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...मेरी बीबी मुझे बदली हुई हर बार लगती है
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:30 AM IST
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उर्दू अदबी एवं समाजी तंजीम चिरागे अदब के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मोहल्ला खानकाह स्थित शाह मंजिल में काव्य गोष्ठी का उद्घाटन सभासद हारिस सैय्यद ने फीता काटकर किया। शमा रोशन जीशान नजमी ने की। अब्दुल्ला राज की नाते पाक से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। हसरत देवबंदी ने कहा कि ‘नई तहजीब से पूरी तरह मानूस है फिर भी, मेरे बच्चे बुजुर्गों को सराहना पेश करते हैं’।
शमीम किरतपुरी ने कहा ‘किसी को मुबतलाए गम कभी देखा नहीं जाता, तुम्हारे साथ रहने से यह आदत हो गई मेरी’। डा. शमीम देवबंदी ने कहा ‘उलफत, चाहत हमदर्दी की बात कहां, ये किस्से तो यार पुराने लगते हैं’। चौकस देवबंदी ने पढ़ा कभी लगती है शाखे गुल कभी तलवार लगती है, मेरी बीबी मुझे बदली हुई हर बार लगती है’।
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राशिद कमाल, जावेद आसी, शम्स देवबंदी, जुहेर अहमद, अब्दुल्ला राज, नईम अख्तर, सरवर देवबंदी, मसरूर देवबंदी, चौकस देवबंदी, वली वक्कास, अमजद खान, नूर देवबंदी, चांद देवबंदी, डा. सादिक देवबंदी, जाहिद दिलबर, गौहर देवबंदी, नफीस अहमद, अब्दुल्ला शाहिद आदि ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता मंसूर अनवर खान और संचालन सरवर उस्मानी ने किया। इस मौके पर उमेर उस्मानी, मौलाना नसीम अख्तर शाह, मुनव्वर सलीम, मोहम्मद असलम, हारून, नौशाद, फुरकान आदि मौजूद रहे।
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मोहल्ला खानकाह स्थित शाह मंजिल में काव्य गोष्ठी का उद्घाटन सभासद हारिस सैय्यद ने फीता काटकर किया। शमा रोशन जीशान नजमी ने की। अब्दुल्ला राज की नाते पाक से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। हसरत देवबंदी ने कहा कि ‘नई तहजीब से पूरी तरह मानूस है फिर भी, मेरे बच्चे बुजुर्गों को सराहना पेश करते हैं’।
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शमीम किरतपुरी ने कहा ‘किसी को मुबतलाए गम कभी देखा नहीं जाता, तुम्हारे साथ रहने से यह आदत हो गई मेरी’। डा. शमीम देवबंदी ने कहा ‘उलफत, चाहत हमदर्दी की बात कहां, ये किस्से तो यार पुराने लगते हैं’। चौकस देवबंदी ने पढ़ा कभी लगती है शाखे गुल कभी तलवार लगती है, मेरी बीबी मुझे बदली हुई हर बार लगती है’।
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राशिद कमाल, जावेद आसी, शम्स देवबंदी, जुहेर अहमद, अब्दुल्ला राज, नईम अख्तर, सरवर देवबंदी, मसरूर देवबंदी, चौकस देवबंदी, वली वक्कास, अमजद खान, नूर देवबंदी, चांद देवबंदी, डा. सादिक देवबंदी, जाहिद दिलबर, गौहर देवबंदी, नफीस अहमद, अब्दुल्ला शाहिद आदि ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता मंसूर अनवर खान और संचालन सरवर उस्मानी ने किया। इस मौके पर उमेर उस्मानी, मौलाना नसीम अख्तर शाह, मुनव्वर सलीम, मोहम्मद असलम, हारून, नौशाद, फुरकान आदि मौजूद रहे।