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वसूली नोटिस वापस लेने के सुप्रीम कोर्ट का आदेश सराहनीयः मौलाना अरशद मदनी
Sat, 19 Feb 2022 07:12 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 19 Feb 2022 07:12 PM IST
सार
उन्होंने कहा कि मेरठ सहित देश के अन्य शहरों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए थे। जिसमें सैकड़ों लोगों के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने के आदेश किए गए थे।
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मौलाना सैयद अरशद मदनी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ प्रदेश सरकार द्वारा जारी वसूली नोटिसों को वापस लिए जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसला का स्वागत किया है।
शनिवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जनता में अदालतों के प्रति विश्वास को ओर मजबूत किया है। उम्मीद है कि जिन लोगों पर सीएए व एनआरसी के विरोध को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए थे। उन्हें भी जल्द ही वापस ले लिया जाएगा।
यह भी पढ़ें: अहमदाबाद ब्लास्ट केस : मौलाना अरशद मदनी बोले-हाईकोर्ट से सजा कम करने की उम्मीद, खटखटाएंगे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
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उन्होंने कहा कि मेरठ सहित देश के अन्य शहरों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए थे। जिसमें सैकड़ों लोगों के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने के आदेश किए गए थे। जिसके बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ऐसे मामलों की परैवी भी की थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा वसूली नोटिस को वापस लिए के संबंध में लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। मौलाना मदनी ने कहा कि अब मुसीबतों के दरवाजे बंद होना शुरु हो गए हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जनता में अदालतों को लेकर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
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शनिवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जनता में अदालतों के प्रति विश्वास को ओर मजबूत किया है। उम्मीद है कि जिन लोगों पर सीएए व एनआरसी के विरोध को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए थे। उन्हें भी जल्द ही वापस ले लिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि मेरठ सहित देश के अन्य शहरों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए थे। जिसमें सैकड़ों लोगों के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने के आदेश किए गए थे। जिसके बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद ने ऐसे मामलों की परैवी भी की थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा वसूली नोटिस को वापस लिए के संबंध में लिया गया फैसला स्वागत योग्य है। मौलाना मदनी ने कहा कि अब मुसीबतों के दरवाजे बंद होना शुरु हो गए हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जनता में अदालतों को लेकर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।