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Saharanpur News: खंडहर और जर्जर भवनों को गिराएगा नगर निगम
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-नगर आयुक्त ने मुख्य अभियंता निर्माण को अधिकृत किया, जल्द जारी होंगे नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नागरिकों के लिए खतरा बने जर्जर और खंडहर भवनों को गिराने के लिए नगर निगम की ओर से कार्यवाही शुरू कर दी गई है। नगर आयुक्त द्वारा मुख्य अभियंता निर्माण को इसके लिए अधिकृत किया गया है। जल्द ही संबंधित भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि वह खुद भवनों को नहीं गिराते हैं तो नगर निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
ऐतिहासिक शहर होने के कारण महानगर में बड़ी संख्या में मुगल और अंग्रेजी काल के भवन खड़े हैं, जिनमें परिवार रह भी रहे हैं। बरसात के मौसम में लगभग प्रत्येक वर्ष इन भवनों की दीवार या छत गिरने की घटनाएं होती रही हैं, जिनमें माल के साथ ही लोगों की जान तक गई हैं। ऐसी ही घटनाओं को देखते हुए नगर निगम द्वारा पूर्व में जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। पुराने शहर में 150 से अधिक भवन चिह्नित किए गए थे, जिनमें ज्यादातर 100 साल से भी अधिक पुराने थे, लेकिन नगर निगम उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं कर सका।
अब नगर आयुक्त शिपू गिरि ने नागरिकों के लिए खतरा बने भवनों को चिह्नित कर उनको गिराने की कार्रवाई के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य अभियंता निर्माण सुरेशचंद को अधिकृत किया गया है। इसमें नगर निगम भवनों को चिह्नित कराने के बाद नोटिस जारी करेगा। यदि भवन स्वामी खुद भवनों को नहीं गिराते हैं तो नगर निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
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- नगर निगम को है अधिकार
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धाराओं 119 व 120 में मिली शक्तियों के तहत नगर निगम अपनी सीमा के खंडहर और गिराऊ भवनों पर धारा 331, 332, 333 के तहत सभी प्रकार की कार्रवाई कर सकता है।
कब्जा होने के डर से नहीं छोड़ते भवन
ज्यादातर खंडहर और जर्जर भवनों में आज भी एक नहीं कई-कई परिवार रह रहे हैं। इसकी मुख्य वजह भवनों पर कब्जा बनाए रखना है। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनके जाने के बाद बाकी रह रहे लोग कब्जा न कर लें। इसी लालच में कई परिवार माल के साथ ही जान भी गंवा चुके हैं। कई भवनों पर कब्जों को लेकर मामले कोर्ट में भी विचाराधीन बताए जाते हैं, जिसकी वजह से निगम कार्रवाई नहीं कर पाता है।
- यहां हैं ज्यादातर भवन
ज्यादातर जर्जर भवन पुराने शहर यानी अंबाला रोड, मंडी समिति रोड, चकराता रोड और चिलकाना रोड के बीच में हैं। जिन मोहल्लों में यह भवन बने हैं वहां की गलियां इतनी संकरी हैं। इसीलिए यह जर्जर भवन आसपास के भवनों और उनमें रह रहे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
वर्जन
महानगर में जर्जर और खंडहर भवनों पर कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त द्वारा अधिकृत किया गया है। उनके निर्देश पर निर्माण विभाग जरूरी कार्रवाई करेगा। - सुरेशचंद्र, मुख्य अभियंता, निर्माण, नगर निगम
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नागरिकों के लिए खतरा बने जर्जर और खंडहर भवनों को गिराने के लिए नगर निगम की ओर से कार्यवाही शुरू कर दी गई है। नगर आयुक्त द्वारा मुख्य अभियंता निर्माण को इसके लिए अधिकृत किया गया है। जल्द ही संबंधित भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि वह खुद भवनों को नहीं गिराते हैं तो नगर निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
ऐतिहासिक शहर होने के कारण महानगर में बड़ी संख्या में मुगल और अंग्रेजी काल के भवन खड़े हैं, जिनमें परिवार रह भी रहे हैं। बरसात के मौसम में लगभग प्रत्येक वर्ष इन भवनों की दीवार या छत गिरने की घटनाएं होती रही हैं, जिनमें माल के साथ ही लोगों की जान तक गई हैं। ऐसी ही घटनाओं को देखते हुए नगर निगम द्वारा पूर्व में जर्जर भवनों का सर्वे कराया गया था। पुराने शहर में 150 से अधिक भवन चिह्नित किए गए थे, जिनमें ज्यादातर 100 साल से भी अधिक पुराने थे, लेकिन नगर निगम उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं कर सका।
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अब नगर आयुक्त शिपू गिरि ने नागरिकों के लिए खतरा बने भवनों को चिह्नित कर उनको गिराने की कार्रवाई के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य अभियंता निर्माण सुरेशचंद को अधिकृत किया गया है। इसमें नगर निगम भवनों को चिह्नित कराने के बाद नोटिस जारी करेगा। यदि भवन स्वामी खुद भवनों को नहीं गिराते हैं तो नगर निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
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- नगर निगम को है अधिकार
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धाराओं 119 व 120 में मिली शक्तियों के तहत नगर निगम अपनी सीमा के खंडहर और गिराऊ भवनों पर धारा 331, 332, 333 के तहत सभी प्रकार की कार्रवाई कर सकता है।
कब्जा होने के डर से नहीं छोड़ते भवन
ज्यादातर खंडहर और जर्जर भवनों में आज भी एक नहीं कई-कई परिवार रह रहे हैं। इसकी मुख्य वजह भवनों पर कब्जा बनाए रखना है। उन्हें डर रहता है कि कहीं उनके जाने के बाद बाकी रह रहे लोग कब्जा न कर लें। इसी लालच में कई परिवार माल के साथ ही जान भी गंवा चुके हैं। कई भवनों पर कब्जों को लेकर मामले कोर्ट में भी विचाराधीन बताए जाते हैं, जिसकी वजह से निगम कार्रवाई नहीं कर पाता है।
- यहां हैं ज्यादातर भवन
ज्यादातर जर्जर भवन पुराने शहर यानी अंबाला रोड, मंडी समिति रोड, चकराता रोड और चिलकाना रोड के बीच में हैं। जिन मोहल्लों में यह भवन बने हैं वहां की गलियां इतनी संकरी हैं। इसीलिए यह जर्जर भवन आसपास के भवनों और उनमें रह रहे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
वर्जन
महानगर में जर्जर और खंडहर भवनों पर कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त द्वारा अधिकृत किया गया है। उनके निर्देश पर निर्माण विभाग जरूरी कार्रवाई करेगा। - सुरेशचंद्र, मुख्य अभियंता, निर्माण, नगर निगम