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सब्र का महीना है रमजान : फारुकी

ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 04 Jun 2017 12:16 AM IST
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मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी
मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

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सहारनपुर के देवबंद में दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि पवित्र रमजान रहमतों और बरकतों का महीना है।
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इसमें अल्लाह की बेशुमार रहमतें बरसती हैं। रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर उन्हें दोजख से आजादी का परवाना अता करता है। रमजान सब्र का महीना है और सब्र का इनाम जन्नत है। 


शनिवार को रमजान माह पर प्रकाश डालते हुए मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि सब्र का रमजान से गहरा ताल्लुक है। रोजे की हालत में इंसान खाने पीने और जिस्मानी ख्वाहिशात से रुकता है।

रमजान को गमख्वारी का महीना इसलिए करार दिया गया है कि इस मुबारक महीने में हम गरीब, असहाय और जरुरतमंदों का भी ख्याल रखें और खैरात से उनकी मद्द करें।

उन्होंने कहा कि मोहम्मद साहब ने फरमाया कि जब रमजान मुबारक की पहली रात आती है तो अल्लाह आसमान से फरिश्तों के जरिये ऐलान करता है कि है कोई माफी मांगने वाला हो, जिसको मैं माफ कर दूं।

कोई औलाद की तमन्ना करने वाला हो, जिसे मैं औलाद की नेमत अता कर दूं। कोई बीमारी से शिफा मांगने वाला हो, जिसे मैं बीमारी से छुटकारा दे दूं। 
यह ऐलान सुबह सादिक तक होता रहता है। मुफ्ती अरशद ने कहा कि रोजा रमजान की अहम इबादत है। रोजा ऐसी इबादत है जो रुहानी और जिस्मानी एतबार से इंसान के लिए फायदेमंद है।

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