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मोदी-योगी के निर्देश न आए काम, अरुण ने तोड़ दिया दम
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:18 AM IST
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प्रधानमंत्री से मदद की गुहार करती बिटिया।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के गंगोह में आखिरकार प्रशासनिक सिस्टम की उदासीनता ने गांव अलीपुरा निवासी मासूम ईशू के सिर से पिता अरुण का साया छीन ही लिया। करीब चार माह पूर्व छह साल की मासूम ईशू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोमा में जा चुके अपने पिता का उपचार कराने की गुहार लगाई थी।
जिस पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने संज्ञान लिया और उनके कार्यालय से प्रशासन को मद्द के निर्देश दिए गए थे। तब अफसरों ने बड़े-बड़े वायदे किए, मगर बाद में अधिकारी परिजनों को बहलाते रहे और उपचार के अभाव में अरुण की घर पर ही मौत हो गई।
गंगोह ब्लाक के गांव अलीपुरा निवासी अरुण फोटोग्राफर का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व थाना मिर्जापुर के एक गांव से लौटते वक्त बाइक में ट्रैक्टर-ट्राली की टक्कर लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चला गया था।
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दुर्घटना से 15 दिन पूर्व ही उसकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया था। बड़ी बेटी ईशु उस वक्त पांच साल की थी। दुर्घटना के बाद अरुण की पत्नी ने जगाधरी और उसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ में उसका उपचार कराया। करीब एक साल तक चले उपचार में परिवार की माली हालत बदतर हो गई, लेकिन अरुण की हालत में सुधार नहीं हुआ।
छह साल की मासूम बेटी ईशु से अपने पिता की हालत और माता की बेबसी देखी नहीं जा रही थी। तब 12 सितंबर को उसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पिता के इलाज की गुहार लगाई थी। मामला सुर्खियों में आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया था।
उनके कार्यालय से प्रशासन को अरुण का इलाज कराने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, प्रशासन ने मात्र 50 हजार रुपये का चेक देकर पल्ला झाड़ लिया। उधर, आरोप है कि करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होने के बाद पैसे न दिए जाने पर चिकित्सक ने भी अरुण को अस्पताल से घर भेज दिया था। सोमवार को बीमार अरुण की मौत हो गई।
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जिस पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने संज्ञान लिया और उनके कार्यालय से प्रशासन को मद्द के निर्देश दिए गए थे। तब अफसरों ने बड़े-बड़े वायदे किए, मगर बाद में अधिकारी परिजनों को बहलाते रहे और उपचार के अभाव में अरुण की घर पर ही मौत हो गई।
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गंगोह ब्लाक के गांव अलीपुरा निवासी अरुण फोटोग्राफर का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व थाना मिर्जापुर के एक गांव से लौटते वक्त बाइक में ट्रैक्टर-ट्राली की टक्कर लगने से वह गंभीर रूप से घायल होकर कोमा में चला गया था।
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दुर्घटना से 15 दिन पूर्व ही उसकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया था। बड़ी बेटी ईशु उस वक्त पांच साल की थी। दुर्घटना के बाद अरुण की पत्नी ने जगाधरी और उसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ में उसका उपचार कराया। करीब एक साल तक चले उपचार में परिवार की माली हालत बदतर हो गई, लेकिन अरुण की हालत में सुधार नहीं हुआ।
छह साल की मासूम बेटी ईशु से अपने पिता की हालत और माता की बेबसी देखी नहीं जा रही थी। तब 12 सितंबर को उसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पिता के इलाज की गुहार लगाई थी। मामला सुर्खियों में आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया था।
उनके कार्यालय से प्रशासन को अरुण का इलाज कराने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, प्रशासन ने मात्र 50 हजार रुपये का चेक देकर पल्ला झाड़ लिया। उधर, आरोप है कि करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होने के बाद पैसे न दिए जाने पर चिकित्सक ने भी अरुण को अस्पताल से घर भेज दिया था। सोमवार को बीमार अरुण की मौत हो गई।