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Saharanpur News: ऑनलाइन गेम और रील का खुमार, फोन लेने पर हिंसक हो रहे बच्चे

Wed, 08 Apr 2026 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Wed, 08 Apr 2026 01:35 AM IST
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Obsessed with Online Games and Reels, Children Turn Violent When Phones Are Taken Away
सहारनपुर। भले ही मोबाइल फोन आज की जरूरत बन गया हो, लेकिन इसका अधिक इस्तेमाल बच्चों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब कर रही है। ऑनलाइन गेम और रील का खुमार बच्चों को हिंसक बना रहा है। मोबाइल फोन छीनने अभिभावकों के सामने चुनौती बनकर उभर रहा है। इसकी तस्दीक जिला अस्पताल के मनकक्ष में आ रही शिकायत कर रही है।
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एसबीडी जिला अस्पताल में मनकक्ष संचालित है। इसकी ओपीडी सप्ताह में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खुलती है। ओपीडी में तनाव, मानसिक रोग से संबंधित मरीज आते हैं। मनकक्ष में ऐसे भी कई अभिभावक आ रहे हैं, जिनके लाडले खाना खाते, सीढ़ी चढ़ते, पैदल चलाते समय रील देख रहे हैं। उनको मोबाइल फोन से दूरी रखने की सलाह दी जा रही है। मनकक्ष के साइकोलॉजिस्ट देवेंद्र सिंह का कहना है कि ओपीडी में औसतन 75 से 80 मरीज आते हैं। इलाज के अनुसार काउंसिलिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि अभिभावक अपने बच्चों से मोबाइल फोन चलाने की लत को धीरे-धीरे कम करें। उन्हें समझाए कि ज्यादा देर तक मोबाइल देखने से आंखें खराब हो सकती हैं। काउंसिलिंग में भी उन्हें यहीं बताया जाता है।
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-- बेटे को लग गई थी पबजी गेम खेलने की आदत
पुवांरका निवासी रेखा के बेटे को पबजी गेम खेलने की आदत लग गई थी। वह खाना खाते समय भी गेम खेलता रहता था। इसके साथ रात में सोते समय भी बोलने लगा था। व्यवहार में भी बदलाव आ गया था। मोबाइल लेने पर गुस्सा करने लगा था। बेटे की हरकतों को देखकर वह जिला अस्पताल के मनकक्ष में पहुंचीं। यहां दो बार काउंसिलिंग हुई। तीसरी बार की काउंसिलिंग में सुधार हुआ।
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-- रील और गेम की दुनिया से दूर रखें
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुमन तिवारी बताते हैं कि बच्चों को रील और गेम की दुनिया से दूर रखें। वह मोबाइल फोन से दूरी बर्दाश्त नहीं करते। वह या तो अवसाद में जाते या हिंसक होते हैं। बच्चों को नहीं पता होता कि मोबाइल फोन देखना कितना घातक है। इसके अलावा उन्हें यह भी जानकारी नहीं होती है कि वह क्या देख रहे हैं।
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-- यह बरतें सावधानी
- बच्चों के सामने अभिभावक भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करें।
- मोबाइल के बजाय उन्हें क्रिकेट, बैडमिंटन या फिर अन्य खेल खिलाएं।
- संगीत, पेंटिंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें।
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