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शिवालिक से रिचार्ज होंगी पांवधोई, ढमोला और नागदेई नदी
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सहारनपुर। बेशक पांवधोई नदी का उद्गम स्थल गांव शकलापुरी और ढमोला नदी का उद्गम स्थल ढमोला व अन्य गांवों से हो। मगर हकीकत में इन नदियों का रिचार्ज प्वाइंट शिवालिक ही है। शिवालिक से ये नदियां अंडरग्राउंड बहकर उक्त गांवों में चोहों के रूप में निकलती हैं। शिवालिक से धरातल के ऊपर से बहकर आ रही नागदेई नदी के साथ ही पांवधोई और ढमोला नदी को भी शिवालिक से रिचार्ज करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए भूगर्भ जल रिचार्ज प्लान तैयार किया गया है।
पांवधोई, ढमोला और नागदेई तीनों ही नदियां हिंडन नदी की सहायक नदियां हैं। नागदेई नदी कोठरी बहलोलपुर से चलकर करीब 42 किलोमीटर का सफर तय कर गांव घोघरेकी के पास हिंडन नदी में गिरती है। पांवधोई शकलापुरी से चलकर करीब सात किलोमीटर का सफर तय कर शहर में आकर ढमोला नदी में गिरती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन नदी में गिरती है। तीनों नदियां दूषित हो चुकी हैं। दूषित होने की एक वजह इन नदियों में पानी कम मात्रा में आना है, जिसकी वजह से नदियों में जमी गंदगी आगे नहीं बह पाती है। शहरी क्षेत्र में ढमोला और पांवधोई नदी की सफाई के लिए अभियान कई साल से चल रहे हैं, मगर सुधार नहीं हुआ है। मगर अब उक्त नदियों को रिचार्ज करने के कदम उठाए जा रहे हैं। उक्त नदियों को शिवालिक क्षेत्र से रिचार्ज किया जाएगा। शिवालिक क्षेत्र के ऐसे कई गांव चिह्नित किए गए हैं, जहां बरसात का पानी धरती में समाकर चोहों के रूप में पांवधोई और ढमोला नदी के जल स्तर को बढ़ाता है। शिवालिक क्षेत्र 64 स्क्वायर किलोमीटर का है। इस क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष करीब 64 हजार क्यूबिक मीटर (छह करोड़ 40 लाख लीटर) पानी वर्षा का आता है। भारी मात्रा में पानी बहकर फैल जाता है। भूगर्भ जल रिचार्ज प्लान के तहत बरसात के पानी को रिचार्ज प्वाइंटस के जरिए नदियों के जल स्तर को बढ़ाने का है।
इन गांवों को किया गया चिह्नित
जिन गांवों में रिचार्ज प्वाइंट्स को विकसित किया जाना है उनमें कोठरी बहलोलपुर, नगला माफी, शाकंभरी देवी क्षेत्र, कालूवाला जहानपुरा, कालूवाला पहाड़ीपुर, इंदरपुर तलरा, रामपुर, शेरपुर कल्लो, रोशनपुर, अलीअकबरपुर, फतेहपुर पेल्लो, खुशहालीपुर, मोहंड, गणेशपुर आदि शामिल हैं।
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ग्राम सभाओं की होगी जिम्मेदारी
नदियों के रिचार्जिंग के लिए एक ओर जहां कई सरकारी विभाग लगे हैं। वहीं शिवालिक क्षेत्र की संबंधित ग्राम सभाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही ग्राम सभाओं के पास होने वाले फंड का इस्तेमाल भी नदियों को नया जीवन देने में खर्च किया जाएगा।
मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित होगा
नदियों को रिचार्ज करने के साथ ही उनके पानी को साफ करना भी योजना में शामिल है। कार्यक्रम शुरू करने से पहले नदियों की क्या हालत थी। उनका पानी की गुणवत्ता कितनी थी। इस पर नजर रखने तथा ग्राफ तैयार करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।
नगरायुक्त ने बनाई समन्वय समिति
नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह की ओर से समन्वय समिति बनाई गई है। समिति में सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम के अधिकारियों के अलावा पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढौली कदीम और बलियाखेड़ी के बीडीओ शामिल हैं।
- पांवधोई, ढमोला और नागदेई नदियों को साफ करने के साथ ही उनमें जल स्तर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। शिवालिक क्षेत्र में रिचार्जिंग प्वाइंट्स को विकसित किया जाना है, जिसके लिए ग्राम सभाएं और कई विभाग मिलकर काम करेंगे।
डॉ. उमर सैफ, कोर्डिनेटर।
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पांवधोई, ढमोला और नागदेई तीनों ही नदियां हिंडन नदी की सहायक नदियां हैं। नागदेई नदी कोठरी बहलोलपुर से चलकर करीब 42 किलोमीटर का सफर तय कर गांव घोघरेकी के पास हिंडन नदी में गिरती है। पांवधोई शकलापुरी से चलकर करीब सात किलोमीटर का सफर तय कर शहर में आकर ढमोला नदी में गिरती है, जबकि ढमोला नदी हिंडन नदी में गिरती है। तीनों नदियां दूषित हो चुकी हैं। दूषित होने की एक वजह इन नदियों में पानी कम मात्रा में आना है, जिसकी वजह से नदियों में जमी गंदगी आगे नहीं बह पाती है। शहरी क्षेत्र में ढमोला और पांवधोई नदी की सफाई के लिए अभियान कई साल से चल रहे हैं, मगर सुधार नहीं हुआ है। मगर अब उक्त नदियों को रिचार्ज करने के कदम उठाए जा रहे हैं। उक्त नदियों को शिवालिक क्षेत्र से रिचार्ज किया जाएगा। शिवालिक क्षेत्र के ऐसे कई गांव चिह्नित किए गए हैं, जहां बरसात का पानी धरती में समाकर चोहों के रूप में पांवधोई और ढमोला नदी के जल स्तर को बढ़ाता है। शिवालिक क्षेत्र 64 स्क्वायर किलोमीटर का है। इस क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष करीब 64 हजार क्यूबिक मीटर (छह करोड़ 40 लाख लीटर) पानी वर्षा का आता है। भारी मात्रा में पानी बहकर फैल जाता है। भूगर्भ जल रिचार्ज प्लान के तहत बरसात के पानी को रिचार्ज प्वाइंटस के जरिए नदियों के जल स्तर को बढ़ाने का है।
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इन गांवों को किया गया चिह्नित
जिन गांवों में रिचार्ज प्वाइंट्स को विकसित किया जाना है उनमें कोठरी बहलोलपुर, नगला माफी, शाकंभरी देवी क्षेत्र, कालूवाला जहानपुरा, कालूवाला पहाड़ीपुर, इंदरपुर तलरा, रामपुर, शेरपुर कल्लो, रोशनपुर, अलीअकबरपुर, फतेहपुर पेल्लो, खुशहालीपुर, मोहंड, गणेशपुर आदि शामिल हैं।
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ग्राम सभाओं की होगी जिम्मेदारी
नदियों के रिचार्जिंग के लिए एक ओर जहां कई सरकारी विभाग लगे हैं। वहीं शिवालिक क्षेत्र की संबंधित ग्राम सभाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही ग्राम सभाओं के पास होने वाले फंड का इस्तेमाल भी नदियों को नया जीवन देने में खर्च किया जाएगा।
मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित होगा
नदियों को रिचार्ज करने के साथ ही उनके पानी को साफ करना भी योजना में शामिल है। कार्यक्रम शुरू करने से पहले नदियों की क्या हालत थी। उनका पानी की गुणवत्ता कितनी थी। इस पर नजर रखने तथा ग्राफ तैयार करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।
नगरायुक्त ने बनाई समन्वय समिति
नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह की ओर से समन्वय समिति बनाई गई है। समिति में सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम के अधिकारियों के अलावा पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढौली कदीम और बलियाखेड़ी के बीडीओ शामिल हैं।
- पांवधोई, ढमोला और नागदेई नदियों को साफ करने के साथ ही उनमें जल स्तर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। शिवालिक क्षेत्र में रिचार्जिंग प्वाइंट्स को विकसित किया जाना है, जिसके लिए ग्राम सभाएं और कई विभाग मिलकर काम करेंगे।
डॉ. उमर सैफ, कोर्डिनेटर।