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Saharanpur News: शहीद भगत सिंह ने फुलवारी आश्रम में काटी थी फरारी

Sun, 11 Aug 2024 12:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2024 12:51 AM IST
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Martyr Bhagat Singh spent his time in hiding in Phulwari Ashram
सहारनपुर। आजादी के आंदोलन में सहारनपुर की अहम भूमिका रही है। यहां ऐसे कई स्थल हैं, जिनका जंगे आजादी से गहरा रिश्ता है। इन्हीं में से एक है बाबा लालदास मार्ग स्थित फुलवारी आश्रम। यह वो जगह है, जहां शहीद ए आजम भगत सिंह ने फरारी काटी थी। वह कई दिन तक आश्रम के मंदिर की गुंबद में रहे थे।
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नमक आंदोलन की नींव 18 अप्रैल 1930 को अजीत प्रसाद जैन की अगुवाई में सहारनपुर में ही रखी गई थी। छह अप्रैल 1930 के बाद दांडी में जब महात्मा गांधी ने नमक कानून तोड़ा तो यहां भी आंदोलन की ज्वाला फूट पड़ी। 24 अप्रैल को ललता प्रसाद अख्तर और कांग्रेस के सदर मौलवी मंजूर उल नबी को नौजवान सभा का जलसा करने के आरोप में अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था। 26 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ने का आंदोलन शुरू हुआ। 13 मई को महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के बाद यहां भी क्रांतिकारियों पर मुकदमे हुए। इसी बीच शहीद ए आजम भगत सिंह दो बार सहारनपुर आए और फुलवारी आश्रम स्थित मंदिर के ऊपर गुंबद में बनी गुफा में रहे। यहां उन्होंने गुप्त बैठकें भी की थी। इसीलिए पांवधोई नदी के किनारे बसा फुलवारी आश्रम आजादी के आंदोलन का गवाह रहा।
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फुलवारी आश्रम में बनाया गया था नमक
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर 26 अप्रैल 1930 से सहारनपुर में नमक कानून तोड़ने का आंदोलन शुरू हुआ। गुरुकुल कांगड़ी से आए एक जत्थे के नेतृत्व में दस हजार लोगों के साथ शहर के प्रमुख बाजारों से होता हुआ एक जुलूस फुलवारी आश्रम पहुंचा। विशाल जुलूस को देखकर अंग्रेजी अफसरों में हड़कंप मच गया। इसके बाद फुलवारी आश्रम में छह हजार लोगों की मौजूदगी में नमक बनाया गया और नमक की पुड़िया नीलाम की गई, जिससे 85 रुपये प्राप्त हुए। नमक बनाने के लिए लोहनी मिट्टी गाजियाबाद से लाई गई थी। यहां जत्थेदारों ने लोगों से नमक का कानून तोड़ने और विदेशी कपड़ा छोड़ने की अपील की। 27, 28 और 29 अप्रैल को भी फुलवारी आश्रम में नमक बनाकर कानून तोड़ा गया और गिरफ्तारियां दी गई। यहां विदेशी कपड़ों की होली भी जलाई गई।
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शहीद भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू का कहना है कि सहारनपुर और यहां के क्रांतिकारियों का जंगे आजादी में बड़ा योगदान रहा। फरारी के दौरान शहीद ए आजम भगत सिंह सहारनपुर दो बार आए और फुलवारी आश्रम में रुके थे। चूंकि अंग्रेजों को उनकी तलाश थी ऐसे में उन्हें आश्रम में बने मंदिर की गुंबर की गुफा में रहना पड़ा था।
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