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पशु कटान पर रोक से मीट कारोबार हुआ प्रभावित

Wed, 29 Mar 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 29 Mar 2017 11:59 PM IST
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Meat business affected by prohibition on animal cutting
मीट प्लांट सील - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर में प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद तमाम अवैध बूचड़खाने बंद करा दिए गए हैं। इतना ही नहीं, एनजीटी के नियमों को पूरा नहीं करने वाले वैध बूचड़खानों पर भी प्रशासन ने ताले लटक गए है।
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जिले में संचालित ऐसे ही चार वैध बूचड़खाने इन दिनों बंद हैं, जिसकी वजह से मीट का कारोबार धड़ाम हो गया है। जिले में चार वैध बूचड़खाने हैं। पहला नगर क्षेत्र में कमेला कॉलोनी में है, जो नगर निगम की देखरेख में चलता है।
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इसमें पहले प्रतिदिन 75 पशु के कटान की अनुमति थी। साथ ही इसका मीट शहर क्षेत्र के लोगों के इस्तेमाल के लिए होता था। मगर बाद में यहां 150 पशुओं के कटान मीट को बाहर भेजने की अनुमति भी मिल गई।
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सरकार की सख्ती के बाद एनजीटी के नॉर्म्स को पूरा नहीं करने की वजह से यह बूचड़खाना बंद करा दिया गया है। दूसरा वैध बूचड़खाना गागलहेड़ी में है, जिसमें प्रतिदिन 600 पशुओं के कटान की अनुमति है। यह भी सरकार की सख्ती के बाद से बंद है। 

 इसके अलावा दो बूचड़खाने गंगोह में हैं, जिनमें प्रतिदिन 100-100 पशुओं को काटने की अनुमति है। इनमें एक बूचड़खाना जिला पंचायत और दूसरा नगर पालिका के अंडर में आता है। शासन की सख्ती के बाद यह दोनों बूचड़खाने भी बंद करा दिए गए।

यानी शहर में प्रतिदिन होने वाला 950 पशुओं का कटान बंद है। इसकी वजह से मीट कारोबार तो प्रभावित हो रहा है। साथ ही मीट का सेवन करने वाले लोग भी परेशान हैं। 

एक वर्ग विशेष में शादी-विवाह में मीट का प्रचलन है। मगर जिले में तमाम वैध और अवैध बूचड़खानों के बंद होने की वजह से शादी और विवाह के लिए भी मीट नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग परेशान हैं। इसके अलावा मीट खाने के शौकीन लोकल लोगों के सामने भी मीट का संकट आ गया है। 

बूचड़खानों में काम करने वाले हजारों लोगों के हाथ से काम छिन गया है, जिसकी वजह से वह बेरोजगार हो चले हैं। इसके अलावा जिलेभर में खुली मीट कर करीब 700  दुकानें भी बंद हो चुकी हैं।

ऐसे में दुकानदारों के सामने परिवार का पेट पालने की चुनौती खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि वैध बूचड़खानों को पुन: चालू कराया जाए, जिससे लोगों का रोजगार चलता रहे। 

बूचड़खानों पर पाबंदी को लेकर अधिकारी असमंजस में हैं। दरअसल, प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खानों को बंद कराया जाना भाजपा का चुनावी एजेंडा था। ऐसे में सरकार बनने के बाद प्रदेशभर के अधिकारियों ने अवैध के साथ ही खामियों के बीच चल रहे वैध बूचड़खानों को भी बंद करा दिया है। जबकि उनके पास शासन के कोई लिखित आदेश नहीं हैं। 

बूचड़खानों के बंद होने से मटन और चिकन के दाम में अचानक से 40 से 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। सरकार बनने से पहले तक चिकन 150 रुपये से 160 रुपये प्रति किलो बिक रहा  था मगर अब इसके दाम 300 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसी प्रकार मटन 400 रुपये किलो बिक रहा था, मगर अब इसके दाम भी 500 को पार कर गए हैं। 

होटलों में मटन या फिर चिकन बिकता है। ऐसे में बूचड़खानों के बंद होने का होटलों पर कोई असर नहीं पड़ा है। पंजाब होटल के स्वामी सुरजीत सिंह ने बताया कि बूचड़खाने बंद होने से बड़े का गोश्त मिलना बंद हुआ है, जो होटलों में नहीं चलता।

होटल में मटन और चिकन के दाम पहले वाले ही हैं। उधर, लैमन होटल के स्वामी गुरविंदर सिंह ने भी बूचड़खाने बंद होने का मटन और चिकन की कीमत पर कोई असर न होने की बात कही। 

पशु पैठ पर असर नहीं प्रदेशभर में बूचड़खानों को बंद कराने के लिए प्रशासन की सख्त है। मगर पशु पैठ पर इसका कोई असर नहीं है। जिले में अनेक जगहों पर पशु पैठ लगती हैं, जहां दुधारू पशु भी खूब बेचे और खरीदे जाते हैं। बूचड़खाने बंद होने के बावजूद पशु पैठ पहले की तरह चल रही हैं। 


इन दिनों नवरात्रे चल रहे हैं। ऐसे में मटन और चिकन बेचने वालों का धंधा भी ठंडा पड़ा है। जिन होटलों में नॉनवेज चलता था। ऐसे होटलों ने नवरात्रे तक नॉनवेज बेचना बंद कर दिया है।

अब केवल शाकाहारी भोजन ही लोगों को परोसा जा रहा है। इतना ही नहीं, होटलों में व्रत का भोजन और व्रत खोलने तक की सुविधा ग्राहकों को दी जा रही है। 
 
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