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तापमान में गिरावट से बढी मशरूम में गलन की समस्या
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सहारनपुर। लगातार पड़ रही ठंड के चलते बटन मशरूम में गलन की समस्या बढ़ रही है। इसके चलते मशरूम का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मशरूम में गलन की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सुझाव दिए हैं।
पिछले करीब एक पखवाडे़ से तापमान में हो रही गिरावट का असर मशरूम की खेती पर दिखाई देने लगा है। इसके चलते जनपद में कई बटन मशरूम उत्पादन यूनिटों में गलन की समस्या आ रही है। जिसने न सिर्फ मशरूम का उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि मशरूम उत्पादक किसानों की टेंशन को भी बढ़ा दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि मशरूम उत्पादकों की शिकायत के बाद उन्होंने कई यूनिटों का निरीक्षण किया, जिसमें गलन की समस्या सामने आई है। केवीके प्रभारी ने बताया कि उन्होंने मशरूम उत्पादक आशीष, रणवीर, जावेद, भूरा, एहसान और सपना आदि की मशरूम उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया। इसमें गलन की समस्या के चलते मशरूम का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादक इकाई का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से कम होने से यह समस्या पैदा हो रही है। इससे बचाव के लिए किसानों को गल रहे मशरूम को तत्काल हटाकर और नई केसिन मिटटी डालकर उसे समतल कर देना चाहिए। इसके बाद पांच ग्राम ब्लीचिंग पाउडर को 10 लीटर पानी में घोलकर दो से तीन बार छिड़काव कराना फायदेमंद रहेगा। यदि केसिन के ऊपर कवक जाल दिखाई दे रहा हो तो मशरूम के पुराने अवशेष को नीचे से हटा दें और नई केसिन मिट्टी डाल दें। इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कार्बेन्डाजिम 25 प्रतिशत और मैंकोजेब 25 प्रतिशत की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कर दें। उन्होंने कहा कि उत्पादन इकाई का तापमान को बढ़ाने के लिए धूप के समय उसके दरवाजे खोल दें। इससे मशरूम में पैदा हो रही गलन की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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पिछले करीब एक पखवाडे़ से तापमान में हो रही गिरावट का असर मशरूम की खेती पर दिखाई देने लगा है। इसके चलते जनपद में कई बटन मशरूम उत्पादन यूनिटों में गलन की समस्या आ रही है। जिसने न सिर्फ मशरूम का उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि मशरूम उत्पादक किसानों की टेंशन को भी बढ़ा दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि मशरूम उत्पादकों की शिकायत के बाद उन्होंने कई यूनिटों का निरीक्षण किया, जिसमें गलन की समस्या सामने आई है। केवीके प्रभारी ने बताया कि उन्होंने मशरूम उत्पादक आशीष, रणवीर, जावेद, भूरा, एहसान और सपना आदि की मशरूम उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया। इसमें गलन की समस्या के चलते मशरूम का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादक इकाई का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से कम होने से यह समस्या पैदा हो रही है। इससे बचाव के लिए किसानों को गल रहे मशरूम को तत्काल हटाकर और नई केसिन मिटटी डालकर उसे समतल कर देना चाहिए। इसके बाद पांच ग्राम ब्लीचिंग पाउडर को 10 लीटर पानी में घोलकर दो से तीन बार छिड़काव कराना फायदेमंद रहेगा। यदि केसिन के ऊपर कवक जाल दिखाई दे रहा हो तो मशरूम के पुराने अवशेष को नीचे से हटा दें और नई केसिन मिट्टी डाल दें। इस पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कार्बेन्डाजिम 25 प्रतिशत और मैंकोजेब 25 प्रतिशत की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कर दें। उन्होंने कहा कि उत्पादन इकाई का तापमान को बढ़ाने के लिए धूप के समय उसके दरवाजे खोल दें। इससे मशरूम में पैदा हो रही गलन की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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