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प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम: अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय पशुओं के आवागमन पर लगाई रोक, जानें- कब तक लागू है प्रतिबंध

Thu, 21 Sep 2023 05:26 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 21 Sep 2023 05:26 PM IST
सार

Saharanpur News : शहर के अलावा देहात में कई स्थानों पर पशु पैठ लगती हैं। इनमें दूसरों जिलों और राज्यों से बड़ी संख्या में पशु पहुंचते हैं। जिससे लंपी बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

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Ofiicer has imposed moratorium on inter-district and inter-state movement of animals till October 30
पशु पैठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर में पशुओं को लंपी स्किन बीमारी (एलएसडी) से बचाने के लिए प्रशासन अलर्ट है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए पशु हाट, पशु पैठ, अंतरराज्यीय और अंतरजनपदीय पशुओं को लाने व ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह रोक 31 अक्तूबर तक रहेगी। 

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जिले में शहर के अलावा देहात में कई स्थानों पर पशु पैठ लगती हैं। इनमें दूसरों जिलों और राज्यों से बड़ी संख्या में पशु पहुंचते हैं। इससे लंपी बीमारी का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। जिले में संचालित होने वाली सभी गोशालाओं में पशु पालन विभाग ने गोवंश का टीकाकरण करा दिया है। गांवों का टीकाकरण किया जा रहा है। इस बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए जिला पंचायत ने अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय पशुओं के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही पशु अनुज्ञा शुल्क वसूली, पशुपैठ संचालन के लिए लाइसेंस स्थगित किया गया। अगर इस अवधि में कोई पशु लेकर आता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि पशु पालकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतने की जरूरत है। बीमारी की रोकथाम के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। किसी भी पशु में लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत अपने नजदीक के पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुपालन विभाग के पास बीमार पशु के इलाज के लिए पशु चिकित्सक व दवाई उपलब्ध हैं।

गोवंश व भैंसों में फैलने वाला वायरस जनित रोग है लंपी 
लंपी स्किन डिजीज गोवंश एवं भैंसों में फैलने वाला वायरस जनित रोग है। इस बीमारी में पशुओं के शरीर पर गांठें बन जाती हैं और बाद में घाव बन जाते हैं। पशु को तेज बुखार आना, नाक व मुंह से पानी का गिरना, भूख कम लगना भी बीमारी के लक्षण है। बीमारी होने पर पशु चारा कम खाना शुरू कर देता है। बीमारी के फैलाने का सबसे मुख्य कारण मक्खी, मच्छर हैं। इनके अलावा पशुओं की लार, दूषित चारा और दूषित पानी से भी बीमारी फैलती है।

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क्या करें
-पशुपालक अपने बीमार गोवंश को बाहर चराने के लिए न लेकर जाएं।
-बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखें।
-मच्छर और मक्खी रोधी दवा का छिड़काव करें
- पशुओं के पास नीम और गूगल की पत्तियों का धुआं करें।
-बीमारी होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
-पशुओं के बाड़े को साफ सुथरा रखें।
-पशुओं को फिटकरी से दिन में दो बार नहलाएं।
-पशुओं में लक्षण दिखने पर बुखार की दवा दें।

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अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय पशुओं के आवागमन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही जिले में लगने वाली पशु पैठ पर भी 31 अक्तूबर तक प्रतिबंध लगाया गया है। अगर किसी ने पशुओं का आवागमन या फिर पशु पैठ लगाई तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। - बाबूराम, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

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