ने इसके विरोध में आंदोलन शुरू किया था। इसको लेकर गत वर्ष 26 नवंबर से किसान गाजीपुर, सिंघु से लेकर टिकरी बॉर्डरों पर डट गए थे। किसान आंदोलन ने कई उतार चढाव देखे। जनपद से बड़ी संख्या में किसानों ने गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में भागेदारी की, साथ ही जनपद में भी कई बार धरना प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने लगातार धरना जारी रहा। जनपद के किसानों ने बड़ी संख्या में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में शिरकत की और भंडारा भी चलाया। कृषि कानूनों की वापसी के बाद अब एमएसपी फसल खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाने सहित अन्य मांगों पर विचार करने के लिए कमेटी के गठन की घोषणा के बाद आंदोलन स्थगित होने से किसानों में हर्ष है। किसान संगठन का कहना है कि यह किसानों की जीत है, अब घर वापसी होगी।
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किसानों की जीत
कृषि कानूनों की वापसी के बाद एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने के लिए कमेटी के गठन की घोषणा किसान आंदोलन की जीत है। 378 दिन तक लंबे चले आंदोलन का अनुशासित रहना बड़ी उपलब्धि है। किसानों के मसीहा स्वर्गीय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बाद चौधरी राकेश टिकैत किसानों के बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं। - चौधरी विनय कुमार, जिलाध्यक्ष भाकियू।
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अहिंसात्मक तरीके से चला आंदोलन
तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद किसान आंदोलन अहिंसात्मक तरीके से चला। आंदोलन को सफल बनाने में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कड़ी तपस्या की। किसानों की जिजीविषा और संघर्ष की जीत हुई है। सरकार को किसानों की बात मानने को मजबूर होना पड़ा। यह जीत शहीद हुए किसानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
नवीन राठी, मंडल अध्यक्ष भाकियू।
भरोसे पर स्थगित हुआ आंदोलन
सरकार द्वारा एमएसपी पर कानून बनाने सहित अन्य मांगों के लिए कमेटी के गठन की घोषणा पर आंदोलन स्थगित हुआ है। अब गेंद सरकार के पाले में हैं। किसान संगठनों ने तो केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन पर आंदोलन को स्थगित कर दिया है। अब सरकार सकारात्मक रुख के साथ किसानों की मांगों को पूरा करे।
- नीरज चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव युवा भाकियू (अंबावत)।
फसलों का लाभकारी मूल्य मिले
किसान सिर्फ एमएसपी की गारंटी से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उन्हें फसलों का लाभकारी मूल्य चाहिए। जिन 23 फसलों का एमएसपी घोषित होता है सरकार उनकी खरीद कराए। सरकार द्वारा गठित होने वाली कमेटी में सभी किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व हो। कोई भी निर्णय करते समय छोटे किसानों का विशेष ख्याल रखा जाए।
- श्यामवीर त्यागी, प्रांतीय संयोजक (गन्ना) भारतीय किसान संघ।

किसान नेता विनय कुमार- फोटो : SAHARANPUR

किसान नेता नीरज चौधरी- फोटो : SAHARANPUR

भाकियू मंडल अध्यक्ष नवीन राठी- फोटो : SAHARANPUR