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Saharanpur News: स्टेडियम में बाहरी प्रशिक्षकों का कब्जा
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सहारनपुर का स्टेडियम
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। डॉ. आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में एथलेटिक्स के बाहरी प्रशिक्षकों का कब्जा है। वह स्टेडियम के पंजीकृत प्रशिक्षुओं तक से मासिक वसूली कर रहे हैं। सब कुछ जानते हुए भी स्टेडियम के अधिकारी बेबस हैं। उक्त कथित प्रशिक्षक कईं बार उनके विरुद्ध हंगामा कर चुके हैं।
स्टेडियम में करीब छह माह से एथलेटिक्स का प्रशिक्षक नहीं है। यहां संदीप कुमार रंधावा की तैनाती थी। वह करीब छह महीने पहले छोड़कर चले गए। उनके बाद नए प्रशिक्षक की यहां तैनाती नहीं हुई है। इसकी वजह से स्टेडियम में एथलेटिक्स के सैकड़ों खिलाड़ियों का प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है। बाहरी कोच इसी का फायदा उठा रहे हैं। प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले खिलाड़ियों ने स्टेडियम में सालाना शुल्क जमा किया हुआ है। इसके अतिरिक्त अन्य कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वहीं, बाहरी प्रशिक्षक तैयारी कराने के नाम पर हर महीने 250 रुपये से 300 रुपये वसूल रहे हैं, जो कि नियम विरुद्ध है। अधिकारी भी मानते हैं कि ऐसे लोगों की वजह से स्टेडियम में एंट्री पास की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। यदि किसी को बिना पास घुसने से रोका जाता है तो हंगामा होता है।
सेना-पुलिस भर्ती की तैयारी का सेंटर बना स्टेडियम
स्टेडियम में बड़ी संख्या में ऐसे युवक दौड़ लगाते मिल जाएंगे, जिनका स्टेडियम में पंजीकरण नहीं है। ये लोग बाहरी प्रशिक्षकों की शह पर स्टेडियम का इस्तेमाल कर सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। बीते करीब एक दशक से ऐसा हो रहा है। कथिक प्रशिक्षक तैयारी के नाम पर उनसे रकम वसूलते हैं। खास बात यह है कि बाहरी प्रशिक्षकों और युवकों के कारण स्टेडियम के संसाधन खराब हो रहे हैं। सात करोड़ की लागत से बना सिंथेटिक रनिंग ट्रैक का सबसे अधिक इस्तेमाल हो रहा है।
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स्टेडियम में बाहरी प्रशिक्षकों की सक्रियता लंबे समय से है। मौजूदा प्रशासन को भी इसकी जानकारी है। बीते दिनों हंगामे को लेकर अधिकारियों से बात हुई थी तब उनको बताया गया था। हम जिला प्रशासन के माध्यम से स्टेडियम में कोच की मांग कर रहे हैं, जिससे बाहरी प्रशिक्षकों की सक्रियता कम या खत्म हो सके।-काशी नरेश यादव, उप जिला क्रीड़ा अधिकारी
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स्टेडियम में करीब छह माह से एथलेटिक्स का प्रशिक्षक नहीं है। यहां संदीप कुमार रंधावा की तैनाती थी। वह करीब छह महीने पहले छोड़कर चले गए। उनके बाद नए प्रशिक्षक की यहां तैनाती नहीं हुई है। इसकी वजह से स्टेडियम में एथलेटिक्स के सैकड़ों खिलाड़ियों का प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है। बाहरी कोच इसी का फायदा उठा रहे हैं। प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले खिलाड़ियों ने स्टेडियम में सालाना शुल्क जमा किया हुआ है। इसके अतिरिक्त अन्य कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वहीं, बाहरी प्रशिक्षक तैयारी कराने के नाम पर हर महीने 250 रुपये से 300 रुपये वसूल रहे हैं, जो कि नियम विरुद्ध है। अधिकारी भी मानते हैं कि ऐसे लोगों की वजह से स्टेडियम में एंट्री पास की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। यदि किसी को बिना पास घुसने से रोका जाता है तो हंगामा होता है।
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सेना-पुलिस भर्ती की तैयारी का सेंटर बना स्टेडियम
स्टेडियम में बड़ी संख्या में ऐसे युवक दौड़ लगाते मिल जाएंगे, जिनका स्टेडियम में पंजीकरण नहीं है। ये लोग बाहरी प्रशिक्षकों की शह पर स्टेडियम का इस्तेमाल कर सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। बीते करीब एक दशक से ऐसा हो रहा है। कथिक प्रशिक्षक तैयारी के नाम पर उनसे रकम वसूलते हैं। खास बात यह है कि बाहरी प्रशिक्षकों और युवकों के कारण स्टेडियम के संसाधन खराब हो रहे हैं। सात करोड़ की लागत से बना सिंथेटिक रनिंग ट्रैक का सबसे अधिक इस्तेमाल हो रहा है।
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स्टेडियम में बाहरी प्रशिक्षकों की सक्रियता लंबे समय से है। मौजूदा प्रशासन को भी इसकी जानकारी है। बीते दिनों हंगामे को लेकर अधिकारियों से बात हुई थी तब उनको बताया गया था। हम जिला प्रशासन के माध्यम से स्टेडियम में कोच की मांग कर रहे हैं, जिससे बाहरी प्रशिक्षकों की सक्रियता कम या खत्म हो सके।-काशी नरेश यादव, उप जिला क्रीड़ा अधिकारी

स्टेडियम में अभ्यास करते खिलाड़ी- फोटो : SAHARANPUR

स्टेडियम का सिंथेटिक ट्रक- फोटो : SAHARANPUR