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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   One thousand acres of land in the district have been lost due to erosion by the Yamuna river.

Saharanpur News: यमुना के कटाव में समा गई जिले की एक हजार बीघा जमीन

Tue, 23 Sep 2025 12:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Tue, 23 Sep 2025 12:43 AM IST
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One thousand acres of land in the district have been lost due to erosion by the Yamuna river.
लखनौती क्षेत्र में यमुना नदी द्वारा किया गया कटाव। संवाद
बेहट/चिलकाना/लखनौती। पिछले दिनों यमुना नदी में हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए तीन लाख से अधिक क्यूसेक पानी ने तटवर्ती गांवों के किसानों के लिए तबाही और बर्बादी की ऐसी इबारत लिखी कि उनके जख्म भरने में अरसा लग जाएगा। बेहट, चिलकाना और लखनौती क्षेत्र की करीब एक हजार बीघा यमुना के कटाव की भेंट चढ़ गई। किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। जमीन तो गई ही, उस पर खड़ी फसल भी यमुना में बह गई। इस जमीन में गन्ने और पापुलर की खेती लहलहा रही थी। पेड़ कटवाकर बेटे-बेटियों की शादी, उनकी पढ़ाई, मकान की मरम्मत का सपना भी टूट गया।
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बेहट तहसील क्षेत्र के गांव जोधेबांस में ही करीब तीन सौ बीघा जमीन कटाव में बह गई। ईश्वरचंद की 20 बीघा तिल, पापुलर, भूलाल, सुरेशपाल की 15-15 बीघा गन्ना, पापुलर, जयपाल की आठ बीघा चारा, पापुलर, महीपाल की सात बीघा गन्ना, पापुलर, सर्वेश कांबाेज की 20 बीघा गन्ना व पापुलर की फसल जमीन सहित यमुना में बह गई।
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चिलकाना क्षेत्र में यमुना में आई बाढ़ से गांव टोडरपुर भूखड़ी में 140 बीघा जमीन कटाव में बह गई। गांव में मोहन की छह, विकास की सात, विक्रम सिंह की चार, सेठपाल की पांच, रघुवीर की सात, रमेश, जगपाल की छह-छह, अच्छे सिंह की 15 बीघा जमीन बही है। गाजदीनपुर, सौंधेबांस, आल्हणपुर, मझार, टापू आदि गांवों किसानों की भी पचास बीघा जमीन यमुना ने लील ली।
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लखनौती के सनौली, कुंडा कलां, दौलतपुर, बेगी, हलवाना, नाई मजरा आदि गांवों में पांच सौ बीघा से ज्यादा जमीन फसलों सहित यमुना में समा गई। इस जमीन पर गन्ने और उड़द की फसल खड़ी थी। कुंडा कलां के जब्बार उर्फ गोलू की 16, हाजी वकील की 20, साजिदा, मोहसिन, वसीम, शमशीर, सलीम की 36, इलियास की 10, अलिमू शाहनवाज की 10, मजीद, जिंदा और भोलर प्रधान के 20-20, तासीन की 30 और जब्बार की 16 बीघा जमीन यमुना में बह गई।
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-गांव जोधेबांस के ईश्वरचंद ने बताया कि इस बार तिल की फसल काफी अच्छी थी। पापुलर के पेड़ भी लगभग तैयार थे। सोचा था फसल और पेड़ बेचकर कृषि कार्ड का कर्ज चुका दूंगा, लेकिन सब बर्बाद हो गया।
-गांव जोधेबांस के सर्वेश कांबोज ने बताया कि पापुलर के पेड़ों की कीमत करीब पांच लाख लगी थी। पेड़ बेचकर बेटी की शादी करनी थी। बेटे की कोचिंग फीस भी देनी थी। जमीन भी गई और फसल के साथ पेड़ भी पानी अपने साथ बहा ले गया।

- गांव टोडरपुर भूखड़ी के सेठपाल ने बताया कि उसके पास मात्र आठ बीघा कृषि भूमि थी। यमुना में आई बाढ़ में पूरी जमीन और उस पर खड़े पापुलर के पेड तथा गन्ने की फसल भी यमुना में बह गई।
- गांव कुंडा कलां के मसरूर राणा का कहना है कि तीस बीघा जमीन सहित कटाव में बह गई। इस बार मकान बनाने की सोची थी, लेकिन सबकुछ खत्म हो गया।
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