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खुद तो टीका लगवाया ही, परिजनों और साथियों को भी किया प्रेरित
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जिला अस्पताल का टीका वार्ड
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कोविड वैक्सीन का टीका लगवाने को लेकर एक ओर जहां 12 से 14 वर्ष के किशोरों की गति धीमी है, वहीं 15 से 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के किशोरों और युवाओं में अनेक ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने ना केवल खुद टीकाकरण केंद्र पहुंचकर टीका लगवाया, बल्कि टीके को लेकर भ्रमित परिजनों और अपने साथियों को भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया और आज भी कर रहे हैं। हमने ऐसे ही युवाओं और किशोरों को लिया है। पेश है रिपोर्ट...
जिंदगी अनमोल है इसकी कीमत समझें
भगवती कॉलोनी निवासी पार्थ माहेश्वरी कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके हैं। पार्थ ने बताया कि वह फैमिली ऑफ ब्लड डोनर्स ट्रस्ट से जुड़े हैं। कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने मरीजों की मदद की, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों की जान को बचाया नहीं जा सका। चूंकि उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही को बेहद करीब से देखा। ऐसे में वह कोरोना के खतरे और जिंदगी के महत्व को समझते है। पार्थ ने बताया कि वह लगातार लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करते आ रहे हैं।
दोस्तों का भ्रम दूर कर टीका लगवाया
बाजोरिया रोड स्थित प्रकाश पुरम निवासी दक्षी रामपाल छात्रा हैं। दक्षी का कहना है कि भारत एकलौता ऐसा देश है, जहां सरकार जनता को मुफ्त में टीका उपलब्ध करा रही है। शायद यही वजह है कि कुछ लोग इसकी कीमत नहीं समझ रहे हैं। दक्षी का कहना है कि उसकी कई दोस्त शुरुआत में टीके को लेकर भ्रम में थे, जो इसके दुष्प्रभाव की बात कह रहे थे। लेकिन उसने दोनों टीक लगवाए, जिसके बाद भ्रमित साथियों को प्रेरित किया। आज उसका कोई भी ऐसा साथी नहीं है, जिसने वैक्सीन की दोनों खुराक ना ली हों।
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मटिया महल निवासी 17 वर्षीय अविरल कक्षा 12 के छात्र हैं। अविरल ने बताया कि सरकार ने जब 15 से 18 आयु वालों की टीकाकरण शुरू किया था तो उन्होंने तभी टीका लगवाने का मन बना लिया था। क्योंकि दादी, पापा और मां पहले ही टीका लगवा रहे थ्ज्ञे। ऐसे में उन्होंने टीका लगवाने में देर नहीं की। अविरल ने बताया कि उसे दोनों टीके काफी पहले लग चुके हैं और वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। ऐसे में लोगों को टीके को लेकर किसी भी तरह का वहम दिमाग से निकाल देना चाहिए और टीका लगवाना चाहिए।
पेपर मिल रोड स्थित अंजनी विहार कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय आदित्य कुमार गौतम ने बताया कि उनके पापा कोरोना से संक्रमित हुए थे। उस समय कोरोना को लेकर लोगों में भय बना हुआ था। पापा अलग कमरे में आइसोलेट थे। घर का हर सदस्य डरा हुआ था और मन में खराब विचार आ रहे थे। लेकिन पापा ने कोरोना को मात दी। लेकिन उस दौरान उन्होंने कोरोना के डर को महसूस किया। इसीलिए उसने और उसके परिजनों ने टीका लगवाने में देर नहीं की। पूरा परिवार दोनों खुराक ले चुका है।
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जिंदगी अनमोल है इसकी कीमत समझें
भगवती कॉलोनी निवासी पार्थ माहेश्वरी कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके हैं। पार्थ ने बताया कि वह फैमिली ऑफ ब्लड डोनर्स ट्रस्ट से जुड़े हैं। कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने मरीजों की मदद की, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों की जान को बचाया नहीं जा सका। चूंकि उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर में मची तबाही को बेहद करीब से देखा। ऐसे में वह कोरोना के खतरे और जिंदगी के महत्व को समझते है। पार्थ ने बताया कि वह लगातार लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करते आ रहे हैं।
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दोस्तों का भ्रम दूर कर टीका लगवाया
बाजोरिया रोड स्थित प्रकाश पुरम निवासी दक्षी रामपाल छात्रा हैं। दक्षी का कहना है कि भारत एकलौता ऐसा देश है, जहां सरकार जनता को मुफ्त में टीका उपलब्ध करा रही है। शायद यही वजह है कि कुछ लोग इसकी कीमत नहीं समझ रहे हैं। दक्षी का कहना है कि उसकी कई दोस्त शुरुआत में टीके को लेकर भ्रम में थे, जो इसके दुष्प्रभाव की बात कह रहे थे। लेकिन उसने दोनों टीक लगवाए, जिसके बाद भ्रमित साथियों को प्रेरित किया। आज उसका कोई भी ऐसा साथी नहीं है, जिसने वैक्सीन की दोनों खुराक ना ली हों।
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मटिया महल निवासी 17 वर्षीय अविरल कक्षा 12 के छात्र हैं। अविरल ने बताया कि सरकार ने जब 15 से 18 आयु वालों की टीकाकरण शुरू किया था तो उन्होंने तभी टीका लगवाने का मन बना लिया था। क्योंकि दादी, पापा और मां पहले ही टीका लगवा रहे थ्ज्ञे। ऐसे में उन्होंने टीका लगवाने में देर नहीं की। अविरल ने बताया कि उसे दोनों टीके काफी पहले लग चुके हैं और वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। ऐसे में लोगों को टीके को लेकर किसी भी तरह का वहम दिमाग से निकाल देना चाहिए और टीका लगवाना चाहिए।
पेपर मिल रोड स्थित अंजनी विहार कॉलोनी निवासी 18 वर्षीय आदित्य कुमार गौतम ने बताया कि उनके पापा कोरोना से संक्रमित हुए थे। उस समय कोरोना को लेकर लोगों में भय बना हुआ था। पापा अलग कमरे में आइसोलेट थे। घर का हर सदस्य डरा हुआ था और मन में खराब विचार आ रहे थे। लेकिन पापा ने कोरोना को मात दी। लेकिन उस दौरान उन्होंने कोरोना के डर को महसूस किया। इसीलिए उसने और उसके परिजनों ने टीका लगवाने में देर नहीं की। पूरा परिवार दोनों खुराक ले चुका है।

दक्षि रामपाल।- फोटो : SAHARANPUR

आदित्य कुमार गौतम।- फोटो : SAHARANPUR

अविरल।- फोटो : SAHARANPUR

पार्थ माहेश्वरी- फोटो : SAHARANPUR