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नगर निगम की जमीन पर कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 11 Jul 2016 12:14 AM IST
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नोटिस के बाद भी नगर निगम की जमीन पर कब्जा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में अफसरों की अनदेखी या फिर यह कहें कि मिलीभगत से नगर निगम की करोड़ों रुपये की कीमत की जमीनें भूमाफिया के कब्जे में हैं। ताजा मामला राकेश टाकिज के पीछे बने कांशीराम आवास के पास पड़ी जमीन का है, जिसपर लोगों ने अस्थाई कब्जा कर लिया है।
नगर निगम कई जगहों पर अपनी बेशकीमती जमीनें गवा चुका है, जिसे लेकर अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। कांशीराम आवास के पास नगर निगम की करोड़ों रुपये की कीमत की जमीन है।
इस जमीन पर नगर निगम ने अपना बोर्ड लगाया हुआ है, जिस पर लिखा है कि यह जमीन नगर निगम की है, जिसपर अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है। इस चेतावनी के बावजूद इस जमीन पर वर्षों से अस्थाई अतिक्रमण है।
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प्रतिदिन अनेक ट्रक और अन्य वाहन इस जमीन पर खड़े होते हैं। वर्तमान में इस भूमि पर बड़े-बड़े गार्डर रखे हुए हैं। बताया गया है कि आसपास के लोगों ने जमीन के कुछ हिस्से पर स्थाई अतिक्रमण भी कर लिया है। नगर निगम की जमीन पर कब्जा होने का यह पहला मामला नहीं है।
इससे पहले भी नगर निगम के अफसरों की लापरवाही के चलते करोड़ों की जमीनों पर कब्जे होते रहे हैं। पिछले वर्ष मल्हीपुर रोड पर स्थित नगर निगम की जमीन पर एक सपा नेता के करीबी ने पक्की बाउंड्री वॉल कराकर मकान बन लिया था।
नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन नेता के सामने उनकी एक न चली थी, जिसके बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा था। निगम अफसरों ने निगम की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कोतवाली सदर बाजार में मुकदमा दर्ज कराने की बात कही थी, मगर उसके बाद मामला शांत हो गया।
अब संबंधित अफसरों का कहना है कि जिस जमीन को वह नगर निगम की मान रहे थे। दरअसल वह उसी व्यक्ति की है। ऐसे में नगर निगम के अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है, जो पहले तो जमीन को अपनी बताकर एफआईआर दर्ज कराने की बात कहते हैं और बाद में भूमाफिया की बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यदि नए मामले में भी निगम का यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब इस जमीन पर भी भूमाफियाओं का कब्जा होगा।
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नगर निगम कई जगहों पर अपनी बेशकीमती जमीनें गवा चुका है, जिसे लेकर अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। कांशीराम आवास के पास नगर निगम की करोड़ों रुपये की कीमत की जमीन है।
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इस जमीन पर नगर निगम ने अपना बोर्ड लगाया हुआ है, जिस पर लिखा है कि यह जमीन नगर निगम की है, जिसपर अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है। इस चेतावनी के बावजूद इस जमीन पर वर्षों से अस्थाई अतिक्रमण है।
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प्रतिदिन अनेक ट्रक और अन्य वाहन इस जमीन पर खड़े होते हैं। वर्तमान में इस भूमि पर बड़े-बड़े गार्डर रखे हुए हैं। बताया गया है कि आसपास के लोगों ने जमीन के कुछ हिस्से पर स्थाई अतिक्रमण भी कर लिया है। नगर निगम की जमीन पर कब्जा होने का यह पहला मामला नहीं है।
इससे पहले भी नगर निगम के अफसरों की लापरवाही के चलते करोड़ों की जमीनों पर कब्जे होते रहे हैं। पिछले वर्ष मल्हीपुर रोड पर स्थित नगर निगम की जमीन पर एक सपा नेता के करीबी ने पक्की बाउंड्री वॉल कराकर मकान बन लिया था।
नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन नेता के सामने उनकी एक न चली थी, जिसके बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा था। निगम अफसरों ने निगम की जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कोतवाली सदर बाजार में मुकदमा दर्ज कराने की बात कही थी, मगर उसके बाद मामला शांत हो गया।
अब संबंधित अफसरों का कहना है कि जिस जमीन को वह नगर निगम की मान रहे थे। दरअसल वह उसी व्यक्ति की है। ऐसे में नगर निगम के अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है, जो पहले तो जमीन को अपनी बताकर एफआईआर दर्ज कराने की बात कहते हैं और बाद में भूमाफिया की बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यदि नए मामले में भी निगम का यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब इस जमीन पर भी भूमाफियाओं का कब्जा होगा।