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समय पर नहीं भुगतान, पर बढ़ रहा गन्ने का क्रेज

Fri, 25 Jun 2021 11:52 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Jun 2021 11:52 PM IST
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Payment not made on time, but increasing trend in sugarcane farming
सहारनपुर। गन्ना खेती में किसानों का रुझान बढ़ रहा है, वह भी तब, जबकि समय पर भुगतान नहीं मिलता। पेराई सत्र समाप्त हो चुका है, पर मंडल के तीनों जिलों की चीनी मिलों पर 2100 करोड़ से ज्यादा गन्ना मूल्य बकाया है। इसके उलट दूसरी तस्वीर यह है कि आगामी सीजन के लिए चल रहे सर्वे में करीब 10 हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा बढ़ने जा रहा है। यानि गन्ना खेती किसानों को ज्यादा ही भा रही है, जबकि कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि फसल चक्र अपनाया जाए, उससे मृदा की उर्वरा शक्ति भी ठीक रहती है।
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गत पेराई सत्र में मंडल में करीब 351676 हेक्टेयर गन्ने का क्षेत्रफल था। मंडल की 17 शुगर मिलों ने 1862.35 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई करके 206.85 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। इस बार भी गन्ने का रकबा बढ़ने की संभावना है। क्योंकि मंडल के 208 गांवों की सर्वे रिपोर्ट में सहारनपुर में 5.52 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 1.43 और शामली में 2.34 फीसदी गन्ना रकबा बढ़ोतरी सामने आई।
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बकाया भुगतान की स्थिति
सहारनपुर --------- 600 करोड़ रुपये
मुजफ्फरनगर ----- 786 करोड़ रुपये
शामली ------------ 739 करोड़ रुपये
ये कहना है गन्ना किसानों का
देवबंद के गांव तल्हेड़ी बुजुर्ग निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि गन्ना बेचने के पर्याप्त साधन जैसे मिल क्रेशर और चर्खियां मौजूद हैं। भुगतान भले ही देर से आए, लेकिन आ जाता है।
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साढ़ौली कदीम के गांव चको निवासी इन्द्राज सिंह का कहना है कि गन्ना बुवाई का रकबा बढ़ाना मजबूरी बनती जा रही है। गेहूं व धान की फसल समय पर लागत के अनुरूप उचित मूल्य पर नहीं बिक पाती है। गन्ने की फसल को मिल न चलने पर भी कोल्हू पर बेच नकद भुगतान मिल जाता है।
बड़गांव क्षेत्र के गांव भायला निवासी पोपिन्द्र शर्मा का कहना है कि आंधी, तूफान, ओलावृष्टि आदि से नुकसान के बाद भी गन्ना फसल लाभ दे जाती है। पशुओं के लिए चारा भी मिल जाता है। गन्ना मिल या चरखी में डालने में दिक्कत नहीं आती।

नागल क्षेत्र के गांव नगली मेहनाज निवासी चौधरी विजेंद्र उर्फ काला का कहना है कि किसान के पास गन्ना बोने के अलावा कोई भी विकल्प नहीं है। धान और गेहूं आदि फसलों के भाव उचित नहीं मिलते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान को अपनी फसल बेचने के लिए कई कई दिन लाइन में लगना पड़ता है।
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