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Saharanpur News: सिर्फ नाम के मिनी ग्राम सचिवालय, न खुलते और न कर्मचारी बैठते

Thu, 28 Nov 2024 11:44 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 11:44 PM IST
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Mini Gram Sachivalaya exists only in name, neither is it open nor are the employees present
तीतरों के गांव बाल्लू में ग्राम सचिवालय पर दोपहर 12 बजे लटका ताला। संवाद
सहारनपुर। ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए बनाए मिनी ग्राम सचिवालयों से ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा है। सचिवालयों में ग्राम पंचायतों से जुड़े विभागों के कर्मचारी की तैनाती है, लेकिन सचिवालयों का ग्रामीणों को कितना लाभ मिल रहा है इसे लेकर बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई। जिसमें स्थिति ठीक नजर नहीं आई।
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दरअसल, जनपद के 11 ब्लॉकों की 884 ग्राम पंचायतों में मिनी ग्राम सचिवालय बनाए गए थे। यहां पर ग्राम पंचायत से जुड़े सभी विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। ग्रामीणों को योजनाओं और पेंशन से संबंधित ऑनलाइन आवेदन करने की भी व्यवस्था की गई थी। कुछ माह तो ग्राम सचिवालयों में कार्य होते रहे, लेकिन अब ग्राम सचिवालयों में विभागों के कर्मचारी बैठते हुए नजर नहीं आ रहे। कई ग्राम पंचायतों सचिवालयों पर ताले लटके मिले हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिवालयों में पूरी तरह लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में ग्रामीणों को कलक्ट्रेट और विकास भवन के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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- रामदासपुर उर्फ नागल में लटका मिला ताला
ग्राम पंचायत रामदासपुर उर्फ नागल में बने सचिवालय पर सुबह 11 बजे भी ताला लटका मिला। ग्रामीण अनिल कश्यप, अमित कुमार, अनमोल अरोड़ा ने बताया कि सचिवालय में सप्ताह में एक पंचायत सचिव बैठते हैं, जबकि पंचायत सेविका रोजाना सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक बैठती है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है।
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- दल्हेड़ी में बंद पड़ा मिला सचिवालय
बड़गांव क्षेत्र के दल्हेड़ी में सुबह 11:15 बजे सचिवालय पर ताला लटका मिला, जबकि नियम है कि रोजाना कर्मचारी सुबह दस से दोपहर दो बजे तक ग्रामीणों की परेशानी सुनकर उसका निस्तारण कराएं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सचिवालय से किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है। वृद्धा पेंशन के लिए बुजुर्गों को विकास भवन के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसी तरह गांव बोहडूपुर का सचिवालय 11:45 बजे सचिवालय बंद मिला। यहां के निवासी घनश्याम सैनी व शाहनवाज मलिक ने बताया कि ग्राम सचिव का सचिवालय पर आने का कोई समय नहीं है। न ही पंचायत सहायक सचिवालयों में बैठते हैं।


- वर्जन :
ग्राम सचिवालय समय पर खुलते हैं। अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच होगी। - आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी
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