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नजूल की करोड़ों रुपये की संपत्ति बचाने में अधिकारी नाकाम
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कोर्ट रोड पर नजूल की जमीन व दुकानें
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। नगर निगम और जिला प्रशासन करोड़ों रुपये कीमत की नजूल की संपत्तियों को बचाने में नाकाम साबित हो रहा है। बीते डेढ़ साल में घंटाघर से कोर्ट रोड को जाने वाले मार्ग और घंटाघर से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर कई व्यावसायिक निर्माण नजूल की जमीनों पर हो चुके हैं। निर्माण करने वालों में कुछ नेता भी शामिल हैं। ऐसे में राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारी कार्रवाई करने से बचते रहे हैं।
नजूल की जमीनों पर कब्जों का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठकों में भी उठता रहा है। पार्षद अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा ने बोर्ड बैठक में घंटाघर के पास नजूल की जमीन पर व्यावसायिक निर्माण का मामला उठाया था। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने मंडलायुक्त से शिकायत करने की चेतावनी दी थी, लेकिन निगम की ओर से उक्त निर्माण को रुकवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी निर्माण की बगल में एक अन्य व्यक्ति ने भी नजूल की भूमि पर शोरूम बनाकर तैयार कर दिया है। पार्षदों ने मामले में नगर निगम से लेकर विकास प्राधिकरण से भी शिकायत की थी, जिसके बाद निर्माण कुछ समय के लिए रुकवा दिया गया था, लेकिन निर्माणकर्ता ने रात में लिंटर डालकर निर्माण को पूर्ण कर लिया था। यह भी मामला कार्यकारिणी समिति की बैठक में मार्च 2021 में उठाया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
नोटिस भेजकर शांत हो गया निगम
अमर उजाला ने नजूल की संपत्तियों पर अवैध कब्जों और नियम विरुद्ध निर्माणों का मामला प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था, जिसके बाद नगर निगम की ओर से संबंधित पांच लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस भेजकर जमीन पर स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसके बाद मामला शांत हो गया।
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संपत्ति की फाइलें तक गायब कर दी गईं
नजूल की संपत्तियों पर अवैैध कब्जों की शिकायतें लगातार होती रही हैं, लेकिन मामले को हमेशा दबा दिया जाता है। दिसंबर 2021 में तो शिकायत के बाद एक संपत्ति की फाइल तक गायब कर दी गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन की ओर से तीन अधिकारियों की समिति बनाकर जांच करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।
दो लाख 56 हजार वर्ग मीटर है भूमि
शहर में नजूल की कुल भूमि 2,56,000 (दो लाख 56 हजार) वर्ग मीटर है। इसमें ज्यादातर जमीन घंटाघर से रेलवे रोड पर और घंटाघर से कोर्ट रोड पर है। इसमें से कुछ जमीनें पूर्व में फ्री होल्ड भी कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा 50,000 वर्ग मीटर भूमि धोबीवाला में है, जिस पर तालाब है। यहां भी तालाब के चारों ओर कब्जे हो चुके हैं।
नजूल की संपत्तियों का ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर जाकर नजूल की भूमि पर हुए निर्माण की रिपोर्ट तैयार करने को कहा जा चुका है। चुनाव के बाद निगम जिला प्रशासन को साथ लेकर ऐसे लोगों पर सख्ती के साथ कार्रवाई करेगा।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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नजूल की जमीनों पर कब्जों का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठकों में भी उठता रहा है। पार्षद अभिषेक उर्फ टिंकू अरोड़ा ने बोर्ड बैठक में घंटाघर के पास नजूल की जमीन पर व्यावसायिक निर्माण का मामला उठाया था। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने मंडलायुक्त से शिकायत करने की चेतावनी दी थी, लेकिन निगम की ओर से उक्त निर्माण को रुकवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी निर्माण की बगल में एक अन्य व्यक्ति ने भी नजूल की भूमि पर शोरूम बनाकर तैयार कर दिया है। पार्षदों ने मामले में नगर निगम से लेकर विकास प्राधिकरण से भी शिकायत की थी, जिसके बाद निर्माण कुछ समय के लिए रुकवा दिया गया था, लेकिन निर्माणकर्ता ने रात में लिंटर डालकर निर्माण को पूर्ण कर लिया था। यह भी मामला कार्यकारिणी समिति की बैठक में मार्च 2021 में उठाया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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नोटिस भेजकर शांत हो गया निगम
अमर उजाला ने नजूल की संपत्तियों पर अवैध कब्जों और नियम विरुद्ध निर्माणों का मामला प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था, जिसके बाद नगर निगम की ओर से संबंधित पांच लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस भेजकर जमीन पर स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था, लेकिन उसके बाद मामला शांत हो गया।
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संपत्ति की फाइलें तक गायब कर दी गईं
नजूल की संपत्तियों पर अवैैध कब्जों की शिकायतें लगातार होती रही हैं, लेकिन मामले को हमेशा दबा दिया जाता है। दिसंबर 2021 में तो शिकायत के बाद एक संपत्ति की फाइल तक गायब कर दी गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन की ओर से तीन अधिकारियों की समिति बनाकर जांच करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।
दो लाख 56 हजार वर्ग मीटर है भूमि
शहर में नजूल की कुल भूमि 2,56,000 (दो लाख 56 हजार) वर्ग मीटर है। इसमें ज्यादातर जमीन घंटाघर से रेलवे रोड पर और घंटाघर से कोर्ट रोड पर है। इसमें से कुछ जमीनें पूर्व में फ्री होल्ड भी कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा 50,000 वर्ग मीटर भूमि धोबीवाला में है, जिस पर तालाब है। यहां भी तालाब के चारों ओर कब्जे हो चुके हैं।
नजूल की संपत्तियों का ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर जाकर नजूल की भूमि पर हुए निर्माण की रिपोर्ट तैयार करने को कहा जा चुका है। चुनाव के बाद निगम जिला प्रशासन को साथ लेकर ऐसे लोगों पर सख्ती के साथ कार्रवाई करेगा।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।