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Saharanpur News: महापौर ने किया एसटीपी का निरीक्षण, मिलीं खामियां
Thu, 20 Jun 2024 03:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 20 Jun 2024 03:11 AM IST
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सहारनपुर। महापौर डॉ. अजय कुमार ने मल्हीपुर रोड स्थित एसटीपी का औचक निरीक्षण किया, जहां उन्हें खामियां ही खामियां मिली। इतना ही नहीं, एसटीपी द्वारा उपचारित कर ढमोला में छोड़े जा रहे पानी का नमूना लेकर जांच के लिए भी भिजवाया।
डॉ. अजय कुमार बुधवार की सुबह जलकल अनुभाग के महाप्रबंधक बीके सिंह, अधिशासी अभियंता वीबी सिंह और सहायक अभियंता राजेंद्र प्रसाद को साथ लेकर एसटीपी पर पहुंचे। प्लांट का संचालन उत्तर प्रदेश जल निगम की नगरीय इकाई द्वारा व सीवर कार्य जल निगम की देखरेख में कार्यदायी संस्था वीएटेक ववाग द्वारा किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान महापौर ने पाया कि प्लांट में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। भवनों की सामग्री बिखरी पड़ी मिली और परिसर में ही पशु विचरण करते मिले। कुछ कर्मचारियों द्वारा परिसर में पशु पालन किया जा रहा है, साथ ही एसटीपी की ढमोला साइड की दीवार टूटी मिली।
इसके अलावा प्लांट आधा चलता मिला। क्लोरीनेशन के संबंध में भी वहां तैनात जल निगम के कर्मचारी जानकारी नहीं दे पाए। निरीक्षण के बाद महापौर ने बताया कि एसटीपी से उपचारित होने के बाद जो पानी ढमोला में छोड़ा जा रहा है उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। ऐसे में उसका नमूना लेकर जांच के लिए भिजवाया गया है। जिससे कि उसमें बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा का पता चल सके। उन्होंने बताया कि एनजीटी ने निर्माण, सिंचाई आदि कार्यों के लिए ट्रीटमेंट प्लांट से डिस्चार्ज होने वाले पानी की बीओडी 0-30 निर्धारित की है, लेकिन एसटीपी से डिस्चार्ज पानी प्रथम दृष्टया देखने में इससे अधिक बीओडी का दिखाई दे रहा है।
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डॉ. अजय कुमार बुधवार की सुबह जलकल अनुभाग के महाप्रबंधक बीके सिंह, अधिशासी अभियंता वीबी सिंह और सहायक अभियंता राजेंद्र प्रसाद को साथ लेकर एसटीपी पर पहुंचे। प्लांट का संचालन उत्तर प्रदेश जल निगम की नगरीय इकाई द्वारा व सीवर कार्य जल निगम की देखरेख में कार्यदायी संस्था वीएटेक ववाग द्वारा किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान महापौर ने पाया कि प्लांट में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। भवनों की सामग्री बिखरी पड़ी मिली और परिसर में ही पशु विचरण करते मिले। कुछ कर्मचारियों द्वारा परिसर में पशु पालन किया जा रहा है, साथ ही एसटीपी की ढमोला साइड की दीवार टूटी मिली।
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इसके अलावा प्लांट आधा चलता मिला। क्लोरीनेशन के संबंध में भी वहां तैनात जल निगम के कर्मचारी जानकारी नहीं दे पाए। निरीक्षण के बाद महापौर ने बताया कि एसटीपी से उपचारित होने के बाद जो पानी ढमोला में छोड़ा जा रहा है उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। ऐसे में उसका नमूना लेकर जांच के लिए भिजवाया गया है। जिससे कि उसमें बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा का पता चल सके। उन्होंने बताया कि एनजीटी ने निर्माण, सिंचाई आदि कार्यों के लिए ट्रीटमेंट प्लांट से डिस्चार्ज होने वाले पानी की बीओडी 0-30 निर्धारित की है, लेकिन एसटीपी से डिस्चार्ज पानी प्रथम दृष्टया देखने में इससे अधिक बीओडी का दिखाई दे रहा है।
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