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Saharanpur News: प्रसव के बाद सुरक्षित नहीं हैं नवजात, आठ माह में 212 की हुई मौत
Sun, 17 Dec 2023 01:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:02 AM IST
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सहारनपुर। जिले में प्रसव के बाद नवजात सुरक्षित नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले आठ महीने में 212 बच्चों ने दम तोड़ा। 26 की मौत एक से 28 दिन के अंदर हुई। इनकी मौत का मुख्य कारण निमोनिया और संक्रमण बताया गया। पिछले साल 255 बच्चों की मौत हुई थी।
स्वास्थ्य विभाग की हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) पोर्टल पर बच्चों के जन्म और मृत्यु की जानकारी दर्ज होती है। इस पर सरकारी और निजी अस्पतालों से बच्चों के आंकड़े लेकर दर्ज करने पड़ते हैं। स्वास्थ्य विभाग की अप्रैल से लेकर नवंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 67,622 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 34,858 बालक तो 32,764 बालिकाएं शामिल हैं। 212 बच्चों की मौत हुई। इनके अलावा 26 बच्चों ने एक से 28 दिन के अंदर ही दम तोड़ दिया। चिकित्सकों का कहना है कि मां का खानपान ठीक नहीं होने और जन्म के बाद गंदे हाथों से छूने के कारण संक्रमण फैल जाता है। बच्चों की मौत का बड़ा कारण भी संक्रमण, निमोनिया व कुपोषण है।
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-- बेटियों से अधिक बेटों ने लिया जन्म स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक जिले के सरकारी व निजी अस्पतालों में 1,03,551 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 53,433 बालक और 50,116 बालिकाएं शामिल हैं, यानी बेटियों से अधिक बेटों ने जन्म लिया। 91 बच्चों की एक से 28 दिन के भीतर मौत हुई।
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-- वर्जन
गर्भवती महिलाओं को खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि प्रसव के दौरान बच्चों को कोई दिक्कत न हो। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहा है। उसके तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और बाद में देखभाल की जाती है।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग की हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) पोर्टल पर बच्चों के जन्म और मृत्यु की जानकारी दर्ज होती है। इस पर सरकारी और निजी अस्पतालों से बच्चों के आंकड़े लेकर दर्ज करने पड़ते हैं। स्वास्थ्य विभाग की अप्रैल से लेकर नवंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 67,622 बच्चों ने जन्म लिया। इनमें 34,858 बालक तो 32,764 बालिकाएं शामिल हैं। 212 बच्चों की मौत हुई। इनके अलावा 26 बच्चों ने एक से 28 दिन के अंदर ही दम तोड़ दिया। चिकित्सकों का कहना है कि मां का खानपान ठीक नहीं होने और जन्म के बाद गंदे हाथों से छूने के कारण संक्रमण फैल जाता है। बच्चों की मौत का बड़ा कारण भी संक्रमण, निमोनिया व कुपोषण है।
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गर्भवती महिलाओं को खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि प्रसव के दौरान बच्चों को कोई दिक्कत न हो। बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहा है। उसके तहत गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और बाद में देखभाल की जाती है।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी