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Saharanpur News: मोरगंज बाजार क्षेत्र में बंदरों का आतंक, कइयों को काटा
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सहारनपुर। मोरगंज बाजार क्षेत्र में बंदरों का आतंक लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बंदरों के झुंड लगातार घरों की छतों पर घूमते रहते हैं। लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। एक बंदर कई लोगों को काट चुका है। इसकी वजह से महिलाओं और बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
मोरगंज निवासी प्रमोद गोयल ने बंदरों से संबंधित शिकायत अमर उजाला को मेरी आवाज सुनो कॉलम के लिए भेजी थी। समस्या की पड़ताल की गई। पड़ताल के दौरान लोगों ने बताया कि बंदर छतों पर फैले कपड़े खींचकर नीचे फेंक देते हैं। साथ ही बाहर सूख रहे सामानों को भी बंदर उठा ले जाते हैं। इससे कई बार परेशानी होती है। कई बार बंदरों का झुंड इकट्ठा हो जाता है। एक बंदर बीते 20 दिन में कई लोगों को काट भी चुका है। कई बार बंदरों को पकड़वाने की मांग की गई, लेकिन अभी तक समस्या का हल नहीं निकला है।
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-- बोले क्षेत्रवासी
- शिवराज खन्ना ने बताया कि बंदरों के डर से घर की छत पर जाना बंद कर दिया है। पहले सुबह टहलने जाते थे, अब डर के मारे दरवाजा भी नहीं खोलते। यह अब सिर्फ परेशानी नहीं, खतरे की स्थिति बन गई है।
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- विजय शर्मा ने बताया कि बंदर रोज कपड़े खींचकर नीचे गिरा देते हैं। बच्चों का छत पर खेलना बंद हो गया है। प्रशासन से कई बार शिकायत की है। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
- शैलेंद्र भूषण गुप्ता ने बताया कि बंदरों का झुंड अब क्षेत्र की स्थायी समस्या बन गया है। बच्चों को स्कूल भेजते समय भी डर लगता है, कहीं कोई हमला न कर दे।
- वीरेंद्र मोहन मित्तल ने बताया कि छत पर सामान सुखाने के लिए रखते हैं। बंदर सामान उठा ले जाते हैं। बंदरों की संख्या बहुत अधिक हो गई है, कई बार हमला करने का डर रहता है।
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मोरगंज निवासी प्रमोद गोयल ने बंदरों से संबंधित शिकायत अमर उजाला को मेरी आवाज सुनो कॉलम के लिए भेजी थी। समस्या की पड़ताल की गई। पड़ताल के दौरान लोगों ने बताया कि बंदर छतों पर फैले कपड़े खींचकर नीचे फेंक देते हैं। साथ ही बाहर सूख रहे सामानों को भी बंदर उठा ले जाते हैं। इससे कई बार परेशानी होती है। कई बार बंदरों का झुंड इकट्ठा हो जाता है। एक बंदर बीते 20 दिन में कई लोगों को काट भी चुका है। कई बार बंदरों को पकड़वाने की मांग की गई, लेकिन अभी तक समस्या का हल नहीं निकला है।
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- शिवराज खन्ना ने बताया कि बंदरों के डर से घर की छत पर जाना बंद कर दिया है। पहले सुबह टहलने जाते थे, अब डर के मारे दरवाजा भी नहीं खोलते। यह अब सिर्फ परेशानी नहीं, खतरे की स्थिति बन गई है।
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- विजय शर्मा ने बताया कि बंदर रोज कपड़े खींचकर नीचे गिरा देते हैं। बच्चों का छत पर खेलना बंद हो गया है। प्रशासन से कई बार शिकायत की है। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
- शैलेंद्र भूषण गुप्ता ने बताया कि बंदरों का झुंड अब क्षेत्र की स्थायी समस्या बन गया है। बच्चों को स्कूल भेजते समय भी डर लगता है, कहीं कोई हमला न कर दे।
- वीरेंद्र मोहन मित्तल ने बताया कि छत पर सामान सुखाने के लिए रखते हैं। बंदर सामान उठा ले जाते हैं। बंदरों की संख्या बहुत अधिक हो गई है, कई बार हमला करने का डर रहता है।