{"_id":"6a51473817da0053e00ebcf1","slug":"no-option-on-portal-to-remove-names-pm-samman-target-stuck-at-82-percent-saharanpur-news-c-30-1-sha1004-179305-2026-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: पोर्टल पर नाम हटाने का विकल्प नहीं, 82 फीसदी पर अटका पीएम सम्मान का लक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: पोर्टल पर नाम हटाने का विकल्प नहीं, 82 फीसदी पर अटका पीएम सम्मान का लक्ष्य
Sat, 11 Jul 2026 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 11 Jul 2026 12:55 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। जिले में पीएम सम्मान निधि के तहत 3.43 लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 2.83 लाख किसानों की आईडी बन गई है। 66 हजार फार्मर आईडी अभी नहीं बनी है। इनमें करीब 17 हजार किसान मृतक पाए गए हैं। इन किसानों को पोर्टल से हटाने का विकल्प नहीं है। ऐसे में जिला लक्ष्य के सापेक्ष 82 फीसदी पर अटका है।
शासन की ओर से किसानों के डिजिटल डेटाबेस तैयार कराने के लिए फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनाई जा रही है। लक्ष्य को शत प्रतिशत हासिल करने में कृषि विभाग को कठिनाई आ रही है। जिले की सभी पांचों तहसील में 17,837 किसान मृतक पाए गए हैं।
इसी तरह चकबंदी के चलते 15,548 किसानों के दस्तावेज राजस्व पोर्टल पर अपलोड नहीं हैं। करीब 22 हजार किसानों के नाम आधार कार्ड और खतौनी में अलग-अलग हैं।
करीब 21 हजार किसानों के गाटा का अंश निर्धारण न होने के चलते उनकी आईडी नहीं बन पा रही है, जबकि सत्यापन के दौरान करीब नौ हजार किसान अपने पते पर नहीं पाए गए। इन सभी परेशानियों के चलते लक्ष्य की शत प्रतिशत प्राप्ति नहीं हो रही है। जिन किसानों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और जो किसान मृतक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शासन की ओर से किसानों के डिजिटल डेटाबेस तैयार कराने के लिए फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनाई जा रही है। लक्ष्य को शत प्रतिशत हासिल करने में कृषि विभाग को कठिनाई आ रही है। जिले की सभी पांचों तहसील में 17,837 किसान मृतक पाए गए हैं।
विज्ञापन
इसी तरह चकबंदी के चलते 15,548 किसानों के दस्तावेज राजस्व पोर्टल पर अपलोड नहीं हैं। करीब 22 हजार किसानों के नाम आधार कार्ड और खतौनी में अलग-अलग हैं।
करीब 21 हजार किसानों के गाटा का अंश निर्धारण न होने के चलते उनकी आईडी नहीं बन पा रही है, जबकि सत्यापन के दौरान करीब नौ हजार किसान अपने पते पर नहीं पाए गए। इन सभी परेशानियों के चलते लक्ष्य की शत प्रतिशत प्राप्ति नहीं हो रही है। जिन किसानों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और जो किसान मृतक हैं।
विज्ञापन