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श्राद्ध निमंत्रण लेने से कतरा रहे है पंडित जी
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बड़गांव (सहारनपुर)। कोरोना संक्रमण काल का असर पितृ पक्ष यानि श्राद्ध पर दिख रहा है। इस दौरान पंडित श्राद्ध का निमंत्रण लेने से बचते नजर आ रहे हैं। इसके चलते यजमानों को पंडित जी की तलाश में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोरोना काल का असर जहां अधिकांश त्योहारों पर पड़ा है तो वहीं श्राद्ध पक्ष भी इससे अछूता नहीं रहा है। कोरोना काल में पंडित जी इस बार यजमानों के घरों में श्राद्ध के भोजन का निमंत्रण लेने से हिचक रहे हैं। अधिकांश पंडित केवल उन्हीं यजमानों के घर भोज करने आ जा रहे जहां उनका पुराना आना जाना है। इतना ही नहीं इस बार पंडित जी अपने यजमान परिवार से पहले यह पूछ रहे है कि उनके घर कोई बीमार तो नहीं ंहै। इसके बाद ही अपने पुराने यजमानों का निमंत्रण स्वीकार कर रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो पंडितों की कमी पहले से ही है, लेकिन कोरोना काल के चलते यह परिस्थिति और ज्यादा विकट हो गई है।
पंडित बृजमोहन शर्मा, मुकेश कुमार शर्मा, विनोद कुमार शर्मा, निक्की शर्मा, बशेश्वर शर्मा, अनमोल शर्मा आदि का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में विकल्प के तौर पर यदि पंडित उपलब्ध नहीं है तो श्राद्ध के भोजन को सर्वप्रथम थोड़ा सा अग्नि में समर्पित करें बाकि के भोजन को गाय को खिलवा दें। यदि यह भी संभव नहीं हो पाये तो किसी भूखे बेसहारा मनुष्य को भोजन कराना अच्छा रहेगा। इसके बाद गो ग्रास निकालें।
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कोरोना काल का असर जहां अधिकांश त्योहारों पर पड़ा है तो वहीं श्राद्ध पक्ष भी इससे अछूता नहीं रहा है। कोरोना काल में पंडित जी इस बार यजमानों के घरों में श्राद्ध के भोजन का निमंत्रण लेने से हिचक रहे हैं। अधिकांश पंडित केवल उन्हीं यजमानों के घर भोज करने आ जा रहे जहां उनका पुराना आना जाना है। इतना ही नहीं इस बार पंडित जी अपने यजमान परिवार से पहले यह पूछ रहे है कि उनके घर कोई बीमार तो नहीं ंहै। इसके बाद ही अपने पुराने यजमानों का निमंत्रण स्वीकार कर रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो पंडितों की कमी पहले से ही है, लेकिन कोरोना काल के चलते यह परिस्थिति और ज्यादा विकट हो गई है।
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पंडित बृजमोहन शर्मा, मुकेश कुमार शर्मा, विनोद कुमार शर्मा, निक्की शर्मा, बशेश्वर शर्मा, अनमोल शर्मा आदि का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में विकल्प के तौर पर यदि पंडित उपलब्ध नहीं है तो श्राद्ध के भोजन को सर्वप्रथम थोड़ा सा अग्नि में समर्पित करें बाकि के भोजन को गाय को खिलवा दें। यदि यह भी संभव नहीं हो पाये तो किसी भूखे बेसहारा मनुष्य को भोजन कराना अच्छा रहेगा। इसके बाद गो ग्रास निकालें।
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