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पहल : कचरे से छटने वाली प्लास्टिक से पेवर ब्लाक बनाएगा नगर निगम
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सहारनपुर। कचरे से निकलने वाली वेस्ट प्लास्टिक, जिसमें पालीथिन, टूटे प्लास्टिक डिब्बे, बाल्टी आदि अब बेकार नहीं जाएंगे। जहां वेस्ट प्लास्टिक से पेवर ब्लॉक (सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाली टाइल्स) बनाई जाएंगी। इसके लिए नगर निगम बेहट रोड स्थित गांव महेश्वरी खुर्द में प्लांट की जगह तलाश ली गई है। इस प्रस्ताव को बोर्ड की औपचारिकता सहमति मिलनी बाकी है।
देहरादून में स्थित एक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक कमल बहुगुणा ने पेवर ब्लॉक प्लांट को लेकर एक डीपीआर तैयार की है, जो करीब सवा करोड़ रुपये की है। इसे लेकर नगर निगम सहारनपुर के अधिकारियों के समक्ष कमल बहुगुणा दो बार प्रजेंटेशन दे चुके हैं। इसके बाद नगर निगम के अधिकारी प्लांट लगाने का मन बना चुके हैं।
नगर निगम बेहट रोड स्थित गांव महेश्वरी में खरीदी 51 बीघा भूमि के एक हिस्से पर पेवर ब्लॉक प्लांट लगाएगा। वैज्ञानिक कमल बहुगुणा के नेतृत्व में टीम प्लांट लगाकर देगी। उसके बाद नगर निगम इसका संचालन करेगा। इसके बाद निगम कचरे से छांटी जाने वाली वेस्ट प्लास्टिक और सीमेंट आदि को मिलाकर पेवर ब्लॉक का उत्पादन करेगा। इसके बाद नगर निगम को गलियों, सड़क किनारे, पार्कों और सरकारी कार्यालय के परिसरों में टाइल्स खरीदने के लिए इधर उधर नहीं भागना पड़ेगा। वह अपनी बनाई पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल कर सकेगा। साथ ही नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को भी बेच सकेगा।
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नगर पालिका और पंचायतों से भी लेंगे प्लास्टिक
बीते दिनों जिला पर्यावरण समिति की बैठक में भी इस पर चर्चा हो चुकी है। डीएम अखिलेश सिंह ने नगर निगम के साथ ही सभी नगर पालिका, नगर पंचायत और जिन ग्राम सभाओं से भी प्लास्टिक लेकर भविष्य में उक्त प्लांट में इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने प्लांट पर जल्दी से काम शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं।
शहर में हैं दस एमआरएफ सेंटर
नगर निगम ने शहर में दस एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर संचालित कर रहा है। कॉलोनियों से कचरा इकट्ठा कर निगम के कर्मचारी एमआरएफ सेंटरों पर उक्त कचरे को अलग करते हैं। नगर निगम एमआरएफ सेंटरों से अलग की जाने वाली वेस्ट प्लास्टिक को दिल्ली के वेस्ट एनर्जी कंवर्जन प्लांट को देता है। बीते छह माह में दो बार 200 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक दिल्ली भेजी जा चुकी है, मगर भविष्य में निगम उक्त प्लास्टिक का इस्तेमाल पेवर ब्लॉक प्लांट में कर सकेगा। प्लास्टिक की मांग बढ़ने पर एमआरएफ सेंटरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है या फिर महेश्वरी में ही बनने वाले डंपिंग ग्राउंड पर प्लास्टिक को अलग कर प्लांट में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अधिक समय चलती हैं पेवर ब्लॉक
निगम के पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ ने बताया कि वेस्ट प्लास्टिक से बनने वाली टाइल्स जिन्हें पेवर ब्लॉक कहा जाता है, वह सीमेंट से बनने वाली सामान्य टाइल्स से करीब दोगुना अधिक समय तक चलती हैं, यानी धूप, बारिश और वाहनों के लोड से जल्दी खराब नहीं होती हैं।
प्लांट के लिए महेश्वरी में जगह तलाश ली गई है। यह एक बड़ा काम होगा जो निगम की कमाई का जरिया बनेगा। इसके लिए समझौता हो चुका है। - ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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देहरादून में स्थित एक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक कमल बहुगुणा ने पेवर ब्लॉक प्लांट को लेकर एक डीपीआर तैयार की है, जो करीब सवा करोड़ रुपये की है। इसे लेकर नगर निगम सहारनपुर के अधिकारियों के समक्ष कमल बहुगुणा दो बार प्रजेंटेशन दे चुके हैं। इसके बाद नगर निगम के अधिकारी प्लांट लगाने का मन बना चुके हैं।
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नगर निगम बेहट रोड स्थित गांव महेश्वरी में खरीदी 51 बीघा भूमि के एक हिस्से पर पेवर ब्लॉक प्लांट लगाएगा। वैज्ञानिक कमल बहुगुणा के नेतृत्व में टीम प्लांट लगाकर देगी। उसके बाद नगर निगम इसका संचालन करेगा। इसके बाद निगम कचरे से छांटी जाने वाली वेस्ट प्लास्टिक और सीमेंट आदि को मिलाकर पेवर ब्लॉक का उत्पादन करेगा। इसके बाद नगर निगम को गलियों, सड़क किनारे, पार्कों और सरकारी कार्यालय के परिसरों में टाइल्स खरीदने के लिए इधर उधर नहीं भागना पड़ेगा। वह अपनी बनाई पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल कर सकेगा। साथ ही नगर पालिका, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों को भी बेच सकेगा।
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नगर पालिका और पंचायतों से भी लेंगे प्लास्टिक
बीते दिनों जिला पर्यावरण समिति की बैठक में भी इस पर चर्चा हो चुकी है। डीएम अखिलेश सिंह ने नगर निगम के साथ ही सभी नगर पालिका, नगर पंचायत और जिन ग्राम सभाओं से भी प्लास्टिक लेकर भविष्य में उक्त प्लांट में इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने प्लांट पर जल्दी से काम शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं।
शहर में हैं दस एमआरएफ सेंटर
नगर निगम ने शहर में दस एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर संचालित कर रहा है। कॉलोनियों से कचरा इकट्ठा कर निगम के कर्मचारी एमआरएफ सेंटरों पर उक्त कचरे को अलग करते हैं। नगर निगम एमआरएफ सेंटरों से अलग की जाने वाली वेस्ट प्लास्टिक को दिल्ली के वेस्ट एनर्जी कंवर्जन प्लांट को देता है। बीते छह माह में दो बार 200 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक दिल्ली भेजी जा चुकी है, मगर भविष्य में निगम उक्त प्लास्टिक का इस्तेमाल पेवर ब्लॉक प्लांट में कर सकेगा। प्लास्टिक की मांग बढ़ने पर एमआरएफ सेंटरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है या फिर महेश्वरी में ही बनने वाले डंपिंग ग्राउंड पर प्लास्टिक को अलग कर प्लांट में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अधिक समय चलती हैं पेवर ब्लॉक
निगम के पर्यावरण प्लानर डॉ. उमर सैफ ने बताया कि वेस्ट प्लास्टिक से बनने वाली टाइल्स जिन्हें पेवर ब्लॉक कहा जाता है, वह सीमेंट से बनने वाली सामान्य टाइल्स से करीब दोगुना अधिक समय तक चलती हैं, यानी धूप, बारिश और वाहनों के लोड से जल्दी खराब नहीं होती हैं।
प्लांट के लिए महेश्वरी में जगह तलाश ली गई है। यह एक बड़ा काम होगा जो निगम की कमाई का जरिया बनेगा। इसके लिए समझौता हो चुका है। - ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।