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नए आर्डर से वुडकार्विंग निर्यातकों के चेहरे खिले

Mon, 27 Feb 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Mon, 27 Feb 2017 12:19 AM IST
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New orders from exporters face Vudkarving bloom
सहारनपुर का वुडकार्विंग कारोबार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में ग्रेटर नोएडा एक्सपो वुडकार्विंग उद्यमियों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। एक्सपो में सहारनपुर के लकड़ी के हैंडीक्राफ्ट को खूब पसंद किया गया। नए बायर्स ने सहारनपुर की ओर रुख किया है, जिनमें से करीब 50 फीसदी ऑर्डर बुक भी कर लिए गए हैं।  
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जिले में वुडकार्विंग उद्योग से करीब सौ निर्यातक जुड़े हुए हैं। इनके अलावा 1200 से अधिक छोटे सेलर और 80 हजार से अधिक कारीगर हैं। प्रत्येक वर्ष 500 से 600 करोड़ रुपये का टर्न-ओवर रहता है।
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पिछले दिनों हुई नोटबंदी के बाद यह उद्योग मंदे में चला गया। नए ऑर्डर न मिलने की वजह से उत्पादन बंद कर दिया गया। ऐसे में 25 हजार से अधिक कारीगरों के हाथ से काम छिन गया था। 
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सहारनपुर वुडकार्विंग मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन के सदस्य परविंदर सिंह ने बताया कि एक्सपो के बाद करीब 15 नए बायर ने उनसे संपर्क किया है, जो अमेरिका, स्पेन, डेनमार्क, आस्ट्रेलिया आदि जगहों से हैं।

करीब आधा दर्जन आर्डर बुक भी हो गए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी बायर हैं, जो चाइना से भी माल खरीदते हैं। मगर अब उन्होंने चाइना से माल कम कर सहारनपुर की ओर रुख किया है। इससे उनके कारोबार में 20 से 25 फीसदी का इजाफा होना तय है। 

एसोसिएशन अध्यक्ष शेख फैजान भी नए बायर्स के आने से खुश हैं। परविंदर सिहं ने बताया कि नए ऑर्डर के मिलने से उत्पादन शुरू हो गया है। ऐसे में जो लोग घर बैठ गए थे, अब उनकी जरूरत महसूस होने लगी है। वे काम पर लौटने लगे हैं। 

करीब तीन माह पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में शीशम की लकड़ी से बने हैंडीक्राफ्ट के आयान और निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे यहां के कारोबार के 60 से 70 फीसदी ठप हो जाने का आशंका बन गई थी, मगर पिछले दिनों ही इस प्रतिबंध को सशर्त हटा दिया गया,


जिससे इस कारोबार से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एम इकबाल ने बताया कि शीशम का सामान बनाने के लिए निर्यातकों को एक्सपोर्ट काउंसिल से करीब सवा लाख रुपये की मेंबरशिप लेनी होगी।
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