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इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या घटी
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सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए अब मारामारी की स्थिति नहीं है। 15 दिन पहले की तुलना में अब कम मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इससे चिकित्सकों और स्टाफ को भी राहत है। जिस इमरजेंसी वार्ड का बरामदा तक 15 दिन पहले बेंचों पर लिटाए गए मरीजों से फुल था, सोमवार को उसके दस बेड के वार्ड में भी एक बेड खाली मिला, जो राहत की बात है।
बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने 17 अप्रैल से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दी थी, मगर इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने के आदेश दिए थे। ओपीडी बंद होने के बाद सारा बोझ इमरजेंसी वार्ड पर आ गया था। एक ओर ओपीडी बंद और दूसरा कोरोना महामारी। ऐसी स्थिति में एक-एक दिन में 300 से अधिक तक मरीज इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंच रहे थे। आलम यह था कि एक दिन में 100 मरीजों तक को भर्ती करना पड़ रहा था। ज्यादातर मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की शिकायत थी। ऐसी स्थिति में अस्पताल की ऑक्सीजन व्यवस्था कम पड़ती नजर आ रही थी। सीएमएस को ऑक्सीजन के लिए सीएमओ को भी पत्र लिखना पड़ा था। वार्ड के बेड कम पड़ गए थे। ऐसे में मरीजों केे इमरजेंसी वार्ड के बरामदे में बेंचों पर लिटाकर इलाज दिया जा रहा था। मगर अब ऐसे हालात नहीं हैं। करीब एक सप्ताह से इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार कम हुई है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने बताया कि 15 दिन पहले की तुलना में अब 50 फीसदी यानी करीब 150 मरीज ही प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। ज्यादातर को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
नौ में से सात ऑक्सीजन पर
इमरजेंसी वार्ड दस बेड का है। सोमवार की दोपहर 12 बजे दस में से नौ बेड पर मरीज भर्ती थे। खास बात यह रही कि नौ में से सात मरीज ऑक्सीजन पर थे। यानी उनको ऑक्सीजन सिलिंडर लगा था। चिकित्सक ने बताया कि यह मरीज कोरोना के नहीं हैं, मगर सांस की समस्या के चलते ऑक्सीजन दिया गया है।
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सप्ताह भर पहले तक करीब एक महीना ऐसा बीता, जब इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की भरमार रही। अब ऐसा नहीं है। धीरे-धीरे बीमारों की संख्या कम हो रही है। इमरजेंसी वार्ड में भी तमाम व्यवस्थाएं चाकचौबंद हैं।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।
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बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने 17 अप्रैल से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दी थी, मगर इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने के आदेश दिए थे। ओपीडी बंद होने के बाद सारा बोझ इमरजेंसी वार्ड पर आ गया था। एक ओर ओपीडी बंद और दूसरा कोरोना महामारी। ऐसी स्थिति में एक-एक दिन में 300 से अधिक तक मरीज इलाज के लिए इमरजेंसी वार्ड पहुंच रहे थे। आलम यह था कि एक दिन में 100 मरीजों तक को भर्ती करना पड़ रहा था। ज्यादातर मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की शिकायत थी। ऐसी स्थिति में अस्पताल की ऑक्सीजन व्यवस्था कम पड़ती नजर आ रही थी। सीएमएस को ऑक्सीजन के लिए सीएमओ को भी पत्र लिखना पड़ा था। वार्ड के बेड कम पड़ गए थे। ऐसे में मरीजों केे इमरजेंसी वार्ड के बरामदे में बेंचों पर लिटाकर इलाज दिया जा रहा था। मगर अब ऐसे हालात नहीं हैं। करीब एक सप्ताह से इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार कम हुई है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने बताया कि 15 दिन पहले की तुलना में अब 50 फीसदी यानी करीब 150 मरीज ही प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। ज्यादातर को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है।
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नौ में से सात ऑक्सीजन पर
इमरजेंसी वार्ड दस बेड का है। सोमवार की दोपहर 12 बजे दस में से नौ बेड पर मरीज भर्ती थे। खास बात यह रही कि नौ में से सात मरीज ऑक्सीजन पर थे। यानी उनको ऑक्सीजन सिलिंडर लगा था। चिकित्सक ने बताया कि यह मरीज कोरोना के नहीं हैं, मगर सांस की समस्या के चलते ऑक्सीजन दिया गया है।
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सप्ताह भर पहले तक करीब एक महीना ऐसा बीता, जब इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की भरमार रही। अब ऐसा नहीं है। धीरे-धीरे बीमारों की संख्या कम हो रही है। इमरजेंसी वार्ड में भी तमाम व्यवस्थाएं चाकचौबंद हैं।
डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।