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Saharanpur News: अब बच्चे बन रहे पिता के डिजिटल गुरु
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फादर्स-डे- अमित पंकज
फादर्स-डे
- डिजिटल युग में अब बच्चे अपने पिता के तकनीकी मार्गदर्शक बन रहे
- बेटे-बेटियां पिता को स्मार्टफोन, ऑनलाइन पेमेंट व सोशल मीडिया चलाना सिखा रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एक समय था जब पिता अपने बच्चों को जीवन की हर नई चीज सिखाते थे। साइकिल चलाने से लेकर दुनिया की समझ देने तक, हर कदम पर मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे, लेकिन डिजिटल दौर में कई घरों में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अब बेटे-बेटियां अपने पिता को स्मार्टफोन चलाने, ऑनलाइन भुगतान करने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की बारीकियां सिखा रहे हैं।
अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जब पिता मोबाइल स्क्रीन दिखाते हुए पूछते हैं। बेटा! यह क्यूआर कोड कैसे स्कैन होता है? या फिर यह मैसेज कहीं फर्जी तो नहीं है? तकनीक के तेजी से बढ़ते दायरे ने नई पीढ़ी और अभिभावकों के बीच तकनीकी समझ का अंतर स्पष्ट कर दिया है। हालांकि यह अंतर रिश्तों में दूरी नहीं, बल्कि नई तरह की साझेदारी पैदा कर रहा है। बच्चे धैर्य के साथ अपने पिता को डिजिटल दुनिया की जानकारी दे रहे हैं, वहीं पिता भी नई तकनीक को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
- गोविंद विहार निवासी पंकज नामदेव ने बताया कि पहले वह अपने बच्चों को नई-नई बातें सिखाते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। ऑनलाइन भुगतान कैसे करना है या किसी एप्लीकेशन का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है यह मेरे बच्चों ने मुझे सिखाया है।
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- हसनपुर चुंगी निवासी अमित पंकज ने बताया कि मोबाइल पर आने वाले किसी अनजान मैसेज या लिंक को लेकर अक्सर संदेह रहता है। एक बार ठगी का शिकार होते-होते बचा। बच्चों ने एनवक्त पर आकर बताया कि यह लिंक फर्जी है। इस पर क्लिक नहीं करना।
- नितिन चौधरी ने बताया कि शुरुआत में ऑनलाइन भुगतान और क्यूआर कोड स्कैन करना मुश्किल था। जब भी कोई परेशानी आती है, तो बच्चों से सलाह लेता हूं। अब बच्चों की मदद से कई डिजिटल सेवाओं को आसानी से उपयोग कर लेता हूं।
- शारदा नगर निवासी विजय कुमार ने बताया कि तकनीक तेजी से बदल रही है। हर नई जानकारी को समझना आसान नहीं होता। ऐसे में बच्चे सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल सुविधाओं की जानकारी देते हैं। नई तकनीक अपनाने में काफी मदद मिल रही है।
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- डिजिटल युग में अब बच्चे अपने पिता के तकनीकी मार्गदर्शक बन रहे
- बेटे-बेटियां पिता को स्मार्टफोन, ऑनलाइन पेमेंट व सोशल मीडिया चलाना सिखा रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एक समय था जब पिता अपने बच्चों को जीवन की हर नई चीज सिखाते थे। साइकिल चलाने से लेकर दुनिया की समझ देने तक, हर कदम पर मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे, लेकिन डिजिटल दौर में कई घरों में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अब बेटे-बेटियां अपने पिता को स्मार्टफोन चलाने, ऑनलाइन भुगतान करने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की बारीकियां सिखा रहे हैं।
अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जब पिता मोबाइल स्क्रीन दिखाते हुए पूछते हैं। बेटा! यह क्यूआर कोड कैसे स्कैन होता है? या फिर यह मैसेज कहीं फर्जी तो नहीं है? तकनीक के तेजी से बढ़ते दायरे ने नई पीढ़ी और अभिभावकों के बीच तकनीकी समझ का अंतर स्पष्ट कर दिया है। हालांकि यह अंतर रिश्तों में दूरी नहीं, बल्कि नई तरह की साझेदारी पैदा कर रहा है। बच्चे धैर्य के साथ अपने पिता को डिजिटल दुनिया की जानकारी दे रहे हैं, वहीं पिता भी नई तकनीक को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
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- गोविंद विहार निवासी पंकज नामदेव ने बताया कि पहले वह अपने बच्चों को नई-नई बातें सिखाते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। ऑनलाइन भुगतान कैसे करना है या किसी एप्लीकेशन का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है यह मेरे बच्चों ने मुझे सिखाया है।
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- हसनपुर चुंगी निवासी अमित पंकज ने बताया कि मोबाइल पर आने वाले किसी अनजान मैसेज या लिंक को लेकर अक्सर संदेह रहता है। एक बार ठगी का शिकार होते-होते बचा। बच्चों ने एनवक्त पर आकर बताया कि यह लिंक फर्जी है। इस पर क्लिक नहीं करना।
- नितिन चौधरी ने बताया कि शुरुआत में ऑनलाइन भुगतान और क्यूआर कोड स्कैन करना मुश्किल था। जब भी कोई परेशानी आती है, तो बच्चों से सलाह लेता हूं। अब बच्चों की मदद से कई डिजिटल सेवाओं को आसानी से उपयोग कर लेता हूं।
- शारदा नगर निवासी विजय कुमार ने बताया कि तकनीक तेजी से बदल रही है। हर नई जानकारी को समझना आसान नहीं होता। ऐसे में बच्चे सोशल मीडिया, मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल सुविधाओं की जानकारी देते हैं। नई तकनीक अपनाने में काफी मदद मिल रही है।

फादर्स-डे- अमित पंकज

फादर्स-डे- अमित पंकज

फादर्स-डे- अमित पंकज