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Saharanpur News: छह माह बीतने के बाद विकसित नहीं हो सकीं नर्सरी
Sun, 12 Mar 2023 12:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 12 Mar 2023 12:09 AM IST
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सहारनपुर। जिले की ग्राम पंचायतों में छह माह बाद भी नर्सरी विकसित नहीं हो पाई हैं, जबकि इन नर्सरियों को विकसित कर स्वयं सहायता समूहों को रोजगार देने का उद्देश्य है। ग्राम पंचायतों में नर्सरियों के लिए भूमि ही नहीं मिल पाई।
जिले की ग्राम पंचायतों में जिला पंचायत राज विभाग की ओर से नर्सरियां विकसित जानी है। इसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को नर्सरी विकसित जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, जिला उद्यान विभाग की ओर से स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न प्रजाति की पौध तैयार करने के लिए निशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन छह माह बाद भी एक भी नर्सरी विकसित नहीं हुई है। ग्राम पंचायतों में नर्सरियों के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में योजना धरातल पर नहीं उतरी है।
इन सभी नर्सरी से तैयार होने वाली पौध को बेचे जाने पर होने वाला मुनाफा भी स्वयं सहायता समूहों को ही मिलना था और मनरेगा के तहत उनको कार्य का पैसा भी मिलता। वहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा का कहना है कि भूमि की तलाश के लिए सर्वे कराया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में ही नर्सरी बनाने के लिए जल्द भूमि मिल जाएगी।
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यह पौध होनी थी तैयार
नर्सरी में स्वयं सहायता समूहों द्वारा आम, अमरूद, नींबू, लीची, आडू, शहतूत, चीकू, बरगद, गेंदा, गुलाब, सदाबहार, सूरजमुखी, चमेली का फूल सहित अनेक तरह की पौध तैयार जानी थी। पहले चरण में 31 नर्सरियां विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई थी। मगर, एक भी नर्सरी विकसित नहीं हो पाई है।
स्वयं सहायता समूहों को नर्सरी विकसित किए जाने के कार्य जोड़ना है। संबंधित विभाग भूमि उपलब्ध कराए तो स्वयं सहायता समूहों के सदस्य कार्य शुरू करेंगे। -बलराम कुमार, डीसी मनरेगा
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जिले की ग्राम पंचायतों में जिला पंचायत राज विभाग की ओर से नर्सरियां विकसित जानी है। इसके तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को नर्सरी विकसित जाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, जिला उद्यान विभाग की ओर से स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न प्रजाति की पौध तैयार करने के लिए निशुल्क बीज उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन छह माह बाद भी एक भी नर्सरी विकसित नहीं हुई है। ग्राम पंचायतों में नर्सरियों के लिए भूमि ही उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में योजना धरातल पर नहीं उतरी है।
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इन सभी नर्सरी से तैयार होने वाली पौध को बेचे जाने पर होने वाला मुनाफा भी स्वयं सहायता समूहों को ही मिलना था और मनरेगा के तहत उनको कार्य का पैसा भी मिलता। वहीं, जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा का कहना है कि भूमि की तलाश के लिए सर्वे कराया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में ही नर्सरी बनाने के लिए जल्द भूमि मिल जाएगी।
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यह पौध होनी थी तैयार
नर्सरी में स्वयं सहायता समूहों द्वारा आम, अमरूद, नींबू, लीची, आडू, शहतूत, चीकू, बरगद, गेंदा, गुलाब, सदाबहार, सूरजमुखी, चमेली का फूल सहित अनेक तरह की पौध तैयार जानी थी। पहले चरण में 31 नर्सरियां विकसित किए जाने की योजना तैयार की गई थी। मगर, एक भी नर्सरी विकसित नहीं हो पाई है।
स्वयं सहायता समूहों को नर्सरी विकसित किए जाने के कार्य जोड़ना है। संबंधित विभाग भूमि उपलब्ध कराए तो स्वयं सहायता समूहों के सदस्य कार्य शुरू करेंगे। -बलराम कुमार, डीसी मनरेगा