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मस्जिदों के क्षेत्रफल के हिसाब से जारी की नमाजियों की संख्या
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मस्जिदों के क्षेत्रफल के हिसाब से जारी की नमाजियों की संख्या
सहारनपुर। धार्मिक स्थलों में एक समय में पांच लोगों को ही अनुमति दिए जाने के संबंध में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में मात्र पांच लोगों को ही नमाज पढ़ने की बंदिश से मुक्त किया जाए। मस्जिदों के क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या बढ़ाई जाए।
अनलॉक वन के तहत आठ जून से प्रशासन ने धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दी, लेकिन मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों में एक समय में पांच लोगों को पूजा-अर्चना, प्रार्थना व नमाज पढ़ने की अनुमति दी। मंगलवार को मुस्लिम धर्म गुरुओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला। उन्होंने कहा कि मस्जिद में पूरे दिन में सिर्फ पांच बार नमाज होती है। ऐसे में मात्र पांच लोगों को ही नमाज पढ़ने की अनुमति देना नाकाफी है। क्योंकि, यह व्यवस्था लॉकडाउन में चल रही थी। लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ना चाहते हैं। इसलिए प्रत्येक मस्जिद के क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या निर्धारित की जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शहर की प्रमुख जामा मस्जिद में एक साथ हजारों लोग नमाज पढ़ सकते हैं। अगर एक वक्त में 200 से 300 लोग भी नमाज अदा करें तो उनके बीच काफी डिस्टेंस रहेगा। इसी तरह प्रत्येक मस्जिद में क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या निर्धारित की जाए। मुस्लिम समाज कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करता आ रहा है। भविष्य में भी निर्देशों का पालन किया जाएगा। बस, मात्र पांच लोगों के नमाज पढ़ने की बंदिश से मुक्त किया जाए। इस दौरान नायब शहरकाजी नदीम अख्तर, जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना फरीद मजाहिरी, ऑल इंडिया दीनी मदारिस बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना याकूब बुलंदशहरी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष एम. शाहिद जुबैरी, नुमाइंदा जामिया मजाहिर उलूम से मौलाना मुफ्ती, ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मलिक मुगीसी, मौलाना अहमद सईद, डाक्टर शाहकार खान मौजूद रहे।
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सहारनपुर। धार्मिक स्थलों में एक समय में पांच लोगों को ही अनुमति दिए जाने के संबंध में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में मात्र पांच लोगों को ही नमाज पढ़ने की बंदिश से मुक्त किया जाए। मस्जिदों के क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या बढ़ाई जाए।
अनलॉक वन के तहत आठ जून से प्रशासन ने धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दी, लेकिन मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और गिरजाघरों में एक समय में पांच लोगों को पूजा-अर्चना, प्रार्थना व नमाज पढ़ने की अनुमति दी। मंगलवार को मुस्लिम धर्म गुरुओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला। उन्होंने कहा कि मस्जिद में पूरे दिन में सिर्फ पांच बार नमाज होती है। ऐसे में मात्र पांच लोगों को ही नमाज पढ़ने की अनुमति देना नाकाफी है। क्योंकि, यह व्यवस्था लॉकडाउन में चल रही थी। लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ना चाहते हैं। इसलिए प्रत्येक मस्जिद के क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या निर्धारित की जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शहर की प्रमुख जामा मस्जिद में एक साथ हजारों लोग नमाज पढ़ सकते हैं। अगर एक वक्त में 200 से 300 लोग भी नमाज अदा करें तो उनके बीच काफी डिस्टेंस रहेगा। इसी तरह प्रत्येक मस्जिद में क्षेत्रफल के हिसाब से नमाजियों की संख्या निर्धारित की जाए। मुस्लिम समाज कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करता आ रहा है। भविष्य में भी निर्देशों का पालन किया जाएगा। बस, मात्र पांच लोगों के नमाज पढ़ने की बंदिश से मुक्त किया जाए। इस दौरान नायब शहरकाजी नदीम अख्तर, जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना फरीद मजाहिरी, ऑल इंडिया दीनी मदारिस बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना याकूब बुलंदशहरी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष एम. शाहिद जुबैरी, नुमाइंदा जामिया मजाहिर उलूम से मौलाना मुफ्ती, ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मलिक मुगीसी, मौलाना अहमद सईद, डाक्टर शाहकार खान मौजूद रहे।
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